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बिंदी ऊँगली की

Posted On: 6 Feb, 2017 Others में

चंद लहरेंJust another Jagranjunction Blogs weblog

ashasahay

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हवा में गर्मी है,
बातचीत,
फुसफुसाहट,
हुँकार भी,।
खड़कती हुई आवाजें ,
ऊँचे-ऊँचे मंचों पर,
फूलों की सज्जा,
शक्तिशाली माइकऔर
संबोधन को उत्सुक,
कोई विरल चेहरा-
कोईप्रिय चेहरा-
कोई मनोरंजक चेहरा-
कोई विवादग्रस्त चेहरा भी,
और भीड़ भी ,
अथाह समुद्र कभी-कभी,
ऊपर उठते हुए हाथ,
हामी भरती हुई आवाजें
,यह सब है
प्राक्कथन है,
भूमिका है,
विषयवस्तु आनेवाला है,।
कुछ सच है कुछ झूठ भी,
वादें बहुत हैं,,
मनमोहक लुभावने,
कोई पीछे नहीं,
तत्परता भी ,
प्रतियोगिता भी।
गालियाँ भी,
उघड़ा हुआ अतीत भी,
हर किसी का,–

यह है सरगर्मी
चुनाव की ,
कल जनता की बारी है ,
ऊँगली में बिंदी लगानी है,
किसके नाम की—!

इस बार किसके हाथों,
बेचना है खुद को—
बैरहमी से पिटवाने की
किसे देनी है छूट—!
सोचना है जन-जन को-
हमें तुम्हें सबको,।
सोचना है ,
मकान मिलेगा क्या—?
सस्ते में,
सर छुपाने की जगह—
लज्जा बचाने की जगह—
पानी मिलेगा क्या—?
खेतों को-
घरों को–,
सूखते होठों को,
धोती मिलेगी क्या –?
हम मजदूरों को—
कम्बल मिलेंगें क्या-?
कड़कती ठंढ में,
हम गरीबों को—
सड़कें होंगी क्यl–?—
दूर गाँवों से
बाजार तक जाने को-
चूल्हा मिलेगा—?
जलावन –मिलेगा—?
रातें कटेंगी –?
दिन हँसेगा—?
सोचना है-,
सोचते ही रहना है–,
यह सोच कहीं ठहरेगी भी—?
अपने मुकाम तक –?

आशा सहाय

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