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विज्ञान को आस्था के करीब ले जाती "श्री शक्ति एक्सप्रेस"

Posted On: 14 Jul, 2014 Others में

सुप्रभात

Ashish Shukla

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04_07_2014-4katraभारतवर्ष महान् धार्मिक देश रहा है, यहाँ श्रद्धा, भक्ति का और विश्वास का अति- सीमा तक विकास हुआ । वर्षों से इन्सान विज्ञान और धर्म में मेल कराने की युक्ति ढूँढ रहा है। दोनों की अंतिम मंज़िल एक ही है। दोनों ही जीवन और ब्रह्मांड के अंतिम सत्य को जानना चाहते हैं। पारंपरिक रूप से माना यह जाता रहा है कि आस्था विज्ञान का विरोधी है।

आस्था और विज्ञान ने अलग-अलग तरीकों से समाज के विकास को रास्ता दिखाया है। जब-जब विज्ञान और धर्म ने मिलकर काम किया , तब-तब समाज विनाश के कार्यों से दूर हटा। ऐसे समय में समाज ने हर क्षेत्र में तरक्की की। उसी का जीता जगता साबूत है यह ऊधमपुर और कटरा के बीच 25 किलोमीटर की लंबी रेल लाइन । कटरा से उधमपुर जाने में 30 मिनट लगेंगे। इस दुर्गम लाइन पर 7 सुरंग ओर 30 छोटे-बड़े पुल हैं।

किसी वैज्ञानिक खोज में केवल विचार या अध्ययन की ही भूमिका महत्वपूर्ण नहीं होती , बल्कि उसखोज में आस्था और कल्पना का ज्ञान भी उतना ही महत्व होता है। आस्था और कल्पना के तत्व हमें धर्म से ही मिलते हैं। ऐसे में विचार और आस्था , दोनों ही एक-दूसरे के पूरक हैं। दोनों ही समाज के सच को समझने में एक औजार की तरह काम करते हैं। जो विज्ञानं को आस्था के मिलाप के लिए पहाड़ियों और घाटियों भरे इस दुर्गम रास्ते को आसान बना दिया है ।

अभी तक यह देखा गया है कि विज्ञान अपनी तार्किकता के चलते सामाजिक मूल्यों और मानवीय संबंधों को महत्व नहीं देता है और धार्मिक लोग विज्ञान को ही नकार देते हैं। इन्होंने वैज्ञानिक खोज से ज्यादा अपनी धार्मिक आस्था को महत्व दिया है। इस बात को देश के प्रधानमंत्री भी बखूबी जानते है तभी तो देश के करोड़ो भक्तों की आस्था को ध्यान में रखते हुए इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल सकी है जम्मू कश्मीर के त्रिकूट की पहाड़ियों में बनाए गए ‘माता वैष्णो देवी कटरा’ स्टेशन से पहली ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.

वैज्ञानिक भी इसी समाज की पैदाइश है। वह केवल विज्ञान के लिए काम नहीं कर सकता। उसे समाज निर्माण से भी जुड़ना होगा। धर्म समाज को संगठित करता है। ऐसे में विज्ञान समाज की उपेक्षा नहीं कर सकता। मां के दरबार के लिए स्टेशन पर ही पर्ची की व्यवस्था की गई है.इसके साथ ही एक ही टिकट पर यात्री रेल और बस की यात्रा कर सकेंगे.

तीर्थयात्री रेलगाड़ी से सीधे इस विख्यात तीर्थस्थल के आधार शिविर कटरा तक सीधे पहुंच सकेंगे। इसके साथ ही विज्ञान और धर्म के बीच का यह गठजोड़ को देखा जा सकता है।

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