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जे.जे.ब्लॉगर्स पर व्यंग के बाउंसर्स (हैप्पी न्यू ईअर)

Posted On: 16 Jan, 2012 Others में

IPLHanso Hansao Khoon Badhao

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नमस्कार, आदाब सतश्रीकाल मैं सचिन देव नए वर्ष मैं अपने फुल्ली फालतू एस डी चैनल पर आप सभी साथियों का हार्दिक स्वागत करता हूँ, इस सूचना के साथ के आज से हम अपने चैनल पर एक नया प्रोग्राम शुरू करने जा रहे हैं जिसका नाम है व्यंग के बाऊंसर जिसमे मैं, सचिन देव मंच से जुडी ख़बरों और मंच से जुड़े लोगों पर अपने व्यंग के घातक बाऊंसर फेकूंगा इस वैधानिक चेतावनी के साथ की यदि मेरे इन बाऊंसर से कोई ब्लोगर टूट – फूट जाए, तो उसके लिए मैं और सिर्फ मैं पूर्णत उत्तरदायी हूँ और ऐसे किसी भी घायल ब्लौगर को यह संवैधानिक अधिकार है कि वह मेरे विरुद्ध किसी भी अदालत मैं अपील कर सकता है ! तो आइये इसी वैधानिक चेतावनी के साथ हम शुरू करते हैं अपना ये नया प्रोग्राम जिसका नाम है व्यंग के बाऊंसर ……..

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साथियों सुनने मैं आया है कि हमारे मंच के एक साथी संदीप कौशिक जी आजकल बड़े परेशान हैं और उनकी परेशानी कि बजह ये है की वे जिस भी आलेख पर कमेन्ट देते हैं वह स्पैम मैं चला जाता है, इस बाबत जब हमारी खोजी टीम ने खोज की तो इसका राज पता चला की सीनियर्स के पोस्ट पर यदि टाइम पर कमेन्ट नहीं दोगे तो ऐसा ही होगा यार ! हम अपने एस डी चैनल के माध्यम से जे जे से ये विनम्र अनुरोध करते हैं कि इनकी समस्या का शीघ्रातिशीघ्र समाधान करे ताकि ये वक्त पर कमेन्ट कर सकें, धन्यबाद !

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अगली खबर निशा मित्तल जी के बारे मैं है सुनने मैं आया है कि जिस कक्षा मैं निशा जी पढाती हैं उसके पचहत्तर प्रतिशत बच्चे फेल हो गए, काफी मशक्कत के बाद हमारे खोजी दस्ते ने ये राज खोज निकाला कि ऐसा क्यों हुआ, अरे भैय्या जब निशा जी सारा दिन जे जे के ब्लॉग पढ़ेंगी तो बच्चों को कब पढाती होंगी भाई ……

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सुनने मैं आया है कि रौशनी धीरजी आजकल जो कविता कर रही हैं उस पर कई लोगो ने ये प्रतिक्रिया दी कि वे काफी उदासी मैं कविता लिखती हैं ! ये जानने के लिए जब हम रौशनी जी से मिले और इस बाबत पूछा तो रौशनी जी भड़क पड़ीं बोली ओए कौन बोला तैनू कि अस्सी उदास रेह्न्दे हैं अस्सी तो बड्डे मस्त मौला हैं जी … !
फिर आप ऐसी कविता क्यों लिखती हैं ?

“उड़ने लगती हूँ बिना पंखो के मै यूँ ही,
वो हवा सा जब भी गुजर जाता है पास से…..
एक दिन मिल जाते है बिछड़े हुए सभी,
ए–काश वो भी मिल जाये इसी इत्तेफाक से…..”


अच्छा वो, ओए सचिन देव तुस्सी समझया नहीं इस लाइन द मतलब, मैं तुस्सी सम्झांदी आं, दरअसल गल ई है जी की जे जे का एक मित्र मेरे से पैसे उधार लेकर गायब हो गया है, और मैं उसे ढूंढ रही हूँ जिस दिन भी इत्तेफाक से वो मुझे मिल गया ते मैंने इतनी जूतियाँ लगानी हैं उसमे कि मुआ बिना पंख के ही हवा मैं उड़ता फिरेगा !

