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राजनीति की नई हवा

Posted On: 27 Dec, 2013 Others में

BHAGWAN BABU 'SHAJAR'HAQIQAT

Bhagwan Babu

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सही मायनो में अरविन्द केजरीवाल किसी परिपक्व राजनीतिज्ञ की भाषा नहीं अपितु एक आम आदमी की भाषा बोल रहे है, यही भाषा व उनकी जरूरत का मुद्दा सीधे-सीधे आम आदमी के दिल को छू गया। परिणाम स्वरूप आज अरविन्द केजरीवाल भारतीय राजनीति में आम आदमी का चेहरा बनकर उभरे है, और वो एक नया इतिहास भी बनायेंगे जब दिल्ली के रामलीला मैदान में मुख्यमंत्री पद का शपथ लेंगे, ऐसा आजतक शायद नही हुआ। अब तक सभी राजनेताओ की भाषा व वायदे राजनीतिक हुआ करते थे, जो आम आदमी जरा देर मे समझ आती थी, परंतु ये पहली बार है जब किसी ने राजनीति में आम आदमी की भाषा का इस्तेमाल हुआ है, जिनके वायदे सुनकर सभी राजनेता हैरत में है, और अपनी हैरानी छुपाने के लिए व्यंग्य कर रहे है कि जरा इन्हें पूरा करके तो दिखाये।
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भले ही अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली की जनता को 700 लीटर मुफ्त पानी, सस्ती बिजली और झुग्गी-झोपड़ियों का विकास जैसे मुश्क़िल मुद्दो के भरोसे दिल्ली की गद्दी पर बैठ रहे हो, और इसे पूरा करने के तरीका क्या है? ये पूछने पर वो कहते है कि इस मुद्दे के बारे में हमने पहले ही विशेषज्ञों से राय-मशविरा कर लिया था, फिर भी इसे जमीनी हक़ीक़त तक पहुँचाने में इस पार्टी को काफी मुश्किलें आयेंगी। अपने लिए गाड़ी, बंगले व सुरक्षा की सुविधा न लेना भी आज के राजनीतिक और सामाजिक परिवेश में एक क्रांतिकारी फैसला है, जिसे अमली-जामा पहनने में काफी मुश्किलातों का सामना करना पड़ेगा। आत्म-निर्भरता या खुद्दारी शब्द जितना सुन्दर है उतना ही मुश्किल भी। लेकिन कहते है न कि वो काम ही क्या जो मुश्किल न हो। तो जनता का भला हो, इसके लिए हम सभी को मिलकर अरविन्द केजरीवाल के सपनो के उम्मीदों को हवा देनी चाहिए, न कि व्यंग्य और चुटकुले से हतोत्साहित और टाँग खींचकर मजे लेने चाहिए। और भारतीय परिपक्व राजनीति करने का असली मंत्र यही है कि जो जनता के लिए अच्छा कर रहा हो उसका टाँग खींचो और मजे लो, उस पर चुटकुले सुनाकर जनता से वाह-वाही लो।
और यह शायद पहली बार हो रहा है जब कोई पार्टी हर एक बात जनता से पूछकर, उससे मशविरा लेकर आगे चल रहा हो। सरकार बनाउँ या न बनाउँ? कांग्रेस से समर्थन लूँ कि न लूँ? सब कुछ जनता ही तय कर रही है। उम्मीद है लोकतंत्र अब राजशाही न होकर लोकशाही हो। लेकिन सोच को, सपने को, हकीकत में तब्दील करना मर्दो का काम है। मुझे नही लगता कि ये सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी, लेकिन कुछ भी हो अरविन्द केजरीवाल ने राजनीति में ईमानदारी की एक नई हवा चलाकर जनता व अन्य पार्टियों दिखाया है कि राजनीति भी ईमानदारी से की जा सकती है, नही तो राजनीति और नेता जैसे शब्द मुँह पर आते ही एक बेईमान, भ्रष्ट, घोटालेबाज, झूठा … इस तरह की तस्वीर आँखों के सामने बनती थी। मतलब ये है राजनीति के प्रति लोगो की सोच बदली है, और इसका पूरा-पूरा श्रेय अरविन्द केजरीवाल को ही जाता है।
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एक बात ये भी है कि जब से कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने का फैसला लिया गया है, कुछ लोगों की सोच अरविन्द केजरीवाल के प्रति बदल सा गया है। उन सभी लोगो को धैर्य रखने की जरूरत है, क्योंकि इसके अभी कोई भी संकेत नही मिले है कि “आप” अपने वादो से मुकरता दिख रहा हो। सच्चाई ये भी है कि अरविन्द केजरीवाल के मुख्यमंत्री बनते हुए देखकर ही सभी भ्रष्ट अधिकारियों की कुर्सियाँ हिलने लगी है, बाद में क्या होगा ये वो खुद ही जानते है। मैं अपने इस सन्देह को भी उजागर करना चाहता हूँ कि जब भी भ्रष्ट अधिकारियों के विरोध में “आप” कदम उठायेगी, काँग्रेस अपना समर्थन वापस लेने की धमकी देगी, देखने वाली बात तब होगी कि अरविन्द केजरीवाल उस समय दाँव पर किसको लगाते है और छोड़ते किसे है सत्ता को या जनता को, साथ किसको लेते है ईमानदारी को या बेईमानी को।

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