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मेरे छत की मुंडेर पर ...

Posted On: 1 Mar, 2017 Others में

SukirtiJust another weblog

Alka

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मेरे छत की मुडेर पर आज चाँद बैठा है ,
ना जाने क्यों मुझे कुछ
उदास सा लगता है मेरे जैसा

उसके पिछलगू वो तारा
चमक तो रहा है पूरी शिद्दत से,
पर चाँद की पेशानी पे पड़ी उदासी
उसको कौन मिटाएगा,

शायद वो ढूंढता है किसी को ,
तभी तो पूरा दिखता भी नहीं है
आधा ही नजर आता है |

अभी तो जाना है दूर तलक
इन्तजार लंबा है ,
पर चाँद बढ़ता जायेगा

हर दिन इन्तजार में जलकर
अपनी रौशनी बढ़ाते हुए
जिस दिन अपनी चांदनी से मिल जायेगा
उस दिन वो पूरा हो जायेगा |

चांदनी से मिलकर ढेरों अठखेलियां कर
अपने प्यार से पूरे जग को जगमगायेगा
मेरे छत की मुडेर वाला चाँद
फिर उदास ना रह जायेगा

वो उदास चाँद फिर मुस्कराएगा
फिर मुस्कराएगा …

अलका ..

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