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झंडा बाइक पैसे में और गर्भ निरोधक मुफ्त में

Posted On: 14 Aug, 2016 Others में

all indian rights organizationHuman rights is becoming a culture in the era of Nation-State concept....now a person leads to behaviour .one is governed by his/her conventional culture and other one is administered by human rights culture in the nation -state frame.so this resonance gives a space to discuss human being in the frame of human rights instead of his conventional culture...this blog will discuss all aspects of life regarding Human rigts

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प्रधानमंत्री के नाम एक भारतीय का पत्र
आदरणीय प्रधानमंत्री जी स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर आपको राष्ट्र निर्माण के लिए शुभकामना क्योकि मैं जनता हूँ कि आप के पास समय नहीं है एक भारतीय की बात सुनने के लिए क्योकि १२५ भारतीयों को आपको देखना है पर शायद इसी लिए इस देश में कोई कुछ भी अकेले कहना ही नहीं चाहता वो बड़े बड़े गुट बना कर कश्मीर तोड़ रहा है देश तोड़ रहा है पर मुझे गुरु रविन्द्र नाथ टैगोर की पंक्तियाँ शक्ति देती है एकला चलो एकला चलो ………..मुझे नहीं मालूम कि जिस देश में गर्भ निरोधक का मुफ्त में असफल वितरण करने के बाद भी अरबो रूपया कह्र्च किया जा रहा है जिस देश में फ़ूड कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया हर वर्ष करोडो रुपये का गेहूं खुले में सड़ा देती है और जिस देश में बलात्कार और हत्या रोकने के कोई सार्थक उपाए तो नहीं है पर हत्या या बलात्कार हो जाने के बाद पीडितो को लाखो रूपये देने के लिए है उस देश में अपने नागरिको को देने के लिए मुफ्त में राष्ट्रीय तिरंगा नहीं है उसको एक भारतीय खरीद कर लेता है जिस चन्द्र शेखर आजाद में इस तिरंगे को रंग देने के लिए गोली मार ली जिस जह्न्दे में ना जाने कितने शूरवीरो की गाथा छिपी है जिनके लिए देश से बढ़ कर कुछ नहीं था उन वीरों के त्याग को बाजारीकरण में रंग दिया गया और तिरंगा बेचा जाने लगा मुझे नहीं पता कि राष्ट्र को क्यों नहीं ये बात कभी चुभी कि क्या तिरंगा के पैसे होने चाहिए . देश की हर बड़ी पार्टी के पास अरबो रुपये चंदे में आते है पर कोई भी पार्टी में इतना नैतिक सहस नहीं हो रहा है कि वो तिरंगे को मुफ्त में राष्ट्र में देने का संकल्प ले . यदि हम झंडे  को बेचने का मनोविज्ञान इस देश में विकसित कर रहे है तो इस देश के लोगो को राष्ट्र प्रेम के बजाये राष्ट्र का दोहन करने का तथ्य ज्यादा समाहित होता जायेगा . यदि मेरा पत्र प्रधानमंत्री तक जाता होता तो मुझे विश्वास है कि मुझे आज तक एक तिरंगा मुफ्त में प्रधानमंत्री से प्राप्त हो चूका होता पर इस देश में सच बोलने का प्रचलन ही ख़त्म होता जा रहा है और मैं जनता हूँ कि आप तक लिखे जाने वाले कोई भी पत्र आपके संज्ञान में ही नहीं होते भले ही वो कितने ही राष्ट्रीय महत्व के हो . इस देश में तिरंगा यात्रा करके या लाल चौक पर तिरंगा फहराने से देशभक्ति नहीं आएगी जब तक इस देश के पाठ्यक्रमो में तिरंगे के लिए नहीं पढाया जायेगा और एक बच्चा नर्सरी से जब तक नहीं जानेगा कि ये तरंगा है तो स्वतंत्रता है और तब इस राष्ट्र में तिरंगे यात्रा की कोई सार्थकता है . तिरंगा जमीन में न गिर जाये इसके लिए बलिया में लोगो ने गोली खायी है और आज वही तिरंगे ३ ४ रुपये में बिकता है लोग सड़क पर फेक देते है और उसको एक गाड़ी कुचलते हुए निकल जाती है क्योकि हमारे अंदर भावना ही नहीं है . ये एक सत्य है कि हम जिनको पैदा होने के बाद माँ पिता भाई बहन मान लेते है वही रिश्ते कानून और सामाजिक रूप से स्थायी होते है इसी लिए तिरंगे को समझने के लिए हमें उसको सही तरह से प्रस्तुत करना होगा . तिरंगा इस देश में मुफ्त में नहीं मिल सकता है पर दूसरे देश को हमारा देश करोडो डालर  सहयता में दे सकता है . गैस पर सब सीडी दी जा सकती है , पट्रोल पर सब सीडी दी जा सकती है पर इस देश में तिरंगा खरीद का ही पाया जा सकता है उसको मुफ्त में नहीं दिया जा सकता है . कल १५ अगस्त है और मुझे एक स्कूल की तरफ से आग्रह किया गया की आकर मैं झंडा रोहण करूँ पर अमिने ये कहते हुए उनका आमंत्रण स्वीकार नहीं किया कि मैंने देश में खरीद कर लाये गए झंडे के नीचे खड़े होकर राष्ट्र को स्वतंत्रता दिवस की बधाई नहीं दे सकता है क्योकि ये हमारे देश के वीरो शहीदों का अपमान है मुझे जब तक इस देश में एक राष्ट्रीय ध्वज बिना किसी मूल्य का उपलब्ध नहीं कराया जायेगा और जब तक इस देश के प्रधानमंत्री जी को मेरी बात में कोई वास्तविकता नहीं दिखाई देगी तब तक मैंने राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराऊंगा क्योकि देश के संविधान के नीति निदेशक तत्व के अनुच्छेद ५१ अ के अनुसार ये मेरा और प्रधानमन्त्री जी सहित हर भारतीय की का कर्तव्य हैकि वो राष्ट्रीय ध्वज के सामान के लिए कार्य करें . यदि देश में किसी को भी ये लगता है कि ध्वज खरीद ध्वज के दर्शन में छिपी शौर्य गठाव का अपमान नहीं है तो ये उस व्यक्ति की भूल है और उसको ध्वज के लिए सदैव कार्य करना चाहिए . प्रधामंत्री जी आपको ये पत्र भी नहीं मिलेगा ऐसा मुझको लगता है पर मैंने तब तक इस राष्ट्र में ध्वज नहीं फहराऊंगा जब तक मुझे एक बिना मूल्य का तिरंगा नहीं प्रदान कर दिया जाता है अब ये आप पर है कि आप एक भारतीय के इस जज्बात और राष्ट्र प्रेम के प्रति क्या दृष्टिकोण रखते है और उस पर कैसा आदेश या निर्णय लेते है ……जय राष्ट्र झंडा ऊँचा रहे हमारा भारत माँ की जय

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