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टर्र-टर्र बरसाती मेँढक

Posted On: 6 Oct, 2010 Others में

मनोज कुमार सिँह 'मयंक'राष्ट्र, धर्म, संस्कृति पर कोई समझौता स्वीकार नही है। भारत माँ के विद्रोही को जीने का अधिकार नही है॥

atharvavedamanoj

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टर्र-टर्र बरसाती मेँढक।
फुर्र-फुर्र उड़ गयी है चिड़ियाँ।
बर्र-बर्र तुम क्योँ करते हो?
यार मेरे बर्रै की माफिक।

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