blogid : 2387 postid : 243

हे कवि बजाओ ............

Posted On: 16 Aug, 2011 Others में

kavitaasato ma sadgamaya

anamika

139 Posts

702 Comments

हे कवी बजाओ मन वीणा
छेड़ो तुम जीवन के तान
शब्द शिखर पर आसीन हो तुम
छेड़ो तुम जन-जन का गान

गीत छेड़ो स्वतन्त्रता के
झूठ छल-कपट का हो अवसान
सत्य अहिंसा ईमान का
जग में करना है उत्थान

मौन रह गए गर तुम कविवर
छेड़ेगा कौन सत्य अभियान
कलम को हथियार बनाकर
करो जन-जन का आहवान

उठो -जागो लड़ो-मरो
करो देश के लिए बलिदान
कवि तुम चुप न रहो -कह दो
सत्य राह हो सबका ध्यान

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग