blogid : 1004 postid : 729811

मंकी बोले तो मन की बात (कविता) अविनाश वाचस्‍पति

Posted On: 10 Apr, 2014 Others में

अविनाश वाचस्‍पतिविचारों की स्‍वतंत्र आग ही है ब्‍लॉग

अविनाश वाचस्‍पति अन्‍नाभाई

101 Posts

218 Comments

#‪#‎Monkey
मंकी बोले तो बंदर
केला लेकर हाथ में
घुसता संसद के भीतर
नहीं है तीतर
बिल्‍ली भी नहीं पास में
केला खुद खाते हैं
छिलके पर पब्लिक को
फिसलाते हैं
केला चित्‍तीदार समझकर
काले धन को सफेद केला
बनाना खा जाते हैं।

संसद में बैठे
यूं तो सब मंकी हैं
बंदर नहीं कहूंगा मैं
मंकी को दूंगा नया अर्थ
चुनाव के उपरांत
संसद में उछलते कूदते
नजर आएंगे।
चाहता हूं मैं
इच्‍छा मेरे मन की है
सभी चर्चित धर्म के ठेकेदारों
यानी धार्मिक बाबाओं को
सौंप दूं सत्‍ता
जिनका चयन करेंगे
उनके अंधभक्‍त भक्‍तगण
बापू आसाराम, निर्मल बाबा, बाबा रामदेव
और बाबाओं और बाबियों को
बिठला दूं संसद में
जहां पर मिल जुल कर
सब अपने मन की संसद चलाएं
उछल कूद कर देश को
विकास की ऊंचाईयों के
नए प्रतिमानों पर पहुंचाएं
विश्‍व बुलंदी पर
देश में काले धन में
काले रंग की लाजवाब चमकार लाएं।

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग