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रिश्तों के आइने

Posted On: 17 Dec, 2012 Others में

apneebatमन में आते अनवरत विचारों के प्रवाह जब शब्दों का रूप लेते है तो कलम चलती है (वर्तमान में कंप्यूटर के की-बोर्ड पर उँगलियाँ) बस इसी विचार प्रवाह का नाम है "अपनी बात"

Ashish Mishra

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कभी जाने या अनजाने में,
कोई बात कह जाते।
रिश्तों के आइने हैं,
ये पल भर में दरक जाते।।

कोई समझे या ना समझे,
कोई माने य ना माने।
यही रिश्तों की फितरत है,
कि पल भर में बदल जाते।।
कुछ भी कैसे कहूं,
अब तो चुप ही रहूं।
बदलते वक्त के रिश्ते,
किसी की भी न सुन पाते।।
कि कोई रूठ जाता है,
तो कोई छूट जाता है।
समझ में कुछ नहीं आता,
कि जब रिश्ते बदल जाते।।
विरासत मंे हो पाये,
या हो खुद ही बनाये।
महल हैं ऐसे रिश्तों के,
जो ना गिर के संभल पाते।।
अगर रिश्ते निभा पाओ,
पास जा पास ला पाओ।
तो खुशबू रिश्तों में इतनी,
कि घर आंगन महक जाते।।

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