ओह तो ये बात है, अरे रौशनी जी जब आप तारों का कारोबार करोगी, और इनकम पर टैक्स नहीं भरोगी तो कोई न कोई तो पैसे लेकर भागेगा ही न ……

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दोस्तों जिस दिन से मैंने डॉक्टर सूरज बाली की एक रचना पढ़ी उसी दिन से बड़ा परेशान सा हूँ ….

ग़म-ए-ज़िंदगी से डरके मैं रोया कभी नहीं॥
अश्क़ों से अपने गाल भिगोया कभी नहीं॥
ख़ुशबू बदन की उसके ना उड़ जाये इसलिए,
बिस्तर की अपने चादरें धोया कभी नहीं॥

और तभी से सोच रहा हूँ कि आखिर डॉक्टर बाली ने चादरें धोई क्यों नहीं ? आखिरकार हमारे खोजी दस्ते ने इसका भी राज खोज निकाला कि डॉक्टर साहब ने ऐसा क्यों किया ! दरअसल इनकी महबूबा सुबह जल्दी उठकर चली गई थी, और उस दिन काम वाली बाई भी नहीं आई फिर ये चादर धोता कौन भाई ? डॉक्टर साहब प्लीस चादर धुलवा लीजिए वर्ना डॉक्टर बाली से आप डॉक्टर एक चादर मैली सी हो जायेंगे भाई !

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सुनने मैं आया है की हमारे मंच के एक साथी जो की आजकल कल्पनावादी और यथार्थवादी लेखकों पर शोध कर रहे हैं, जब काफी मशक्कत के बाद भी ये फैसला नही कर पाए की टिम्सी मेहता कल्पनावादी लेखिका हैं या यथार्थवादी तो वे सीधे जा पहुंचे टिम्सी मेहता जी के घर खुद उनसे पूछने के लिए ! और जब उन्होंने गुनगुनी धूप सेंकती टिम्सी मेहता जी से ये सवाल किया तो उन्होंने कहा देखिये न मैं कल्पनावादी हूँ, और न ही मैं यथार्थवादी हूँ, मैं तो जी बस रचनात्मकवादी हूँ ! इसे कहते हैं असली रचनात्मकता, रचनात्मकता का झुनझुना देकर ये तो दोनों मैं शामिल हो गई भाई !

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हमारे न्यूज चैनल को मंच के हमारे अहम साथी अशोक रक्तले जी के बारे मैं एक बहुत ही अहम जानकारी मिली है और जानकारी यह है की रक्तले जी की सेविंग किसी अन्य ब्लोगर्स से 250/- प्रतिमाह अधिक है, और सबसे आश्चर्यजनक बात ये है की इनकी ये सेविंग बिना सेविंग किये हो रही है ! अब आप सोच रहे होंगे वो कैसे ? तो वो ऐसे यदि आज आप किसी भी सेलून मैं सेव बनवाते हैं तो एक बार मैं सेविंग के 25/- रुपये लगते हैं, और यदि आपने महीने मैं दस बार सेव बनवाई तो आपका खर्चा 250/- हुआ ! और भैय्या जब रक्तले जी सेविंग करवाते ही नहीं तो हुईं न बिना सेविंग किये सेविंग !

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सुनने मैं आया है की हमारे मित्र अबोध बालक जी अगले चुनाव मैं पियूष पन्त जी के आह्वान के बाद भी अपने मत का दान नहीं कर पाएंगे ! वो क्यों ? अरे भैय्या हमारे देश मैं नाबालिगों को मतदान करने का अधिकार जो नहीं है भाई !

