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गजल ..कितनी दूर निकल आये ..

Posted On: 26 May, 2017 Others में

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Alka

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न मंजिलों का पता था ,
न रास्ते ही समझ आये
मगर फिर भी एक हाथ पकड़
कितनी दूर निकल आये |

न कोई साथ ही था ,
न कोई पास ही था
फिर भी मगर किसी को
अपनी जिंदगी ही बना लाये

न किसी ने कुछ माँगा हमसे
न हमने ही कुछ पाने की चाहत की
फिर भी बहुत कुछ ले आये
और अपना बहुत कुछ दे आये |

अब भी वही सुबहे ,वही शामे,
वही हवा वही दरख्त हैं मगर
न जाने क्यों ये सारे
कुछ बदले बदले से नजर आये |

उस एक आवाज को सुनने को
अभी भी ये दिल है बेताब
ये अलग बात है की भुलाने का उसे
हम बस दिखावा ही कर पाए |

मेरी दुनिया में बहुत से
फूलों की खुशबू है मगर
उस एक खुशबू के लिए
क्यों आँखें भीग सी जाये |

हम कितनी दूर निकल आये ,
क्यों इतनी दूर निकल आये ..

अलका …….

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