blogid : 1151 postid : 281

आओ बच्चों तुम्हें दिखाएँ (भाग १)

Posted On: 18 Oct, 2010 Others में

मनोज कुमार सिँह 'मयंक'राष्ट्र, धर्म, संस्कृति पर कोई समझौता स्वीकार नही है। भारत माँ के विद्रोही को जीने का अधिकार नही है॥

atharvavedamanoj

76 Posts

1140 Comments

आओ बच्चों तुम्हें दिखाएँ, झांकी हिंदुस्तान की |
इस मिटटी का क्या करना है,तुम्ही बताओ लाल जी||
वन्देमातरम,वन्देमातरम ||
जयचंदों की टोली अंग्रेजो ने पहले जान लिया|
बेईमानों का देश कार्नवालिस ने था पहचान लिया|
मैकाले ने वेदों की वाणी को कैसा मान दिया|
यह गड़ेरियों का गाना है सचमुच सुंदर नाम दिया|
और आज इनके चमचे पूजा करते शैतान की||
इस मिटटी का क्या करना है,तुम्ही बताओ लाल जी||
वन्देमातरम,वन्देमातरम ||
कैसा सुन्दर देश हमारे पुरखे गाली पाते हैं |
जो मिटटी पर मरते हैं सारे गरियाये जाते हैं |
भाषण देने वाले सब भंडुये नेता बन जाते हैं |
संसद में जाकर सियार सा हुआ-हुआ चिल्लाते हैं|
रहते हैं हिन्दोस्तान में बातें पाकिस्तान की ||
इस मिटटी का क्या करना है,तुम्ही बताओ लाल जी||
वन्देमातरम,वन्देमातरम ||
यहाँ लुटेरा है राणा , अकबर हरि का अवतार है|
शिवा पहाड़ी चूहा, जिन्दा पीर से सबको प्यार है |
सिमी सारथि राजनीती का, सीमा का व्यापार है |
उधर तेज है धार , इधर जिह्वा बैठी लाचार है |
कातिल ही करते हैं बातें दया, धर्म और प्यार की |
इस मिटटी का क्या करना है,तुम्ही बताओ लाल जी||
वन्देमातरम,वन्देमातरम ||
सूप सूप चुप ही रहती है,चलनी छन छन बोल रही |
देखो तो कैसी कैसी बातें यह सम्मुख खोल रही |
चिकनी चुपड़ी बातें कह कर धर्म-इमां को तोल रही|
गंगाजल में शीशा, पारा, कूड़ा, कचरा घोल रही |
हम यदि गेंहूँ की कहते हैं तो वे कहते धान की|
इस मिटटी का क्या करना है,तुम्ही बताओ लाल जी||
वन्देमातरम,वन्देमातरम ||
अन्न नहीं कंडोम बिकेगा खुलेआम बाजारों में |
बकरी की मिमियाहट होगी पौरुष के हुंकारों में |
कर्णधार को सेक्स मिलेगा अब कवि के उद्गारों में |
और निराशा का दर्शन अब होगा गीता-सारों में |
उनकी खिचड़ी पका करेगी, नहीं गलेगी दाल जी |
इस मिटटी का क्या करना है,तुम्ही बताओ लाल जी||
वन्देमातरम,वन्देमातरम ||
न दैन्यम न पलायनम
क्रमशः
monkey

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 4.67 out of 5)
Loading...

  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग