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मेरे अंदर की वो लड़की ...

Posted On: 27 Apr, 2017 Others में

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Alka

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मेरे अंदर की वो लड़की ,
एक उम्र पे आकर रुक गई है शायद
बड़ी ही नहीं होती अब तक |

ठठा कर हसती है अब भी ,
जब कोई दोस्त पुराने मिल जाये कही पर |

मेरे अंदर की वो लड़की ,
चली आती है मुझसे मिलने ,
बिन बुलाये ही अक्सर
न जाने कितनी बातें पुरानी
बताती रहती है वो दिन भर

मेरे अंदर की वो लड़की
गोद में माँ की सिमट कर ,
उसके आँचल में सर रखकर

लेती रहती है अब भी घंटों अक्सर |

मेरे अंदर की वो लड़की ,
अपने शहर की गलियों में
बिना जाये ही पहुँच जाती है अक्सर
नहर के पानी में डुबा के पैर अपने
मछलियां गिनती रहती है शाम ढले तक

मेर अंदर की वो लड़की ,
अब भी जाती है तनिक शरमा
की जैसे अब भी कोई
खड़ा आँगन में पास तुलसी के
देख कर मुस्करा रहा हो जैसे

मेरे अंदर की वो लड़की ,
अब भी बचाये रखे है
मुझमे कुछ जिंदादिली ,
कुछ अल्हड़पन और कुछ बचपन

आज भी गोल करके होंठों को ,
बना के कुछ अजीब चेहरा
रोकतीं है आंसू अपनी पलकों में
कोई बचपन के साथी याद आते हैं जब उसको |

|मेरे अंदर की वो लड़की ,
न जाने क्यों बहुत भाती है इस दिल को
कभी जब कुछ दिनों तक नहीं दिखती
तो कुछ अच्छा नहीं लगता

चाहती मै भी यही हूँ
की वो लड़की यूँ ही ताउम्र
मेरे अंदर रहे जिन्दा ,
मेरे अंदर की वो लड़की
ठहरी रहे इक उम्र पर हरदम
बचाये रखे मुझमे कुछ जिंदादिली कुछ बचपन

मेरे अंदर की वो लड़की …

अलका ..

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