blogid : 1151 postid : 635949

तो कुछ और बात ही होती

Posted On: 28 Oct, 2013 Others में

मनोज कुमार सिँह 'मयंक'राष्ट्र, धर्म, संस्कृति पर कोई समझौता स्वीकार नही है। भारत माँ के विद्रोही को जीने का अधिकार नही है॥

atharvavedamanoj

76 Posts

1140 Comments

यदि इंसा मानव बन जाते,

तो कुछ और बात ही होती|

धरा विहंसती नरता पाकर|

ऋत, शिवता, सुंदरता पाकर|

इधर हलाहल शिव की ग्रीवा,

उधर विहंसते नटवर नागर||

मुदित और प्रमुदित अवनी पर,

टिमटिम जलती, जगमग ज्योति||

यदि इंसा मानव बन जाते,

तो कुछ और बात ही होती|

जिसमे अभयदान था प्रभु का|

कनकमयी लंका को फूंका|

नर के मन की प्रबल तरंगें,

भाव सिंधु वह कैसे सूखा?

कहाँ गया वह? कैसे खोजूं?

मेरा सीपी, मेरी मोती||

यदि इंसा मानव बन जाते,

तो कुछ और बात ही होती||


Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...

  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग