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जानिए विजय शेखर शर्मा ने कैसे की पेटीएम की शुरुआत

Posted On: 24 Dec, 2016 Others में

apneebatमन में आते अनवरत विचारों के प्रवाह जब शब्दों का रूप लेते है तो कलम चलती है (वर्तमान में कंप्यूटर के की-बोर्ड पर उँगलियाँ) बस इसी विचार प्रवाह का नाम है "अपनी बात"

Ashish Mishra

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पेटीएम की स्थापना करने वाले विजय शेखर शर्मा उत्तर प्रदेश के अलीगढ के रहने वाले हैं. उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से पढाई करने वाले विजय जब अपनी आगे की पढाई के लिए दिल्ली स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग में पहुंचे तो उन्हें बढ़ी दिक्कते आयीं क्योंकि विजय की अंग्रेजी काफी कमजोर थी. दोस्तों की मदद और अंग्रेजी के अखबार, मैगजीन, किताबें पढ़कर विजय ने अपनी अंग्रेजी सुधारी.
अंग्रेजी तो कुछ ठीक हुई पर बी.टेक में ख़राब आ रहे ग्रेड की वजह से विजय का आत्मविश्वास कमजोर पड़ने लगा. विजय का मन क्लास करने में नहीं लगता था और उन्होंने कॉलेज जाना भी कम कर दिया. विजय हॉटमेल के सबीर भाटिया और याहू की काफी सफलता से प्रभावित थे और कुछ ऐसा ही करने का सपना देखते थे.
एक साधारण इंसान से सफलता के शीर्ष पर पहुँचने का सफर विजय ने अपने खाली समय का उपयोग सॉफ्टवेयर कोडिंग सीखने में लगाया. विजय का बिज़नस सफ़र कॉलेज के दिनों में ही शुरू हुआ जब उन्होंने मित्रों के साथ मिलकर एक कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम indiasite.net बनाया जिसमे इन्वेस्टर्स ने पैसा लगाया था.
दो साल बाद विजय को अपना यह स्टार्टअप बेचना पड़ा, इसको बेचने से मिले 1 मिलियन डॉलर से विजय ने One97 Communications Ltd. नाम की मोबाइल वैल्यू एडेड सर्विस देने वाली कंपनी खोली. One97 Communications Ltd. मोबाइल के लिए तरह तरह के कंटेंट जैसे एग्जाम रिजल्ट्स, रिंगटोन्स, समाचार, क्रिकेट स्कोर, जोक्स प्रदान करती है.
अमेरिका की 9/11 त्रासदी का असर मार्केट पर इस कदर पड़ा कि रातोंरात कितने ही बिज़नस तबाह हुए और One97 Communications Ltd. भी इसका शिकार हुआ. Paytm की ग्राहक Hutch और Airtel जैसी बड़ी कम्पनियां समय पर भुगतान नहीं कर पा रही थीं. अपने स्टाफ, कर्मचारियों को सैलरी विजय ने दोस्तों, रिश्तेदारों से 24% की सालाना ब्याज दर पर पैसा लोन लेकर दिया.
विजय के पैसे खत्म हो चुके थे और उन्हें अपने निजी जीवन में भी कई सुविधाओं का त्याग करना पड़ा. विजय कार छोड़कर बस-ऑटो से सफर करने लगे पर सपना देखना नहीं छोड़ा क्योंकि जीतने का राज़ हिम्मत न हारना ही है. पैसे की तंगी बढ़ी तो विजय बतौर कंसलटेंट एक जगह नौकरी करने लगे.
कैसे शुरू हुई पेटीएम
लेकिन विजय का मन नौकरी में नहीं लग रहा था...आगे पढ़ें

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