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नंगापन

Posted On: 17 Nov, 2010 Others में

मनोज कुमार सिँह 'मयंक'राष्ट्र, धर्म, संस्कृति पर कोई समझौता स्वीकार नही है। भारत माँ के विद्रोही को जीने का अधिकार नही है॥

atharvavedamanoj

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एक पुरानी कविता
झटका सा लगा मुझे-
जब सुना-
चवन्नियाँ बहिष्कृत हो गयी-
सिक्कों के समाज से|
जैसे-
चवन्नियों के साथ,
लुट सा गया –
मेरा वजूद |
करोड़पति बनने का स्वप्न –
चकनाचूर|
झडने लगा –
शीशे के मकान का पॉलिश,
जिसमे –
दशकों की चवन्नियां चिपका कर –
मैं –
अपने घर का –
नंगापन –
ढकने की –
कोशिश –
में लगा था |

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