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जवाहर 'बाग' में खूनी राम 'वृक्ष'

Posted On: 3 Jun, 2016 Others में

सुप्रभात

Ashish Shukla

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mathura

मथुरा के जवाहरबाग से अतिक्रमणकारियों को हटाने के लिए की गई पुलिस कार्रवाई में दो पुलिसकर्मियों सहित 22 लोगों की मौत की खबर ने आज सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं. वहीँ इस हिंसा से सुर्खियों में आए इस रामवृक्ष यादव को सनकी न कहा जाये तो और क्या कहा जाये आखिर उसकी सनक ने दो पुलिस अधिकारियों समेत 24 से ज्यादा लोगों की हत्या करवा दी. रामवृक्ष गाजीपुर के मरदह का निवासी है और अपने इलाके में हमेशा हथियार बंद गुर्गों के साथ घूमता देखा जाता रहा है.

रामवृक्ष की मांगों में भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का चुनाव रद्द करना और वर्तमान भारतीय करेंसी को हटाना शामिल है. उनकी कुछ और मांगें तो और भी अजीब हैं. जरा देखिए.

  1. एक रुपए में 40 लीटर पेट्रोल मिले.
  2. एक रुपये में 60 लीटर डीज़ल मिले.
  3. वर्तमान मुद्रा बंद हो और इसकी जगह ‘आज़ाद हिंद फ़ौज करेंसी’ शुरू की जाए.
  4. संविधान से गठित मौजूदा गणराज्य को अवैध घोषित किया जाए.
  5. आज़ाद हिंद फ़ौज के क़ानून मानें जाएं.
  6. इसकी ही सरकार देश पर शासन करे.
  7. जय गुरुदेव का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया जाए.
  8. देश में अंग्रेजों के जमाने से चल रहे क़ानून खत्म किए जाएं.
  9. देश में सोने के सिक्के प्रचलन में लाए जाएं.
  10. इनकी मांग थी भष्ट्राचार पर काबू करने के लिए चांदी सोने के सिक्के चलाए जाएं.

लोकसभा और विधानसभा चुनाव भी लड़ चुका है रामवृक्ष
blogमरदह के रायपुर बाघपुर गांव निवासी मटिया बस्ती में रहने वाला रामवृक्ष यादव लगभग दो वर्ष पहले अपना घर छोड़कर मथुरा सत्याग्रह में भाग लेने पहुंच गया था. पत्नी और दोनों बेटे और दोनों बेटियां भी इसी के साथ मथुरा चली गई थीं. इसकी एक बेटी और एक बेटे की शादी हो चुकी है. जय गुरुदेव का चेला बनने के बाद इसने उन्हीं की दूरदर्शी पार्टी से लोकसभा और विधानसभा का चुनाव भी लड़ा था.

अक्खड़ स्वभाव के रामवृक्ष अन्य भक्तों की तरह पहले वह भी टाट पहनता था लेकिन अनुशासनहीनता और अन्य आरोपों के बाद बाबा जय गुरुदेव ने इसके टाट पहनने पर रोक लगा दी थी. उसके बाद से यह सफेद धोती कुर्ता पहनता था. गांव के लोगों के अनुसार रामवृक्ष काफी उग्र स्वभाव का था. इसके साथ हमेशा हथियारबंद कुछ गुर्गे भी रहते थे. कहीं जाता तो ये गुर्गे निजी सुरक्षा गार्ड की तरह इसके अगल-बगल ही रहते थे. फिलहाल गांव स्थित घर पर दो साल से ताला बंद है.

जवाहरबाग तकरीबन 270 एकड़ में फैला है. ये अतिक्रमणकारी सबसे पहले 2014 में इस पार्क में विरोध प्रदर्शन के लिए एकजुट हुए थे. मीडिया में आई खबरों के अनुसार तब इनकी संख्या महज 200 थी और इनमें से ज्यादातर लोग मध्य प्रदेश के सागर से आए थे. बाद में इन लोगों ने जवाहरबाग में ही टेंट लगा लिए और यहीं रहने लगे.

इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद जब पुलिस गुरुवार को मथुरा में जवाहर बाग से कब्जा हटाने गई तो इसका विरोध हुआ. गुरुवार रात तकरीबन 1000 पुलिसकर्मियों का दस्ता जवाहरबाग में पहुंचा था तभी अतिक्रमणकारियों ने पुलिस पर हमला कर दिया. पत्थरबाजी के साथ-साथ गोलियां भी चलीं और हैंडग्रेनेड भी फेंके गए. इस दौरान हिंसा भड़की और मथुरा के सिटी एसपी को मुकुल द्विवेदी और एसएचओ संतोष यादव को भी गोली लगी और उनकी मौत हो गई. इसमें दो पुलिस अफ़सरों समेत 24 लोग मारे गए. इस पूरी कार्रवाई के दौरान तकरीबन 400 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है. बाग से भारी मात्रा में गोला-बारूद और असलाह बरामद किया गया है. यह जवाहरबाग में सचमुच इतनी बड़ी घटना को रामवृक्ष अंजाम दे सकता है इस बात से लोग स्तब्ध हैं।

यह जवाहरबाग में सचमुच इतनी बड़ी घटना को रामवृक्ष अंजाम दे सकता है इस बात से लोग स्तब्ध हैं।

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