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सचिन, रियली यू आर जीनियस

Posted On: 17 Nov, 2013 Others में

अविनाश वाचस्‍पतिविचारों की स्‍वतंत्र आग ही है ब्‍लॉग

अविनाश वाचस्‍पति अन्‍नाभाई

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आखिर वही हुआ जिसका होना तय था।  सबने सोचा था कि सचिन क्रिकेट के भगवान का रुतबा हासिल करें।  इंसान में यही खूबी है कि  वह  जो मनभावन चाहे वही रच लेता है। मैंने पिछले दिनों अपने  एक लेख में बतलाया था कि भगवान ने एक दुनिया बनाई और इंसान ने उस एक
दुनिया के बदले अनेक नेक संसारों
  की  रचना कर ली। भगवान एक ही  है पर इंसान को अनेक  के  जमाने  में एक
से
  संतोष कहां होता इसलिए उसने अनेक भगवानों  की रचना कर ली।  इससे यह जाहिर हो गया कि  इंसान अपने सृष्टिकर्ता से भी संघर्ष पर उतारू है।  वह  जिससे असीम  प्‍यार  करता है उसी  से संघर्ष भी करता है।  इंसान के स्‍नेह प्रदर्शन का तरीका भगवान से अलग है।  इंसान एक के बदले अनेक  की रचना करके अपने को
साबित करता है।
  पर सचिन के मामले में उसकी सिर्फ एक ही
चली।
  इंसान ने सचिन को अनेक में एक और नेक साबित कर
दिया पर उसकी तरह का दूसरा सचिन गढ़ने
  में असफल रहा।  सचिन ने क्रिकेट से स्‍वैच्छिक संन्‍यास लेने की घोषणा कर दी तो हमने उन्‍हें  भारत रत्‍न से नवाज  दिया जबकि  इसकी मांग  बहुत 
दिनों से उनके प्रशंसकों द्वारा की
  जा रही थी।

अब तक हमारे चैनल उनके  इस कीर्तिमान को सबसे पहले
प्रसारित करने का श्रेय लूटने में जुटे हुए हैं।
  कुछ  उनकी जीवन की निजी  घटनाएं दिखला रहे हैं तो
कुछ ने इस अवसर को अपने लिए एक नायाब तोहफे के तौर पर लिया है।
  उन्‍होंने उनके जन्‍म से लेकर आज तक भारत और संसार की गतिविधियों से उनकी
तुलना करके इतिहास रचा है। उनके जन्‍म से लेकर अब तक विभिन्‍न क्षेत्रों में क्‍या-क्‍या
  बदलाव आए हैं
,  क्‍या-क्‍या हादसे हुए हैं, क्‍या-क्‍या उपलब्धियां हासिल की  गई  हैं।  सचिन के संन्‍यास यानी रिटायरमेंट को सचिन रूपी एक सच्‍चे इंसान ने एक
महा उत्‍सव बना लिया है।
  एक  बेमिसाल इतिहास रच दिया है।  सबका ध्‍यान सबका
रुख अपनी सकारात्‍मक उपलब्धियों के बल पर अपनी ओर मोड़ दिया है
, इसे देखकर मैं निस्‍संदेह कह रहा हूं सचिन, रियली यू आर जीनियस

भारत सरकार ने भी आज जागकर इस अवसर को यादगार बनाने और उसमें अपनी भागीदारी
सुनिश्चित करने के लिए सचिन को भारत रत्‍न सम्‍मान से सम्‍मानित करने की घोषणा कर
दी है। लेखक अखबारों
  के 
लिए लेख/कविताएं/व्‍यंग्‍य/पुस्‍तकें लिखने में जुट गए हैं
,
सब बाजी मारने की फिराक में हैं। सबने देर-सबेर बाजी मारनी है
, चाहे  किसी का लिखा अखबारों में छपे, पत्रिकाओं में छपे, पर अनछपा किसी का नहीं रहेगा।  इंसान ने वह दुनिया रचने में भी सफलता पा ली है जिसे सब इंटरनेट और उससे
जुड़ी सोशल मीडिया संबंधी गतिविधियों के लिए सक्रिय मंचों यथा फेसबुक
, ट्विटर, ब्‍लॉग, पिन्‍टरेस्‍ट, लिंकेदिन इत्‍यादि पर छाप लेंगे और अपने विचारों को पूरी दुनिया में
पहुंचा लेंगे।

पत्रिकाएं अपनी पत्रिकाओं के विशेषांक,
पत्र अपने खेल संस्‍करण
, प्रकाशक पुस्‍तकों में बिजी क्‍या
हो गए हैं
, कुछ तो अपने कार्यों को युद्धगति से पूरा भी कर
चुके हैं।
  चारों ओर एक ही लहर है और महासमुद्र की उस
लहर का नाम सचिन है
सचिन को भारत रत्‍न दिए जाने की महाखबर
है
, उनकी उपलब्धियों के हजारों किस्‍से हैं। करोड़ों लोगों
से
  जुड़ी  उनकी सुखद स्‍मृतियां
हैं। ऐसे में उनसे जलन व ईर्ष्‍या भाव रखने वालों की भी कमी
  नहीं है।  यह इंसान की फितरत है, जिससे बचना किसी के  लिए संभव नहीं है।

अब मेरा नंबर इस दौड़  में कहां पर होगा, मैं नहीं जानता, पर होगा पीछे ही। क्‍योंकि मैं
किसी पत्रिका का संपादक नहीं हूं
ब्‍यूरो प्रमुख नहीं
हूं
खेल ब्‍यूरो प्रमुख नहीं हूं  कि  अपने विचारों को तुरंत ही प्रकाशित कर
लूं। पर फिर भी सचिन की तरह मेरी भी यह एक छोटी सी कोशिश बड़ी बन सकती है। यही विश्‍वास
इंसान को उसकी  वांछित मंजिल तक पहुंचाता है।

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