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यूपी में मुख्य राजनीतिक दल: एक अवलोकन (भाग-3)

Posted On: 29 Jun, 2016 Others में

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arungupta

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प्रदेश में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी हैI इस पार्टी ने पिछले संसदीय चुनावों में 72 सीटें जीत कर प्रदेश में अपनी मजबूत स्थिति का लोगों को अहसास कराया था लेकिन विधान सभाओं के चुनाव राज्य की समस्याओं पर लड़े जाते है और संसदीय चुनाव राष्ट्रीय मुद्दों पर इसलिए यह कह देना कि बीजेपी विधान सभा में भी अगले वर्ष  पिछले संसदीय चुनाव की तरह प्रदेश में जीत हासिल करेगी तर्क संगत नहीं होगाI

सपा और बसपा के विपरीत इस पार्टी के पास कोई भी ऐसा स्थानीय चेहरा नहीं है जिसके दम पर पार्टी अगले वर्ष होने वाले विधान सभा के चुनावों में जीत हासिल करने का दम भर सकेI पार्टी के पास जो कुछ चेहरे हैं भी तो शायद पार्टी को उन पर ज्यादा  भरोसा नहीं है जिसका एक मुख्य कारण शायद इन सब का  अपनी जबान पर नियंत्रण न होना और आम जनता से जुड़ाव की कमी हैI ये कब और कहाँ पर क्या बोलेंगे शायद पार्टी को भी नहीं पता होता है और बाद में पार्टी को इनके बयानों पर सफाई देनी पड़ती हैI शायद ऐसे ही कारणों से कुछ दिन पहले राजनाथ सिंह जो प्रदेश की राजनीति को लगभग छोड़ चुके थे को फिर  से उत्तर प्रदेश में पार्टी का चेहरा  बनाये जाने की अफवाहें काफी गर्म थीI सोशल मीडिया साईट पर कुछ अन्य चेहरों को लेकर भी अफवाहों का बाज़ार गर्म है जिस पर पार्टी की तरफ से अभी तक कोई सफाई जनता के  सामने  नहीं  दी गयी हैI यदि स्थानीय चेहरे को चुनाव  की कमान नहीं सौंपी गयी तो हो सकता है पार्टी को अंदरूनी कलह  का सामना करना पड़े जो पार्टी के लिए घातक सिद्ध होगाI

ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी की छवि में कोई ज्यादा सुधार हुआ हो ऐसा कुछ विदित नहीं हो पा रहा हैI पार्टी के दिग्गज नेताओं में मुख्य रूप से शहरों के निवासी ही है या इक्का दुक्का कोई ग्रामीण परिवेश का नेता है भी तो वो भी शहर ही तक सीमित हो कर रह गया हैI ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी को विस्तार देने के बारे पार्टी की रणनीति या इस बारे में सोच स्पष्ट नहीं हैI

यह पार्टी केवल एक हिन्दू पार्टी ही बनकर रह गयी हैI इस पार्टी की पूरी रणनीति वोटों के धर्म के नाम पर ध्रुवीकरण के इर्दगिर्द ही केन्द्रित रहती हैI पार्टी के छोटे स्तर ( पार्टी के पदानुसार ) के नेता ऐसे बयान देने से बिल्कुल परहेज नहीं करते है जिस के चलते समाज के कुछ धार्मिक समुदाय पार्टी से दूरी  बना लेते हैI पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को कभी भी ऐसे नेताओं पर लगाम कसते हुए नहीं देखा गया है जिससे आम जनता में यह स्पष्ट सन्देश जाता है कि इन नेताओं को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की शै रहती हैI ऐसा नहीं है कि ऐसे बयानों के चलते पार्टी को हमेशा नुकसान ही हुआ हो कई बार इस के चलते पार्टी को फायदा भी मिला हैI

जब पिछले संसदीय चुनावों में पार्टी ने विकास के मुद्दे को लेकर चुनाव लड़ा तो ऐसा लगने लगा था कि पार्टी अपनी हिन्दू पार्टी वाली छवि से छुटकारा पाना चाहती है लेकिन ऐसा ज्यादा दिन तक नहीं चलाI इसके दो मुख्य कारण हो सकते है पहला पार्टी को दिल्ली और बिहार के चुनावों में मिली भारी हार तथा दूसरा पार्टी को अपने विकास के मुद्दे पर स्वयं पर विश्वास की कमीI कारण  कुछ भी हो उत्तर प्रदेश में पार्टी की हाल की गतिविधियों से ऐसा आभास होने लगा है कि पार्टी प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले चुनावों में जहां-जहां संभव होगा वहां-वहां धार्मिक आधार पर वोटों के ध्रुवीकरण की रणनीति को ही अपनाएगीI

पार्टी की केंद्र सरकार आम जनता को अपनी विकास की योजनाओं पर बहुत अधिक विश्वास दिलाने में सफल  होती नज़र नहीं आ रही हैI इसका मुख्य कारण है कि जो योजनाएं सरकार द्वारा निर्धारित की गयी है उनका फायदा आम जनता विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों और शहरों की गरीब जनता को मिलता नज़र नहीं आ रहा है इस लिए इस वर्ग की जनता बीजेपी को राज्य में केंद्र सरकार के विकास के मुद्दे पर वोट करेगी इसमें संशय हैI यूँ तो बीजेपी की केंद्र सरकार अपने विकास के मुद्दे को लेकर जनता के बीच काफी आशा जगाने का प्रयास कर  रही है लेकिन कहीं न कहीं वह भी अपने इन मुद्दों को लेकर बहुत ज्यादा आशावान नज़र नहीं आ रही है, जिसका पता इस बात से ही चल जाता है कि अपने विकास के कार्यक्रमों को लेकर केंद्र सरकार को स्वयं ढोल बजाना पड़ रहा है जबकि होना इसका उलटा चाहिए थाI यदि दो  वर्षों में विकास आम जनता तक पहुंचा होता तो जनता ही उसका गुणगान करतीI दूसरी और विकास के कुछ ऐसे मुद्दे है जिनसे केवल देश का उच्च आय वर्ग या कुछ मध्यम आय वर्ग ही लाभान्वित होगा जैसे बुलेट ट्रेन, स्मार्ट सिटी  इत्यादिI आम जनता के लिए सबसे पहले रोटी कपड़ा मकान और बच्चों की पढ़ाई का है और यदि उसे इन मदों में कुछ रहत मिलती नज़र नहीं आएगी तो यह तय है कि वो विकास के इन मुद्दों के नाम पर बीजेपी को वोट देने में बिल्कुल उत्साह नहीं दिखाएगीI

बढ़ती महंगाई का मुद्दा भी पार्टी के लिए प्रदेश के चुनावों में एक बड़ा सर दर्द बन कर उभरेगा हैI यह एक ऐसा  मुद्दा है जिसका ठीकरा बीजेपी की केंद्र सरकार कांग्रेस की पूर्व सरकारों या अन्य दलों के राज्य सरकारों पर फोड़ कर अपनी जवाबदेही से नहीं बच सकतीI पिछले दिनों जिस तरह से खाने पीने के दामों  में बढ़ोतरी हुई है उसे देख कर लगता है कि समय रहते महंगाई पर नियंत्रण रखने के लिए केंद्र सरकार ने उचित कदम नहीं उठाए और यदि उठाएं भी है तो वे नाकाफी थेI

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