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हार पर विचार (कांग्रेस )

Posted On: 6 Apr, 2012 Others में

aarthik asmanta ke khilaf ek aawajLOKTANTR

ashokkumardubey

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इन दिनों कांग्रेस के युवराज और भावी पीएम, कांग्रेस क्यूँ हारी ? इस मुद्दे पर विचार कर रहें हैं और संगठन में बदलाव की सोंच रहे हैं और हार का ठीकरा कुछ पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं पर फोड़ने की कवायद में लगे हैं क्या उन्हें लगता है ऐसा करने से उनका संगठन और उनकी पार्टी मजबूत हो जाएगी? और आने वाले लोकसभा चुनाव में उनका प्रदर्शन और जीतने वाले एमपी की संख्या में बढ़ोतरी हो जाएगी ?. ऐसा लगता है अभी तक वे देश और देश की जनता को ठीक से समझ नहीं पाए और उनके सलाहकार जो लोग चुनाव प्रचार के दौरान तरह तरह की गलतबयानी की थी , हार का मूल कारन ही यही है और ऐसा प्रतीत होता है कुछ पुराने कांग्रेसी जो अपनी जगह पार्टी में अब तक बना नहीं पाए उन्होंने ही कांग्रेस का बेडा गर्क किया है और आगे भी करते रहेंगे और राहुल गाँधी को उनकी पहचान करनी होगी और उनको पार्टी से बहार का रास्ता दिखाना होगा असल में उनके सलाहकार ही उनका हित नहीं चाहते और उनमे सबसे बड़ा नाम दिग्विजय सिंह है माफ़ करेंगे यह मेरे स्वतन्त्र विचार हैं इसे अन्यथा न लिया जाये . मेरे विचार से अगर कांग्रेस अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है तो उन्हें सबसे पहले अपने चुनाव मेनिफेस्टो को आधार मानकर जनता के बीच जाना चाहिए और उनको आशान्वित करना चाहिए की भले उनकी पार्टी जीत न सकी लेकिन अभी भी वे जनता को किया वायदों को पूरा करने का प्रयास जारी रखेगी और वर्तमान सरकार से लड़कर उनको पूरा करवाएगी साथ हीं अभी सत्ता में जो समाजवादी पार्टी जीतकर आई है उनके नेताओं और मंत्रियों को भी अपने विश्वास में लेकर उनके द्वारा चुनाव दौरान जो वादे किये गए हैं उसकी तरफ उनका ध्यान आकर्षीत कराएगी और उन कार्यों को पूरा करने के लिए उनको भी बाध्य करेगी . मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूँ क्यूंकि पिछला चुनाव यह सन्देश लेकर आया है की जो नेता या पार्टी जनता से जुड़ेगा और उनके सुख दुःख के लिए काम करेगा उनकी समस्यायों को समझेगा और उसको दूर करने का उपाय करेगा वही पार्टी या नेता अगला चुनाव जीतेगा न की एक दूसरी पार्टी कि गलतियाँ निकालता फिरेगा और जनता को यूँ ही समझाता फिरेगा, आपने दूसरी पार्टियों को बीस साल का मौका दिया है एक मौका हमें देकर देखो हम क्या नहीं कर सकते? भला कांग्रेस से कोई पूछे केंद्र में तो उसीकी सरकार है और उनकी पार्टी ने अभी तक काले धन , भ्रष्टाचार अपराध , घोटाला इन सब मुद्दों पर क्या किया ? अतः यह चुनाव तो कांग्रेस ने हारना ही था क्यूंकि केंद्र पर काबिज उनकी सरकार एक कमजोर पीएम के शासन के अधीन ह़र मुकाम पर फेल होती दिखाई दे रही है और भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है केवल यह कह देने से की बीजेपी क्या भ्रष्ट नहीं इससे उनका अपना भ्रस्ताचार छिप नहीं सकता आज इसी पर कांग्रेस को मंथन की जरुरत है . कितनो को पार्टी से निकालेंगे ? इन्हें चुनाव टिकट देने का नजरिया एवं तरीका बदलना पड़ेगा अब जनता मूरख नहीं रही और साथ ही अन्ना हजारे जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं की इज्जत करना जरुरी है जो देशहित और जनहित की बाते करते हैं उनको पूरा करने के लिए एक कदम आगे रखना जरुरी है न की उनको बदनाम करना उनकी ही टांग खिचाई करना उनको जेल में डालना कभी यह तो सोंचे आज नेता क्यूँ इतना बदनाम हो गए? क्यूँ जनता आज उनपर तरह तरह के ताने देती है उन्हें भ्रष्ट कहती है वे अपनी छबि को साफ बनाने की दिशा में क्या कर रहें हैं? इसपर भी विचार होना चाहिए तभी सत्ता में बने रहने का हक़ किसी पार्टी या नेता को है और तभी कांग्रेस भी एक मजबूत राष्ट्रिय पार्टी का दर्जा जो आज खो चुकी है फिर से पा सकेगी और जनता को भी उनमे विश्वास जागेगा वर्ना ये आज तो कह रहे है हम जनता द्वारा चुनकर आये हैं और हम पांच साल तक जनता को ही मूरख बनाते रहेंगे संसद में हंगामा कर कोई काम नहीं होने देंगे और न कोई सुझाव देंगे की ये हंगामे क्यूँ कर रुकेंगे .
अब समय आ गया है राष्ट्रिय पार्टियाँ चेत जाएँ वर्ना आने वाले कल में छेत्रिय पार्टियाँ राष्ट्रिय पार्टियों का स्थान ले लेंगी और मिल जुलकर सरकार चलाएंगी और शायद इसकी पहल हो भी रही है .क्नाग्रेस इस सच को जानने से बाकि नहीं .

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