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आक-छू.....कि दे...दना...दन

Posted On: 26 Sep, 2010 Others में

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malik saima

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मुल्ला नसीरुद्दीन एक छोटे से कसबे के समीप एक गाँव में गए थे,अगले दिन बापसी के लिए उस कसबे के रेलवे स्टेशन से एकमात्र चलने वाली ट्रेन सुबह ६:०० बजे थी,सो मुल्ला को सुबह जल्दी ही उठाना था…………पर अनहोनी तो मुल्ला के साथ होकर रहनी थी………..मुल्ला ने रात को जो आँख बंद की,तो वो खुली सुबह ५:४० पर,और रेलवे स्टेशन का रास्ता कम-से-कम ३० मिनट की पैदल चलने की दुरी पर था………..मुल्ला तो हडबडा गए,जब आँख खुली और घडी देखी,मुल्ला के तो हौंसले ही पस्त हो गए………….पर फिर सोचा,अगर आज घर नहीं पहुंचे…..तो गुलबन तो जान ही ले लेगी,…घर में घुसने भी दे…..या नहीं …..ये भी पक्का नहीं,…………………..सो मुल्ला ने ,दो चुल्लू पानी मुंह पर चुपड़ा,सर पर बाल तो थे नहीं,जो कंघी करते…………सो लपक लिए,ट्रेन पकड़ने के लिए……सरपट दौड़ रहे थे,सोच रहे थे,हे भगबान बस आज ट्रेन मिल जाए…..काजू पिस्ता बर्फी का प्रसाद चड़ाउंगा,और पिछली बार का जो अभी तक नहीं चड़ाया है,वो भी गारंटी के साथ चड़ादूंगा,पर ट्रेन छूटनी नहीं चाहिए आज,…….पर आधी रास्ता में मुल्ला को एक लड़का कुत्ता टहलाता दिखाई दिया,सो मुल्ला ने सोचा,…..ये तो यहीं का रहना वाला लगता है,…………सो पूंछ लूँ,शायद कोई शोर्टकट बता दे,जल्दी पहुँचने का…..बैसे भी पता नहीं क्यों,मुल्ला की जब-जब फजीहत हुई,टाइम की किल्लत से ही हुई है. सो मुल्ला ने लड़के को रोक कर पूछा,भाई कोई ऐसा शोर्टकट नुस्खा बता जो मै १० मिनट में रेलवे स्टेशन पहुँच जाऊं,वर्ना इस रास्ते से तो मेरी ट्रेन छूट जाना निश्चित है,…….सोच मत बस जल्दी से बता दे,कोई कारगर उपाय,अगर जानता है तो. लड़का बोला,ये कौन सी मुश्किल है,अभी लो……….और लड़के ने,जो अपने कुत्ते को मुल्ला की इशारा करके कहा…….आक छू………आक छू…….और जो कुत्ता मुल्ला की तरफ दौड़ा…………..मुल्ला ने जो सर पर पाँव रख भाग लगाई…….मुल्ला आगे-आगे कुत्ता पीछे-पीछे …….मुल्ला को ऐसा लग रहा था,कि मानो अब काठा….कि अब काठा…….आज तो ये कुत्ता पक्का काठ कर रहेगा………और पिछली बार ही तो १४-१४ इंजेक्शन मुल्ला अपने पेट में घुस्बा का पिछले हफ्ते ही तो फारिग हुए हैं…..अब लग रहा है फिर…..ये तो हद हो गयी…….बड़ा ही नालायक और शैतान लड़का निकला….अगर पीछे कुत्ता न भाग रहा होता ……तो उस लड़के को भी ऐसी सजा देता…..कि छटी का दूध याद आ जाता…..फिर पता चलता साले को कि मुल्ला क्या चीज़ है……पर अभी तो जान बचान भारी है…………ऐसा लग रहा है,मानो कुत्ते में और मुल्ला में दौड़ का मुकाबला चल रहा है,कोई हारने को तैयार नहीं…..इस मैराथन में कभी मुल्ला आगे निकल जाते,तो कभी कुत्ता मुल्ला से आगे निकल जाता,घबराहट में मुल्ला तो ये भी भूल गए…..कि वो कुत्ते का पीछा कर रहे हैं,या कुत्ता उनका पीछा कर रहा है……पर कम्पटीशन के इस दौर में इतना होश किसे है,कि कौन किसके पीछे भाग रहा है…..बस भागम भाग चल रही है………मुल्ला ने सोचा,कि ये सोच क्यूँ अपना भेजा खराब करूँ,कि कौन किसके पीछे भाग रहा है,….पर मुल्ला को इतना तो पक्का था,कि भागना ज़रूरी है………..और हर भाग में वोही जीतता है,जो सबसे तेज दौड़ता है,….आगे दौड़े या पीछे…पर तेज़ दौड़ने में मुकाबला जीता जा सकता है…..सो मुल्ला दौड़ रहे थे…….और सरपट दौड़ रहे थे……..कभी-कभी कुत्ता पीछे से मुल्ला के इतने करीब आ जाता…..कि पीछे से मुल्ला का उड़ता कुरता पकड़ लेता…..पर मुल्ला भी कोई थूक-का-लड्डू थोड़े है,जो हाथ आजाता…..इधर कुत्ते ने दामन पकड़ा……उधर मुल्ला ने अपनी स्पीड को एक्सीलेटर दिया…..जूं..जूं…..जूं…..जूं……ऊँ…..ऊँ……ऊँ….ऊँ….उ……उ…उ…उ… बस कुरते के कपडे का थोडा टुकड़ा ज़रूर कुत्ते के मुंह में रह जाता था………पर छोटे-मोटे नुक्सान कि फिकर कौन करता है…………जब जान के लाले पड़े हो……मुल्ला दौड़ रहें हैं…….दे..दाना…..दन……..दे…..दना…..दन मुल्ला तो ५ मिनट में स्टेशन पहुँच गए…………..और खाली पड़ी बर्थ पर फ़ैल गए……कलेजा उषा के पंखे को मात कर रहा था…….थोड़ी डोर में …..अपनी उखड़ी साँसों पर कब्ज़ा कर…..मुल्ला ने इधर उधर नजर दौड़ाई…..कुत्ता तो नजर नहीं आये… अब मुल्ला बोले…..भाई कमाल हो गया………बड़ा उस्ताद लड़का मिला…..ऐसा पैतंत नुस्खा बताया…….आक…छू…..कि ५ मिनट में स्टेशन………….भाई….मान गए…….ट्रेन अगर ना पकडनी होती,तो मुल्ला जाकर लड़के के हाथ जरुर चूमते……..कि आक …..छू……..बस …स्टेशन सामने…..भाई वाह.

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