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ढेरों बातें ....

Posted On: 12 Apr, 2017 Others में

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Alka

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ढेरों बातें ,
मन के बक्से में इकठ्ठा हो गई हैं,
थोड़ा ही खाली है बस कुछ एक दिन में ये भर जायेगा |

ये बातें ,
दरअसल खर्च ही नहीं होती आजकल ,
तुमसे गुफ्तगू जो नहीं की कई दिनों से मैंने ,

पहले तो दिन में कई बार बातें होती थी ,
कुछ छेड़खानी कुछ शिकवे शिकायत होती थी |

पहले तो कुछ रूठना मानना होता था ,
कुछ बचपन की यादें कुछ तुम्हारा अफसाना होता था |

पहले तो कई घंटे कुछ लम्हों में सिमट जाते थे ,
उस खिलखिलाहट पे सच में हम मर जाते थे |

सोचती हूँ इस बातों वाले बक्से को
बहुत सम्हाल के सहेज के रखूंगी मै ,

क्या पता कई सालों बाद मिलो जब तुम ,
तो तुमसे करने को कोई बात ही न हो |

तब इसी बक्से को खोल कर
सारी बातें निकाल लाऊंगी मै ,

फिर ढेरों बातें ,
मन के बक्से से बाहर आ जाएँगी ,

फिर उन्हें सुनकर तुंम खिलखिलाओगे ,
फिर उस खिलखिलाहट पे सच में मै मर जाउंगी |

क्या तुम आओगे सुनने
ढेरो बातें…
अधूरी बातें …

अलका .

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