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नारी हूँ मैं…

Posted On: 16 Aug, 2015 Others में

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apurwa

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रात की खामोशियों में गुनगुनाती हूँ मैं। वक्त ने जो गम दिया , दिल को बहला कर खुद मरहम लगाती हूँ मैं। तिनका तिनका जोड़ कर घर बनाया , कहीं टूट ना जाये, ये सोचकर आंसुओ को पानी समझकर पी जाती हूँ मैं। सारी दुनिया का बोझ उठाकर न जाने किसका अहसान चुकाती हूँ मैं। मेरे आंसुओं की कोई कीमत नही , क्यूँ अरमानों का गला घोटकर , छोटी सी सफलता पर खुश हो जाती हूँ मैं!!!!

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