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चुनाव सुधार के नाम पर

Posted On: 29 Feb, 2012 Others में

aarthik asmanta ke khilaf ek aawajLOKTANTR

ashokkumardubey

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अरविन्द केजरीवाल द्वारा वोट नहीं देने के सवाल को मिडिया एवं नेताओं ने खूब उछाला , इसमें संदेह नहीं जो लोग जन जागरण का काम कर रहे हैं उन्हें हर वक्त चौकन्ना रहने की जरुरत है और अपनी प्राथमिकताओं का भी ख्याल रखना जरुरी है लेकिन जो लोग जनता के काम से ज्यादा ब्यस्त है और अपना एक एक पल आज फैले हुए भ्रष्टाचार और कुशासन के विरोध में आवाज उठाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं उनसे ऐसी भूल हो जाना कोई ऐसी अनहोनी बात नहीं और जो लोग आलोचना कर रहे हैं वे अच्छी तरह जानते हैं की उनके साथ बैठनेवाले कितने ही लोग वोट नहीं डालते अगर सभी लोग वोट डालते तो आज अपने देश में जो कुछ हो रहा है वह नहीं होता क्यूंकि तब वही लोग चुनकर आते जो लोग जनता के लिए सोचते हों न की ऐसे लोग, जो देश का पैसा बहार के देशों में जमा करते हैं और रोज संसद , लोकतंत्र और संविधान की दुहाई तो देते है लेकिन लोकतंत्र का कैसे गला घोंट रहें हैं यह प्रत्यक्छ दिखाई दे रहा है, पूरे विश्व को न की केवल भारत को कुछेक विदेशी देशो ने अपने देश का पैसा वापस भी ले लिया पर अपना देश तो महान देश है यहाँ नेताओं की प्रथमिकता केवल चुनाव करना , चुनाव जीतना , सरकार बनाना और फिर लूटना इसके आलावा ये क्या कर रहे हैं ? आज अपना देश कितनी तरक्की किया होता इसका अंदाजा नहीं लगा सकते- विदेशी देश पर यहाँ तो देश के गद्दारों को इज्जत बक्शा जाता है और देश भक्तों को उनका हक़ नहीं मिलता . चुनाव आयोग ने कई बार इन चुनाओं के दौरान सत्ता पक्छ कांग्रेस के नेताओं को आचार संहिता का उल्लंघन करते पाया उनको चेतावनी भी दी पर बजाय अपनी गलती मानने के ये लोग चुनाव आयोग के अधिकारों को हीं कम करने का सोंचने लगे यह बात क्यूँ नहीं याद आती इन नेताओं को जो टीवी पर बयान दे रहें हैं केजरीवाल के खिलाफ आखिर मतदाता सूचि में नाम डालने का काम चुनाव आयोग के तहत काम करने वाले कर्मचारियों का ही तो है, कैसे ये मतदाता की ड्यूटी बता रहे हैं? ठीक है केजरीवाल एक पढ़े लिखे समझदार ब्यक्ति हैं उनको तो ऐसा कहा जा सकता है पर उनका क्या होगा जो मतदाता सूचि क्या होती है पता ही नहीं देश के कितने प्रतिशत अभी भी मतदान और मतदाता सूचि के बारे में कुछ नहीं जानते हाँ इस बार जरुर वोटिंग का प्रतिशत बढ़ा है पर यह सब अन्ना हजारे द्वारा धरना प्रदर्शन के दौरान जनता की भारी भागीदारी के कारन हुवा है न की सरकारी कार्यकर्मो द्वारा हुवा है अतः चुनाव सुधार को ज्यादा अहमियत दे ये नेता न की एक छोटे मुद्दे को लेकर जनसंघर्ष कर रहे है निस्स्वार्थ सेवको को ही गलत समझाने में लग जाएँ

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