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गर्व से कहो हम भ्रष्टाचारी हैं! (२)

Posted On: 12 Jun, 2011 Others में

व्यंग वाण ...थोडा मुस्कुरा लें.....धरती को हिलाने से वो पीपल न गिर पड़े....

Amit Dubey

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घर की रजिस्ट्री कराने का सौभाग्य बड़ी किस्मत से मिलता है… पर अंदेशा तो हमें भी था… की ये कार्य बाबा रामदेव के अनशन से भी दुरूह है…
इधर धर्म पत्नी ने कसम खा ली की घर की रजिस्ट्री तो बिना एक पैसा घूस दिए ही कराएँगे…पर आखिर काग्रेस भी तो कोई चीज़ है देश में….
पहला कदम था रजिस्ट्री के लिए स्टाम्प पेपर खरीदना…सो हम लोग यथा वक़्त, कलेक्ट्रेट पहुच गए… बाबु जी कमरे की सफाई करा रहे थे……इधर किसी ने बाबू जी से पूछा …क्या बात है…बड़ी झाड पोंछ चल रही है…
“हाँ उधर बाबा रामदेव देश की गन्दगी साफ़ कर रहे हैं…इधर हमने सोचा हम ऑफिस ही साफ़ कर ले”… और खींसे निपोर दोनों हंसने लगे…….
इस अलौकिक द्रश्य को देखकर में विभोर हो उठा…सरकारी आफिस में इमानदार व्यक्ति…सहसा आँखों पे विश्वास नहीं हुआ… क्या देश बदल गया है… क्या मैं वाकई सरकारी आफिस में हूँ?…. पर ये चमत्कार कुछ ही पलों में काफूर हो गया…
मैंने कृतज्ञ और सम्मान पूर्वक भाव लिए महाशय जी से अनुरोध किया…. “माफ़ कीजिये महाशय, हमें कुछ स्टाम्प पेपर लेने है….आप हमारी मदद कर सकते हैं ?”
बाबू जी ने चश्मा चढ़ाया और आँखों पे गर्व और दुत्कार के भाव एक साथ चढ़ाए…. गर्व इस बात का की में उनसे मदद मांग रहा हूँ और दुत्कार इस बात की कि सुबह सुबह काम कराने चले आये…”

इसके लिए तो ड्राफ्ट बनेगा… कोषाधिकारी के नाम से……आप आज ड्राफ्ट जमा करेंगे तो ४- ५ दिन बाद आपको स्टाम्प पेपर मिलेंगे…..बाबु जी ने हवा में चारो तरफ देखते हुए मुह खोला…

क्या मैं नकद पैसे दे के स्टाम्प खरीद सकता हूँ ?, मैंने सूचना मांगने के अंदाज़ में गुजारिश की…
अजीब आदमी है आप….पढ़े लिखे हो के ऐसी बात करते है (उसे शायद मेरे कपडे देख के लगा होगा की मैं पढ़ा लिखा हूँ )……..आजकल नकद में कहाँ काम होता है…. मैं इतना नकद पैसा कैसे ले सकता हूँ… आप जाईये ड्राफ्ट बना के लाइए बस…!
अब मुझे उसकी बातो में, घूस मांगने की खुशबू आने लगी थी….उसका व्यक्तित्त्व अचानक बाबा रामदेव से बदल के दिग्विजय सिंह बन गया….और उसे मेरे वहां खड़े होने पे भी ऐतराज होने लगा…..
अब मुझे वही बोलना था जो वो सुनना चाहता था….
मैंने भ्रष्ट गुरु श्री ए राजा साब को याद किया, खींसे निपोरी… और पुनः गुजारिश की ….कुछ कीजिये सर ,,,हमने आज रजिस्ट्री के लिए पूरे दिन की छुट्टी ली है… अब स्टाम्प पेपर तो हमें आज ही चाहिए होंगे ना …
आप लोग भी ना… बहुत परेशान करते हैं…जाइए कैश ले आईये… देखते है… कोशिश करते है……उसने कुछ इस तरह का भाव दिया…की चलो अब तुम्हारे लिए में कानून में फेर बदल कर देता हूँ….
थैंक यूं कह के मैं वहां से लौटा…और मेरे दिमाग में इस बात की अंकगणित हो रही थी… के ये लेगा कितना?… ..” क्या कुछ पैसा, मैं ऊपर वाली जेब में रख लूं…लाखो के स्टाम्प लेके कहूँगा की सर मेरे पास तो १०० ही बचे है…इत्यादि इत्यादि…

उधर धर्म पत्नी ने ऐसे घूर के देखा ” की तुम से तो बिना घूस के कुछ काम ही नहीं होता, एक बेचारे बाबा अनशन किये जा रहे हैं…तुम घूस के समंदर के भर भर लौटा पानी बहाए जा रहे हो…”

