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मैं हिन्दू हूँ

Posted On: 7 Mar, 2016 Others में

बिखरे मोतीThis blog is for Hindi stories and topics of general interests

arungupta

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कुछ दिन पहले देश के एक जाने माने व्यक्ति ने यह कह कर कि उसे देश में अपने आपको हिन्दू कहने में डर लगता है सबको चौंका दियाI इस घटना के कुछ दिन पश्चात एक टीवी चैनल की समाचार पट्टिका में रह-रह कर आरएसएस के किसी संचालक का यह वक्तव्य (जो मुझे पता नहीं कितना ठीक था) दिखाया जा रहा था कि आजकल देश में किसी का अपने को हिन्दू कहना ठीक नहीं माना जाता हैI वैसे तो इस तरह के विचार लोग सोशल मीडिया साईट पर अकसर डालते रहते हैं लेकिन उनके विशिष्ट न होने के कारण अधिकतर उनके यें विचार लोगों का ध्यान आकृष्ट नहीं कर पाते हैI  इधर जब कुछ दिनों से इस तरह के वक्तव्य विभिन्न राजनीतिक एवं  सामाजिक दलों से सम्बंधित कुछ विशिष्ट व्यक्तियों ने देने शुरू किये तो जनसाधारण का ध्यान इस ओर जाना और साथ ही उनमें इस विषय पर चर्चा होना निश्चित ही थाI

कुछ लोगों का यह कथन कि “मुझे अपने आप को हिन्दू कहने में डर लगता है अपने आप में कुछ प्रश्न खड़े करता हैI

क्या देश के अधिकांश हिन्दुओं का ऐसा मानना है या केवल कुछ चुनिन्दा हिन्दुओं का जो कुछ राजनीतिक दलों से जुड़े होने के कारण ऐसे वक्तव्यों द्वारा भविष्य में अपनी पार्टी के लिए या पार्टी से अपने लिए कुछ विशेष हासिल करने की जुगत भिड़ा रहें हैं?

मेरे विचार में हिन्दू समाज का बड़ा तबका इन लोगों के विचार से सहमत नहीं है क्योंकि यदि ऐसा होता तो इन व्यक्तियों द्वारा समर्थित पार्टी को जिसके अधिकांश बड़े नेता ऐसे ही विचार रखते है पिछले आम चुनावों में हिन्दुओं का भारी बहुमत मिला होता लेकिन ऐसा नहीं हुआI  इसलिए इन चंद लोगों के विचार को हिन्दू जन मानस की सोच मान लेना उचित नहीं होगाI

दूसरी तरफ इस डर के चलते इन डरे हुए लोगों के अलावा कितने ओर हिन्दुओं ने अपने आपको हिन्दू कहना बंद कर दिया है? मेरे विचार में शायद ही आप किसी को ढूंढ पायेंI कितने लोगों ने जो सोशल मीडिया में हिन्दू धर्म की विशेषताओं को लेकर अकसर लेख लिखते है अब यह कह कर कि उन्हें इस विषय में लिखने में डर लगने लगा है लिखना बंद कर दिया है? ऐसे लेखकों की संख्या में कमी होने के बजाय  इधर बढ़ोतरी ही हुई हैI

फिर एक प्रश्न और उठता है कि हमें अपने को हिन्दू कहने में किससे डर लगता है?  यहाँ पर दो प्रश्न पैदा होते है; “क्या हमें अपने धर्म के मानने वालो से ही डर है?” या “क्या हमें अन्य धर्मावलम्बियों से डर है?”

