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हाँ,मस्जिद से मंदिर को छूत लग जायेगी

Posted On: 3 Oct, 2010 Others में

मनोज कुमार सिँह 'मयंक'राष्ट्र, धर्म, संस्कृति पर कोई समझौता स्वीकार नही है। भारत माँ के विद्रोही को जीने का अधिकार नही है॥

atharvavedamanoj

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मैँ नहीँ चाहता कि मेरी लेखनी हमेशा आग ही उगलती रहे,मिटा दिये गये ब्लाग से लगायत ‘मार्क्स और मार्केट’ तक मैँ अपने आपको उत्तरोत्तर संयत ही करता जा रहा था,लेकिन दुराग्रहियोँ के मध्यकालिक निर्लज्ज आचरण ने मुझे एक बार फिर से तीखे तेवर अपनाने पर विवश कर दिया है।शांतिस्वरुपा माँ सरस्वती एक बार फिर से रणचण्डिका का रुप धारने को विवश हो गयी हैँ और अब मुझे यह प्रतीत होता जा रहा है कि रामचन्द्र के आदर्शोँ की शिक्षा देने मात्र से राक्षस-बुद्धि कभी सुधारी नहीँ जा सकती और उसका ईलाज रामचन्द्र जी के विष बुझे बाण ही कर सकते हैँ।अभी कुछ ही दिन पहले मेरे ही शीर्षक का विपरीतासन मिला।कुतर्कोँ की हद हो गयी है,कहता है-क्या मस्जिद से मंदिर को छूत लग जाएगी?मैँ कहता हूँ क्या चंगेज और तैमूर के खानदान के कीड़े, डकैतों के नेता, बाबर ने छूआछूत का इलाज करने के लिये मंदिर को ढहा कर मस्जिद तामीर किया था?
राम,राम हैँ और अल्ला,अल्ला है और दोनोँ अलग हैँ फिर भी आपस मेँ सहिष्णुता बनी रह सकती है लेकिन ये असामाजिक,राष्ट्रघाती,मार्क्स और माओ के चेले रामल्ला अथवा रमखुदैया नामक नया पंथ स्थापित कर खुद को पैगम्बर साबित करना चाहते हैँ,जिसे कायर और नपुसंक हिन्दुओँ का एक वर्ग भले ही स्वीकार कर ले,धर्मान्ध मुसलमान कतई स्वीकार नहीँ करेगा और क्या मस्जिद तामीर करने के लिये रामलला की जमीन ही मिली है?हिन्दुस्थान मेँ आतंकियोँ की शरण-स्थली बनते जा रहे लाखोँ मस्जिद,मदरसे और मकतब कम पड़ गये है?
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के उत्खनन से प्राप्त पुरातात्विक अवशेषों ने चीख-चीख कर जिस जमीन को रामलला की मिलकियत स्वीकार की है,उसे झुठला नहीं पाए तो बेहयाई पर उतर आयें|एक बंधू ने तो अपने अन्दर ही श्रीरामजन्मभूमि होने की पुष्टि कर दी,मुझे तो भय है की कहीं उच्च सत्ता के न्यायालय में उनकी छाती का ही उत्खनन न होने लगे|अरे,पुरातात्विक अवशेषों को तो छोड़ दीजिये अगर रामजी भी अपनी गवाही देने के लिए उतर आयें तो ये इन्हें भी झुठला दें,राम ने अपने पिता को वृद्धश्रम नहीं भेजा,राज्य के लिए भरत के विरूद्ध शस्त्र नहीं उठाया,शबरी के जूते बेर खाने में नहीं हिचकिचाएं और सिन्धु जैसे जड़ की पूजा करने में भी उन्हें कोई आपत्ति नहीं हुई|राम जैसा होने के लिए वनवास भोगना पड़ता है,कार्यालय में बैठ कर कम्प्यूटर की कुंजियाँ हिलाने से कोई राम नहीं बन जाता|
”जाके प्रिय न राम वैदेही,तजिए ताहि कोटि वैरी सम जदपि परम सनेही” मैं नहीं जानता की आपसे पहले किसी ने कभी ”रामलला हम आयेंगें,मंदिर वहीँ बनायेंगे” जैसा कोई नारा लगाया था अथवा नहीं,और न मैं यह जानना ही चाहता हूँ,लेकिन अब मंदिर निर्माण में क्षण मात्र की भी देरी नहीं होनी चाहिए|काठ की हांडी बार बार नहीं चढ़ती लेकिन काठ के उल्लू हर जगह मिल जाते हैं|