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दोस्तों अभी हाल ही मैं हमारे मनोरंजक साथी मनोरंजन ठाकुर जी को जे जे ने श्रेष्ठ ब्लोगर्स ऑफ द वीक करार देते हुए उनको जे जे के फ्रंट पेज पर लटका दिया ! और जैसा कि आप जानते ही हैं कि आजकल हमारे देश मैं जबरदस्त ठण्ड पड़ रही , और इतने ठण्ड मैं टंगे टंगे मनोरंजन जी की हालत जब चाय मैं डूबे बिस्किट जैसी खराब हो गई तो ये रात को लगभग 3 बजे अचानक जे जे से तस्वीर सहित गायब हो गए और ठण्ड मैं ठिठुरते हुए जे जे के ओफ्फिस मैं पहुंचे चाय पीने के लिए, इन्हें देखते ही वहाँ मौजूद जे जे मंडल के एक अधिकारी ने इनसे पूछ ही लिया !

आओ ठाकुर आओ अभी तक ???????? हो !
और ये बोले चाय पिलाते हो तो रुकता हूँ वर्ना मैं चला अपने घर !

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हमारे चैनल को उडती – उडती खबर मिली है कि राजकमलजी ने जो रक्षा धागा पहना था उसे किसी जिन्नी ने तोड़ दिया है और राजकमल जी को जिन्नी अधिकृत कश्मीर बना डाला है ! और आजकल जो राजकमल जे जे पर दिखाई दे रहे हैं वे असली नहीं हैं उन पर कोई भयानक प्रेत्तात्मा का साया है ! वो कैसे ? अरे भैय्या वो ऐसे, कि जो राजकमल तीन दिन मै एक ब्लॉग लिखता था वो तीस दिन मैं सिर्फ एक ब्लॉग  लिखे तो हुआ न नकली  राजकमल !

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जबसे उत्तर प्रदेश मैं चुनाव घोषित हुए हैं तबसे  हमारे मित्र राजेंद्र रतूरी जी काफी व्यस्त हैं, और अपनी इसी व्यस्तता के चलते आजकल  जे जे पर  दिखाई भी नहीं देते, क्योंकि मायावती जी को किसी ने ये बात बता  दी कि इन्होने  जे जे पर हाथी बचाओ मुहीम चला रखी है, बस फिर क्या था उसी दिन से मायावती जी ने इन्हें अपने पर्सनल सचिव का कार्यभार सौंप दिया ! क्यों ? अरे भैय्या मायावती जी का हाथी भी तो आजकल खतरे मै है न !

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लंबे समय से हमारे साथी वाहिद काशीवाशी मंच पर जल्वानुमा नहीं हो रहे हैं, और जब हमारे संवाददाता  ने इस सम्बन्ध मैं उनसे बात कि तो उन्होंने बताया की उन्होंने ख्वावों की जो फसल लगाईं थी, वह पककर लगभग तैयार है और  अब उसे काटने का वक्त आ गया है, जैसे ही फसल कट जायेगी वह फिर से कुछ नए ख्वावों के बीज और ख्यालों की खाद लेकर जे जे के खेत मैं उपस्तिथ होंगे !

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सुनने मैं आया है कि करवा चौथ वाले दिन शाही जी की कॉलोनी की दर्जन भर व्रतधारी पतिव्रताओं ने शाही जी को चारों  ओर से घेर लिया , इन गोपियों के बीच घिरे कन्हैय्या ( शाही जी ) इससे पहले की कुछ समझ पाते उनमे से एक महिला ने आगे बढ़कर शाही जी से कहा ” भाईसाहब कृपया करके आज रात को आप छत पर मत आना आपको देखकर महिलाओं मैं चाँद निकलने का भ्रम फ़ैल सकता है, जिससे बिना चाँद देखे ही हमारा व्रत टूटने की भारी आशंका है !

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जबसे हमारे साथी शशिभूषण जी को मोस्ट वीऊ ब्लोगर ऑफ द वीक चुना गया है, वे जश्न मैं मग्न हो गए हैं , और जाम पर जाम, जाम पर जाम चढा और चढवा रहे हैं ! और जब हमारी खोजी टीम उनसे मिली और इस बाबत बताया तो, फिर गिरा – उठा – फिर दौड़ पड़ा, गिरा – उठा – फिर दौड़ पड़ा ! करते हुए उन्होंने अंतत रचना रच ही दी ! शुक्र है भगवान का दौड पड़े वर्ना, हमारे चैनल की खबर सुनकर जे जे से उनके अभिन्न मित्र जे एल सिंह जी, और शुक्ल भ्रमर जी चार – छ मुस्टंडे लेकर निकल पड़े थे उन्हें दौडाने के लिए !

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सुनने मैं आया है की भाई संतोषसिंह जी का हुक्का पानी उनकी गाँव की पंचायत ने एक महीने के लिए बंद कर दिया है ! और आश्चर्य की बात ये है की ये फैसला उन्ही के मूरख मंच के भीखू चाचा ने अपने 170 पन्ने के अपने फैसले मैं दिया ! फैसला थोडा लंबा है पूरा आदेश आप हमारी वेबसाइट sdnews.com पर पढ़ सकते हैं ! यहाँ हम संक्षिप्त मैं भीखू चाचा का बयान सुनाते हैं जो उन्होंने संतोष जी के विरुद्ध सुनाया है !

“ काय हो संतोष, ये काहे किया रे तू, ससुरा हमरे गाँव का मूरख मंच मैं बईठ के, हमसे अन्ना को चिठिया लिखवाय के, हमरे गाँव का गीत बनाए के बदले , वहाँ लुधियाना शहर का गीत बनाए दिया रे तू , औउर हम सबका मूरख बनात रहा ! ईका सजा तोहका मिलेगी रे संतोष्वा बराबर मिलेगी ! अरे ओ आसरे उतार लो ईका गाँव का वर्दी और पहिना दो ईका लुधियाना का नया कुर्ता ! और उस दिन से संतोष भाई जी नई सज धज के साथ लुधियानवी बने घूम रहे हैं !

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सुनने मैं आया है की नए साल का जश्न मनाने के लिए जागरण मंच की सारी की सारी सम्मानित महिला ब्लोगर्स ने एक जगह एकत्र होने का फैसला किया और उनमे से कुछ नाम ये है

मीनूजी, दिव्याजी, साधनाजी, अलकाजी अमीताजी
तमन्नाजी, सुमनजी, प्रवीनजी रीताजी विनीताजी
अरे ये क्या ये तो बन गई एक अच्छी कविताजी

और जैसे ही ये कविता बनी हमारे आ़लराउंडर जी को ये बात याद आ गई कि पिछले दस दिनों मैं जागरण अखबार मैं एक भी कविता प्रकाशित नहीं हुई बस उन्होंने पिछले सारे अखबार इकट्ठे किये और पहुँच गए जे जे कार्यालय और संपादक जी से पूछा सर ये क्या मैंने जब से आपका विशिष्ट खंड पढ़ना प्रारंभ किया है वहाँ एक भी कविता नहीं छापी आप लोगों ने उनकी ये बात सुनकर, सभी लोग ठहाका लगाकर हंस पड़े बोले अरे महाराज हमारे संपादन मंडल ने आज तक जे जे की कोई कविता पढ़ी ही नहीं थी तो छपती कैसे ?
अरे तो महोदय अब तक पढ़ी काहे नहीं ?
अरे हम से किसी ने कहा ही नहीं !
अरे महाशय अब तो हम सब कह रहे हैं पढ़ लीजिये न !
हाँ तो भई अब आप आये हो, सबकी फ़रियाद लाये हो, तो पढ़ लेते हैं और छाप  देंगे एकाध – ठो कविता भी !


इसी बाउंसर के साथ समाचारों का ये ओवर यहीं समाप्त करते हैं इस कामना के साथ के आने वाला वर्ष मंच से जुड़े सारे साथियों के लिए नई  खुशियाँ लेकर  आये! तो अब आप  इजाजत दीजिये अपने दोस्त और होस्ट सचिन देव को इस  वादे के साथ कि हम फिर हाजिर होंगे कुछ और नई और चटपटी ख़बरों के साथ !

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