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नारी की आवाज - भारत मित्र मंच (मासिक विषय प्रतियोगिता)

Posted On: 4 Dec, 2013 Others में

राजनीतिनयी सोच नयी क्रांति

ANAND PRAVIN

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सुन्दर यौवन नर रोज निहारें, मन के अमर्ष वो क्या जाने!

स्वयं ही करते अशुद्ध मुझे, आरोप लगाते मनमाने!!

मैं चंद्रमुखी, मैं रूपवती, जब काम कोई वह बतलातें!

किन्तु क्षण जैसे ही बीते, अपने गुण फिर वह दिखलातें!!

वारि जैसा मेरा जीवन, कहीं बंधी, कहीं पर बहती हूँ!

ना जाने क्यों अपने घर ही, सहमी – सहमी सी रहती हूँ!!

आदर्श पुरुष मिल जाए यदि, तब हो मेरा सम्मान सही!

वरना इस पौरुष दुनिया में, जैसे अपना कोई काम नहीं!!

नर जिसे समझते डर अपना, डर ना यह तो मर्यादा है!

हो कुछ मर्यादा ना बदले, अपना जग से यह वादा है!!

युग बदल रहा, हम बदल रहें, है बदल रही अपनी राहें!

खुल कर अब पटल पे दिखती हैं, दबी हुई अपनी चाहें!!

उन्नयित सूर्य के आगे तम कहाँ कभी टिक पाया है!

प्रयास अनेकों हुए मगर अस्तित्व कहाँ मिट पाया है!!

मिटने वाली हम चीज नहीं, जननी हैं हम, आधार हमीं!

हम नहीं अगर शीतल रहते, तपने लगती बन अनल जमीं!!

तपने ना दें हम मिलजुल कर, नर हो चाहे वह नारी हो!

इस सृष्टि के हैं देन सभी, एक दूजे के आभारी हों!!

चले इस मिथ्या को अब त्यागे, नारी का जग में नाम नहीं!

साबित कर हमसब दिखला दें, इस प्रश्न को दे विराम यहीं!!

…………………………………………………………………………


आनंद प्रवीण

भारत मित्र

जय हिन्द……..जय भारत

आपभी इस विषय में अपने विचार प्रकट करने के लिए यहाँ क्लीक करें …….धन्यवाद

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