जिस साल संघ परिवार ने राष्ट्रिय शर्म के प्रतीक बर्बर बाबरी ढांचे को ढहा दिया था ”उसके अगले ही साल यूपी में बीजेपी का डब्बा गोल हो गया था” तो आप उसे लम्बा करने का प्रयास न करें|रामजी ने चाहा तो आप जैसे लोग ही गोल हो जायेंगे|
ब्लॉगर महोदय का कहना है ”ऐसा लग रहा है कि इन नेताओं को रामलला की जमीन पर हक़ मिलने की जितनी खुशी है,उससे ज्यादा दुःख इस बात का है कि पड़ोस कि जमीन मुसलमानों को क्यों दे दी गयी,मुझे इस मामले में अपने चाचा याद आते है” क्यों निर्णय सुनते वक्त नानी नहीं याद आई और दुःख क्यों नहीं होगा,तुम्हारे लिए वह सिर्फ जमीन का एक टुकड़ा होगा,हमारे लिए वह रामलला कि जन्मभूमि है|वैसे भी,मुसलमानों को भारत माता कि हत्या करके गाँधी के नुमाइन्दों द्वारा पहले ही अरबों मस्जिदे बनाने लायक दो-दो देश दिए जा चुका है और रही हरिजनों कि बात तो आप हमें कुत्सित मानसिकता वाले दुरूह गांधीवादी प्रतीत होते हैं शायद आपने बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर जी को नहीं पढ़ा है कि अगर समाज का एक विशेष वर्ग हरिजन है तो क्या शेष सभी दैत्य वंश से सम्बंधित हैं? बरगलाने वाली बातें छोडिये और सार्थक संवाद स्थापित करने कि चेष्टा कीजिये|राम कसम बहुत आनंद आएगा|
जमीन का टुकड़ा रामलला की संपत्ति है,किसी ऐरे गैरे नत्थू खैरे की जागीर नहीं,जो राम जी को नौकर बना कर कमाई की जाए|कहते हैं की सबूत कोई भी नहीं जूता पाया,अब तो यह स्पष्ट ही हो गया की आप अंधे हैं|
मौलाना मुलायम का कहना है कि फैसले से मुसलमान आहत हुए हैं और मैं कहता हूँ कि कि रोज सुबह जय रामजी कि कहने वाला यादव आपके इस बयान से मृत हो गया है|कहीं आप नकली यादव तो नहीं?अपने मानसिक दिवालियेपन का इलाज करवाईये,आप जैसे लोगों को hallucination होने लगा है कहीं ज्यादा बढ़ गया तो schizophrenic हो जायेंगें|
धर्म के बगल में अधर्म कि प्रतिष्ठा कैसे हो सकती है?क्या निर्गुण,निराकार और सगुण,साकार कि उपासना करने वाला हिन्दू ,कब्रिस्तान को पूज कर,रामलला का दर्शन करने जाएगा?हमारे धर्म में स्थान स्थान पर कहा गया है कि आँख मूंदना अधर्म है और लोग आँख मुंदने को ही धर्म बता रहे हैं|हमारे धर्म में कहा गया है कि आपत्ति का वीरतापूर्वक मुकाबला करो और लोग कायरता को ही धर्म बता रहे हैं|कृष्ण ने बांसुरी भी बजाई और चक्र भी चलाया,उन्होंने अपने आचरण से धर्म का उपदेश दिया|आज चौराहे पर बांसुरी बज रही है और बेडरूम में चक्र चल रहा है|
बहुत दिनों से ब्लॉग लिखते लिखते उकता गया हूँ,लोगों के कान पर जून भी नहीं रेंगती|हिंदुत्व को हिजद्त्व बना दिया गया है|शायद ये दुराग्रही ब्लॉगर वास्तव में हिन्दुओं को उकसाना चाहते हैं लेकिन इन्हें पता नहीं हैं कि सहिष्णु जब उठता है तो कितना भयानक होता है? मुट्ठी भर पांडवों ने दुर्योधन की पूरी प्रजाति ही नष्ट कर दी|हमने सिर्फ अयोध्या,मथुरा और काशी मांगी है और अगर हमारी मांग पूरी नहीं होती है तो हम हिन्दुस्थान को हिन्दू होमलैंड बनाने की मांग करते हैं|
वैसे भी,पूरी दुनिया में विचारधारा के सिर्फ दो वर्ग हैं|पहला धुर दक्षिणपंथी और दूसरा धुर वामपंथी,बीच वाले आंधी-गांधीवादियों का न तो कोई चेहरा है और न कोई चरित्र,और अब ब्लॉगर महोदय का ब्लॉग पढ़ लेने के बाद,विचारधारा का चरमपंथ ही एकमात्र पाथेय है|

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