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नए भारतीय गोत्र का शासन चाहिए

Posted On: 15 Jul, 2014 Others में

vechar veethicaसम्भावनाओं से समाधान तक

anilkumar

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लोकसभा के चुनाव बाद बनने वाली नई सरकार के लिए श्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि यह आजादी के बाद पहली ऐसी सरकार होगी जो कांग्रेसी गोत्र की नहीं होगी | श्री नरेंद्र मोदी यदि इतिहास की और गहराई में जाते तो उनको कहना चाहिए था कि आजादी के बाद यह पहली ऐसी सरकार होगी जो ब्रिटिश गोत्र की नहीं होगी |
कांग्रेस ने ‘ Transfer of power ‘ के द्वारा ब्रिटिशर्स से शासन का अधिकार प्राप्त किया और उन्हीं के द्वारा निर्मित शासन के ढांचे पर उन्हीं के नियम और कानूनों के अनुसार शासन किया | आजादी के पश्चात के अधिकांश काल खंड में शासन करते करते कांग्रेस ब्रिटिश जींस की संवाहक बन गयी , अतः उसने अपने शासन में ब्रिटिश परम्पराओं और नीतियों का ही संरक्षण किया | इसी लिए ब्रिटिश शासन और कांग्रेस शासन के मध्य एक निरंतरता आज तक विद्यमान रही | आजादी के पश्चात देश का संविधान ब्रिटिशर्स द्वारा प्रस्तावित , ‘ Act of 1935 ‘ की आधार भूमि पर निर्मित किया गया , जब की कांग्रेस इसको पूर्व में अस्वीकार कर चुकी थी | ब्रिटिशर्स द्वारा लागू लार्ड मैकाले की शिक्षा प्रणाली , मात्र छोटे मोटे सुधारों के साथ आज तक संरक्षित है | अपने देश में अपनी संस्कृति और अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप किसी शिक्षा प्रणाली का विकास नहीं हुआ | देश की नौकरशाही आज भी ब्रिटिश मानसिकता से ग्रस्त है , जो परिणाम के स्थान पर नियमों को अधिक महत्व देती है | ऐसा इस लिए है , क्योंकि उनका शिक्षण , प्रशिक्षण आज भी ब्रिटिशर्स द्वारा निर्धारित प्रशिक्षण प्रणाली एवं नियमों और कानूनों के अंतर्गत ही होता है |
किसी देश की संप्रभुता उस देश के कानून के द्वारा सुनिश्चित होती है | मुगल काल में शासन के लिए उनके कानून थे | ब्रिटिशर्स ने शासन के लिए अपने कानून सी . पी . सी . और सीआर . पी . सी के रूप में लागू किये | परन्तु आज तक देश का शासन , देश की न्याय व्यवस्था उन्ही सी. पी. सी . और सीआर . पी . सी . के द्वारा संचालित हो रही है | हम अपने देश के लिए , अपने लोगों पर शासन के लिए , अपने कानून नहीं बना सके | ब्रिटेन में तो उस पैनल कोड में अब तक अनेक सुधार किये जा चुके हैं , पर अपने देश में अभी तक उन्हीं पैनल कोड से काम चलाया जा रहा है | लार्ड मेघनाथ देसाई का यह कथन उचित ही है कि ‘ भारत ब्रिटिश साम्राज्यवाद का संग्रहालय बन गया है | ‘
भारत में नई सरकार के अभिर्भाव पर विचार व्यक्त करते हुए ब्रिटिश समाचार पत्र गार्जियन लिखा था कि ‘ It is final departure of British ‘ | वस्तुतः ब्रिटिश समाचार पत्र का यह कथन ब्रिटिश शासन और कांग्रेस शासन के मध्य निरंतरता की ही पुष्टि करता है | इस के अतिरिक्त इस समाचार पत्र के वक्तव्य और चुनावोपरांत कांग्रेस नेताओं के वक्तव्यों में भी अद्भुत साम्य है | दोनों के ही वक्तव्य हताशा से परिपूर्ण हैं | जिस प्रकार ब्रिटिश समाचार पत्र ने चुनाव परिणाम आते ही , भारत से ब्रिटिश शासन के अंतिम प्रस्थान की घोषणा कर दी , उसी प्रकार कांग्रेस और कांग्रेसी जनों ने भी मान लिया की नई सरकार के सत्तारूढ़ होते ही , चुनाव पूर्व किये गए समस्त वादे तत्काल पूर्ण होने चाहिए | इस ही परिपेक्ष्य में नई सरकार बनते ही उसपर वादा खिलाफी , जनता से धोखाधड़ी , गद्दारी आदि अनेक आरोप लगाने के अभियान में संलग्न हो गयी | यह ठीक है की देश में एक नए गोत्र की सरकार की स्थापना हुई है | परन्तु इस नए गोत्र की सरकार की स्थापना होने में ६७ वर्ष लग गए हैं | इस लिए नए गोत्र के शासन की तत्काल अपेक्षा करना सरासर अन्याय है | नए गोत्र के शासन के विकसित होने में समय लगना अवश्यम्भावी है | तब ही आपेक्षित परिणामों की आशा की जा सकती है | इस लिए नए गोत्र की सरकार से देश को अपेक्षा है की वह नए भारतीय गोत्र के शासन की स्थापना जल्द से जल्द करे | देश को अब सुनिश्चित रूप से एक नए भारतीय गोत्र का शासन चाहिए , वह भी यथासम्भव जल्द से जल्द | तब ही इस नई सरकार के नए गोत्र की प्रमाणिकता सिद्ध होगी |
विपक्ष विशेषकर कांग्रेस और कांग्रेसी जनों को भी तनिक धैर्य रखना चाहिए | हताशा को त्याग अपने व्यवहार और वक्तव्यों में शालीनता , जिम्मेदारी और सकारात्मकता का समावेश करना चाहिए | उसको समझना चाहिए कि देश बदल रहा है , देश की सोच बदल रही है , देश की अपेक्षाएं और आकांक्षाएं बदल रही हैं , अतः उसे भी अब बदलना चाहिए | उसे भी अब एक नए गोत्र के विपक्ष के रूप में अवतरित होने का प्रयास करना चाहिए | लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है |
अधिक उचित होता यदि गार्जियन समाचार पत्र भी संतुलित टिप्पणी करते हुए कहता कि , ‘ It is the begining of final departure of British from India ‘ |

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