यदि हमें डर अपने ही धर्म के लोगों से ही है तो यह स्थिति हिन्दू धर्म के लिए बहुत अच्छी नहीं हैI हिन्दू धर्म में बहुत सारे मत और संप्रदाय है जिनमें आपस में वैचारिक मतभेद सदियों से रहा है लेकिन इनके  मतावलंबियों ने कभी भी हिन्दू धर्म की मुख्य धारा या इसके मानने वालों को कभी भी तुच्छ दृष्टि से नहीं देखा और न ही इसके लिए ख़तरा बनेI  हिन्दू धर्म और बौद्ध धर्म में विभिन्नता होने के बाद भी दोनों धर्म इस देश में साथ-साथ आगे बढ़ेI ऐसे ही कुछ अन्य धर्म जो हिन्दू धर्म के मानने वालों ने ही प्रतिपादित किये, हिन्दू धर्म के लिए ख़तरा न बन कर हिन्दू धर्म के साथ इसके पूरक बन कर इस देश में उन्नत होते रहेI यदि इस सब के बाद भी हिन्दू धर्म में अन्दर से ही विरोध की आवाजे उठाने लगी है तो निश्चित ही यह एक सोच का विषय हैI हमें सोचना होगा कि ऐसे कौन से कारण है जिनके चलते आज हमारे हिन्दू समाज में अन्दर से ही बगावत की आवाज़ें उठने लगी हैंI यें लोग यह तो कहते है कि इन्हें अपने को हिन्दू कहने में डर लगता है लेकिन इन्हें किन कारणों से ऐसा लगता इस बात पर कोई चर्चा नहीं करतें हैंI हो सकता है कि इनके पास कोई कारण हो भी लेकिन शायद वे अपनी भीरूता की वजह से इन पर चर्चा करने कतराते होंI वैसे जब मैं अपने चारों ओर दृष्टिपात करता हूँ तो मुझे एक भी ऐसा हिन्दू नजर नहीं आता है जो अपने धर्म से कुछ बातों पर मतभेद होने के बावजूद भी नाराज हो कर इससे बगावत करने पर आमादा होI

अब प्रश्न केवल उन धर्मावलम्बियों से डरने का हो सकता है जिनका धर्म विदेशी मूल का हैI लेकिन यह डर कोई नया नहीं है बल्कि प्राचीन हैI इतिहास गवाह है कि विश्व में कोई भी धर्म अन्य धर्म के लिए हमेशा से खतरा रहा हैI जिस हिन्दू धर्म को अन्य धर्म वाले पिछले दो हजार वर्षों में अपनी कुचालों और अत्याचारों के बलबूते समाप्त करने में बिल्कुल असफल रहे अचानक ही यें सब हिन्दू धर्म के लिए इतना बड़ा खतरा कैसे बन गए कि हिन्दू धर्म के कुछ अनुयायी अपने को हिन्दू तक कहने में डरने लगे समझ से बिल्कुल परे हैI

जिन लोगों का यह  मानना है कि आजकल देश में किसी का अपने को हिन्दू कहना ठीक नहीं माना जाता उन्हें यह जरूर बताना होगा कि वें कौन लोग हैं जो इसे ठीक नहीं मानते है? क्या ऐसा ठीक न मानने वाले इतने शक्तिशाली है कि उनकी राय हम हिन्दुओं के लिए इतनी महत्वपूर्ण हो गयी कि हमें अपने को हिन्दू कहने में संकोच होने लगे या डर लगने लगेI वैसे यह एक सच है कि किसी ने भी आज तक मुझे अपने आपको हिन्दू कहने पर कोई एतराज नहीं किया है और जब भारत का संविधान भी मुझे अपने धर्म को मानने की पूर्ण स्वतंत्रता देता है तो मैं इन एतराज करने वालों की चिंता क्यों करूँI

मेरे विचार से हिन्दू धर्म के कुछ अनुयाइयों का अपने अस्तित्व को लेकर डर एकदम निर्मूल हैI हिन्दू धर्म को न तो किसी भीतरी घात का डर है और न ही किसी बाहरी I हिन्दू धर्म अपनी रक्षा करने में स्वयं सक्षम हैI यदि फिर भी कुछ लोग अपने आप को इस डर से मुक्त नहीं कर पा रहे हैं तो उन्हें अपने इस डर के कारणों और उन्हें ये डर किससे है स्पष्ट करना होगाI  वे केवल यह कहकर कि हमें तो अपने को हिन्दू कहने में डर लगता है धर्म के प्रति अपने कर्तव्य की इति श्री नहीं कर सकते I  ऐसा करके वें हिन्दू धर्म का कोई भला नहीं कर रहें हैI उन्हें खुलकर बताना होगा कि वें कौन लोग हैं जिनसे उन्हें भीतरी घात का या बाहरी घात का डर हैI  ऐसा  लगता है कि इन डरने वालों ने लोगों भ्रमित कर अपने किसी राजनीतिक या स्वयं के किसी स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए एक काल्पनिक डर को जन्म दे दिया हैI

वैसे एक बात मैं निश्चित तौर पर कह सकता हूँ कि मुझे किसी भी खुले मंच से यह कहने में कोई भी डर नहीं है कि मैं हिन्दू हूँ और मेरे जैसे और भी अनगिनत हिन्दू होंगे जिन्हें सबके सामने अपने आपको हिन्दू कहने में डर नहीं लगता होगा बल्कि गर्व होता होगाI

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