अगला काम था, ऑथोरिटी पहुंचना,……..रजिस्ट्रार आफिस के बाहर विहंगम द्रश्य था……खस के टप्पर और तखत डाले काले कोट में मंडराते हुए वकील ऐसे लग रहे थे मानो, बरसात की सुबह में, कौए काँव काँव कर मंडरा रहे हो, और कुछ दलाल नुमा मेंढक, बिना किसी लक्ष्य के इधर से उधर भटक रहे थे…
हमें देखते ही कुछ दलाल और वकील हमारी और लपके……..हमने एक गंभीर भाव बनाये रखा…और ये जताया की हमें सब पता है……और जैसे हम तो यहाँ आते जाते रहते हैं……
सीधे रजिस्ट्रार आफिस पहुच के हमने, बीच में बैठे एक आदिमानव नुमा इंसान जो की काली स्याही से होली खेल रहा था… और किसी का भी हाथ पकड़ के रंग देता था…..के सामने अपने कागज पत्तर धर दिए…..और कहा…..”महाशय हमें घर की रजिस्ट्री करानी है”
महाशय ने एक दलाल नुमा इंसान की और रुख करते हुए कहा… “जाओ इनकी रजिस्ट्री करा दो “…….हम दलाल नुमा इंसान के पीछे पीछे बाहर आ गए….
और वो इंसान अपनी बातों में इज्जत भर भर के उड़ेलने लगा…….अरे सर…..आप बैठिये…आधे घंटे में काम हो जायेंगा…कहाँ आप सरकारी बाबुओ से उलझेंगे… हमारी सब सेटिंग है….हम आपके स्टाम्प भी यहीं ला देंगे….आप स्टाम्प लेने जायेंगे तो आप को बोलेगा ड्राफ्ट लेके आओ……और टरकायेगा ……में उसके अंतर्ज्ञान से प्रभावित हुए जा रहा था…..की इसको तो सब पता है….
आपकी फीस कितनी होगी..मैंने बात लगभग बात काटते हुए बोला…… मेरे इस प्रश्न से वो थोडा व्यथित हुआ……अरे सर ले लेंगे जो भी बनता होगा थोडा बहुत,….
कितना, बनता है…… मैंने बात साफ़ करते हुए पूछा…
चलो आप ३ हजार दे देना…..
तीन हजार किस बात के ….काम तो हम सब करके आये हैं……हम खुद जाके ही रजिस्ट्री करा लेंगे… धर्म पत्नी ने वकील को झिड़कते हुए कहा…..
वकील आहत हुआ, पर उसने अपना मनोबल बनाए रखा…….अरे सर…. हर जगह देना पडेगा….दो हजार तो बाबू लोग ही ले लेंगे…..और काम तो हम आपका पक्का करवा देंगे….

धर्म पत्नी के अन्दर……बाबा रामदेव के अनशन का गहरा प्रभाव था….और इन भ्रष्टाचारियों से नफरत….. हम इन सभी वकीलों को झिड़कते हुए सीधे, ऑथोरिटी ऑफिस में प्रवेश कर गए….
हमने अपने सारे पेपर्स ले जाके बाबू के आगे धर दिए…..”सर प्लीज़ चेक कर लीजिये यदि कुछ मिसिंग है तो…”……बाबू ने पेपर पर नजर भी नहीं डाली…..और शून्य में देखते हुए कहा….उसमे सब लिखा है……खुद पढ़ लीजिये,,,,

अच्छा यहाँ क्या लिखना है…धर्मपत्नी ने फार्म की और इशारा करते हुए कहा……

मुझे नहीं पता……. नीचे जाके वकीलों से पूछो…..वो बताएँगे….बाबु ने फिर शून्य में ताकना शुरू कर दिया,,,
हम लोग वापिस आके बैठ के खुद फार्म से माथा पच्ची करने लगे…..और लगभग पूरा फार्म भर के फिर पंहुचे,,,,,
लीजिये….ये हमारे डाकुमेंट ले लीजिये…….
ये यहाँ खाली पड़ा है….. इसको भरिये,,,, बगल में बैठे दुसरे बाबु ने फार्म रिजेक्ट करते हुए झिड़का….
क्या भरना है इसमें….मैंने फिर हिमाकत की……
मुझे नहीं पता…..आप लोग पड़े लिखे हैं,,,,,,,,ढूंढ लीजिये उसमे सब लिखा है,……..(दो पल को हमें लगा हम क्यों पढ़े लिखे हैं….काश अनपढ़ होते तो शायद हमें ये बता देता)…..
काफी जद्दोजहद के बाद हमें लगा की ये हमसे ऐसे फार्म नहीं लेगा…..और हम यहाँ ऐसे ही बैठे रहेंगे……
बाबा रामदेव को दो पल के लिए भूलना पडेगा नहीं तो हम रजिस्ट्री नहीं करवा पाएंगे…
मैंने कांग्रेस का चोला ओढ़ा, और महाशय के पास फुसफुसाया….. “कुछ मदद कीजिये सर”
बहार जाइये ….वकील आपको सब बता देंगे…….
वकील जो मांग रहा है….वो आप ही ले लो….. और काम ख़तम करो….”मैंने अक्लमंद बनते हुए राय जाहिर की”
तीर निशाने पे जा बैठा…वकील क्या मांगता है…..
वो तो १५०० मांग रहा है (मैंने जानबूझ के कम बताया)…..
१५०० में , तो फिर वकील से ही करा लो….. (वो लगभग गुस्सा हो गया)…..
आप बताइए आप कितना लेंगे…. (मैंने बाल फिर उसके कोर्ट में ड़ाल दी)….
आप कितना देना चाहते है…. (वो शायद मेरे थ्रू मार्केट रेट पता कर रहा था)…..
५००- ६०० रूपए ले लीजिएगा…(मैंने खीसे निपोरी…)
५०० रुपए तो चपरासी भी नहीं लेता (वो लगभग चिल्लाया,….मैंने उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुचाई थी, मैं ग्लानी भाव से भर उठा…..)
काम तो सर आपने ही करना है….तो फिर दाम भी आप ही बता दीजिये….
२५०० लगेंगे…..(ऑथोरिटी और रजिस्ट्री दोनों काम करा दूंगा)……..
२५०० तो थोड़े ज्यादा है….(मैंने अंतिम कोशिश की )……
इससे नीचे कुछ नहीं होगा….आप जाओ और वकीलों से काम करा लो…. ( उसने जताया की मैं उसका वक़्त बर्बाद कर रहा हूँ, और फिर वो अपने जरूरी काम, शून्य को निहारने लगा!!)

मरता क्या न करता…..इससे पहले की मैं उसके और प्रवचन सुनूँ मैंने हथियार ड़ाल दिए……
ओके सर…..तो फिर फटाफट काम कर दीजिये….
मेरे ओके करते ही जैसे उसके शरीर मैं रजनीकांत की आत्मा घुस गयी……
उसके हाथ दुधारी तलवार की तरह चलने लगे…. उसने मेरे हाथो से पेपर छीने और कहा, आप आराम से बैठ जाइये मैं सब कर दूंगा……
अचानक वो ज्ञान वान हो गया, और उसके अन्दर सदभाव, सम्मान, और इंसानियत सारे गुण घुस गए,…… और वो फार्म खुद ही भरने लगा….पेपर लगाने लगा……..
अब उसके कार्य मैं समर्पण की भावना साफ़ दिख रही थी….और मैं २५०० रूपए के चमत्कार से हतप्रभ था…..एक अज्ञान आदमी जिसे दो पल पूर्व कुछ भी नहीं पता था…..अब सब कुछ ऐसे कर रहा है मानो उसे वर्षों का अनुभव हो……
आ हां…….अभूतपूर्व …..
फटाफट…..बड़े बाबुओ के हस्ताक्षर हो गए… और हम रजिस्ट्री ऑफिस जा पंहुचे …..
मामला अभी ख़तम नहीं हुआ था………रजिस्ट्री ऑफिस पंहुचते ही कुछ….इंसान नुमा…..गिध्ह हमारी और लपके….
“बड़े बाबु की फोटो लगेगी इसमें…..५० रूपए में दो फोटो ले लो.” ….”लाइए में आपका नंबर लगवा देता हूँ” आदि… आदि…
बाबु जी ने एक व्यक्ति हमारे साथ लगा दिया था….वो जहाँ जहाँ कहता गया ….हम दक्षिणा चढाते गए….

यहाँ १०० रूपए दे दीजिये…
इस को २०० दे दो…….
इस को ५० दे दो…..

इत्यादि इत्यादि…

और दो पल को मुझे लगा में सरकारी ऑफिस नहीं मंदिर में आया हुआ हूँ…..मैं अपने दान भावना से कृत कृत था,……

रजिस्ट्री करा के जैसे हम बाहर निकले…..वो हाथ फिर से फ़ैल गया….. ” और मेरे लिए….. ”

आपके लिए क्या ? …..आप ही कहने पे तो सबको दिए जा रहा हूँ….मैं भुनभुनाया…..

अरे सर घर की रजिस्ट्री करा के जा रहे हैं….कुछ तो बनता है……(और उसके चेहरे पे भिखारियों वाली…..कृपणता छलकने लगी)..

मैंने मन मसोस के जेब में हाथ डाला …..उसमे २०० रूपए बचे थे…. मैंने उसे १०० रूपए दे ते हुए कहा….. (अब यही बचे हैं)…

चलो रहने दो सर बाद में लूँगा….उसने उदारता दिखाई….

उसके इस वाक्य ने मुझे डरा दिया…. (नहीं नहीं बाद में नहीं ये रखो)….वो १०० रूपए लेने को तैयार नहीं था….१०० रूपए उसके स्टैण्डर्ड से कम होंगे शायद…..इसलिए वो मजबूर था,…….

मुझे २०० रूपए देने पड़े….

और हाथ झडाते और एक रिसीप्ट हाथ में लेके हम बाहर आये तो बहार TV पे न्यूज़ चल रही थी…….

“बाबा रामदेव के अनशन पर सरकार का कहर….रात डेढ़ बजे औरतो और बच्चो को पीटा गया…….बाबा को जबरदस्ती हरिद्वार ले जाया गया “…..

में नजर बचा के वहां निकल पड़ा….मुझे लग रहा था…..की सरकार के इस कृत्य में में भी शामिल हूँ….

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