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भिखारी भी तुम, लुटेरे भी तुम – ज़रा नहीं किसी से कम

Posted On: 23 Nov, 2011 Others में

अविनाश वाचस्‍पतिविचारों की स्‍वतंत्र आग ही है ब्‍लॉग

अविनाश वाचस्‍पति अन्‍नाभाई

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वे अपने वोटरों को भिखारी कह रहे हैं। यह जानते हुए भी कि उनका गुजारा वोटरों के वोटों के बिना नहीं होने वाला हे और वोट मांगने की चाहत में वे उनकी गरीब कुटिया में कई बार खाना खाने का ड्रामा कर चुके हैं। जबकि असली भिखारी तो यह खुद ही हैं। खाना भी उनसे मांग यही खा रहे हैं और वोट भी उनसे यही मांगेंगे। इससे तो यह जाहिर होता है कि इनकी ऊपर की मंजिल खाली है या भूसे से लबालब भरी हुई है। घास फूस यूं तो बहुत काम की होती है लेकिन वह इंसानों की नहीं, जानवरों की खुराक होती है।

दर्शनशास्‍त्र के अनुसार माना जाता है कि दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया। अब वे राहुल तो हैं पर रा से राम नहीं हैं और सबको भिखारी बतलाकर उन्‍होंने यह भी कह दिया है कि मर्यादा से तो वह कोसों दूर हैं। आप ही मांग रहे हैं और देने वाले को भिखारी बतला रहे हैं। जबकि सृष्टि में कोई ऐसा नहीं है जो मांगता न हो, या जिसने कभी मांगा न हो। आप वोटों की भीख मांगते हैं तो वे नोटों की क्‍योंकि आप वोट के बल पर सत्‍ता हथिया लेते हैं और नोट खुद ब खुद आपके पास आने लगते हैं। वैसे भ्रष्‍टाचारी और बेईमान होने से मांगना बेहतर कहा गया है।  कहा भी गया है कि जिसने की शर्म उसके फूटे कर्म और जिसने लादी बेशर्माई उसने खाई दूध मलाई। मांगने वाले तो जान की भीख भी मांगते हैं और पा लेते हैं। आपको समझना होगा कि जब जहाज में आतंकवादी कब्‍जा कर लेते हैं तो सभी उनसे अपनी जान की भीख मांग रहे होते हैं। मंदिर के बाहर भिखारी भीख मांग रहे होते हैं तो अंदर आप जैसे अपनी जीत की जो कामना कर रहे होते हैं, वह भी भगवान से भीख मांगना ही माना जाता है। आप गाड़ी में सवार होकर मंदिर पहुंच भीख मांग रहे होते हैं तो आपसे पैदल चल रहे भिखारी भीख मांग रहे होते हैं।

आप पीएम पर के लिए दावेदारी भी असल में भीख मांगना ही है। आप जानते हैं कि जिन कृष्‍ण एवं शिवाजी ने अखंड भारत का सपना देखा था उन्‍होंने उत्‍तर प्रदेश और महाराष्‍ट्र में ही जन्‍म लिया था। आपसे आरटीआई के तहत पूछा जा सकता है कि महाराष्‍ट्र में यूपी के कितने और यूपी में महाराष्‍ट्र के कितने भिखारी हैं।

आप जैसे सत्‍ता के भूखे जो गंदगी और कीचड़ भरी सड़कों पर पैदल चलकर, गांवों में गरीबों के घर पर वोट के लालच में खाना खा खाकर सुर्खियों में आ रहे हैं, उन्‍हें खाना खिलाने वाले नहीं जानते हैं कि आप उनके रहनुमा नहीं लुटेरे हैं और देश को बेदर्दी से लूटने में जुटे हुए हैं। आपके ऊपर देश का न जाने कितना धन सुरक्षा इत्‍यादि के नाम पर बरबाद किया जा रहा है और आप जिनके दिए गए टैक्‍स के बल पर यह सुविधाएं पा रहे हैं, उन्‍हें ही भिखारी बतला रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए यह बतलाना भी मुफीद रहेगा कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विस्‍टन चर्चिल ने हिंदुस्‍तानी नेताओं को सत्ता सौंपते समय कहा कि हम लुटेरों के हाथ सत्‍ता सौंप रहे हैं और अगले सौ साल में इस देश के सौ टुकडे हो जाएंगे।

ऐसा कोई नहीं हुआ जिसने कभी किसी से कुछ नहीं मांगा हो। प्रेमिकाएं अपने प्रेमी से मोबाइल फोन और उसमें बैलेंस मांगने लगी हैं। वैसे वे बिना मांगे ही बात करने के लालच में खुद ही रिचार्ज करवा देते हैं, अरे भाई, मोबाइल की बैटरी नहीं, टॉक टाइम बैलेंस। सैलफोन के आने से मांगने का दायरा खूब बढ़ गया है।  मांगने को रोग तो कहा नहीं जा सकता। मांगने की शैलियां सबकी अपनी अपनी तरह की यूनीक होती हैं।

आप देश के प्रदेश के टुकड़े करने में जुटे हुए हैं कि पी एम न सही, सी एम ही बन जाएं, आखिर कोई कुर्सी तो पाएं। ऐसा लगता है कि आपको अपने सिर पर हाथ रखकर खाक होने का श्राप मिला हुआ हो और आपने मारक मंत्र का पाठ शुरू कर दिया है। ऐसा लगता है कि आप अपने बयानों से राज्‍यों में खाई खोद रहे हैं बिजली, पानी, गैस पाईपों की तर्ज पर। आप जनता के मन में भी गहरी खाईयां बना दे रहे हैं। कभी भिखारी कह देते हैं कभी किसी प्रदेश को लड्डू के माफिक फोड़ने-बांटने को तैयार हो जाते हैं। एक भिखारी कह रहा है, दूसरा खाई खोद रहा है। मानो प्रदेश नहीं, फ्रूट हो गया है और इस फ्रूट को लूटने के लिए आप जैसे शातिर सक्रिय हो चुके हैं, क्‍या इसे देश का सौभाग्‍य माना जाए ?

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