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माँ क़ी ब्यथा !!

Posted On: 24 Jul, 2012 Others में

मंजिल की ओरमैं और मेरा देश

Ashutosh Ambar

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अपनी जननी को तुम पल में
विसरा क्यों देतो हो ?
जिसकी पावन छाँव में पलकर
तुम जीवन सुख लेते हो

जिसकी कोमल अँगुलियों को
पकड़ -पकड़ चलना सिखा
जिसने तेरी किस्मत
अपने हांथों से है खुद लिखा

उस माँ के आँखों में इतना
आंसू क्यों दे जाते हो ?
फूलों सी उस ममतामयी पर
शब्दों के बाण चलते हो

वह जिसके आँचल ने तुझको
इतना सारा प्यार दिया
जिसने स्वयं बिन खाए रहकर
तुझे खिलाकर बड़ा किया

करुणामयी उस माँ के हिय पे
आघात क्यों पहुंचाते हो ?
अपनी ही माँ को रुला-रुला के
सच बोलो क्या पाते हो ?

जिस प्रसू क़ी गोंद ने
तुझको है आकार दिया
कोटि- कोटि मन्नतों से जिसने
स्वप्न तेरा साकार किया

देवी सी उस धात्री के चरणों में
शीश नहीं नवाते हो
मंदिर – मंदिर भटक रहे हो
पर माँ को कहाँ पाते हो ??

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