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तुम हरामी नहीँ हो

Posted On: 23 Mar, 2011 Others में

मनोज कुमार सिँह 'मयंक'राष्ट्र, धर्म, संस्कृति पर कोई समझौता स्वीकार नही है। भारत माँ के विद्रोही को जीने का अधिकार नही है॥

atharvavedamanoj

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माफ करना,
तुम हरामी नहीँ हो
और हरामजादा भी नहीँ।
लेकिन,
जो कुछ भी तुम हो –
उसके लिए –
यह दोनोँ शब्द –
हरामी और हरामजादा –
बहुत छोटे हैँ।
क्योँकि –
हरामी और हरामजादे –
अपनी वल्दियत नहीँ जानते,
और तुमने,
अपनी माँ को –
योरप, अमेरिका, चीन और अरब की गलियोँ मेँ,
नीलाम कर दिया।

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