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आ अब लौट चलें

Posted On: 5 Jul, 2019 Uncategorized में

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bhawanadc64

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आ अब लौट चलें
आअब लौट चलें उन हसीन वादियों की ओर, जहाँ से जुड़ी है हमारे बचपन की डोर।
वे टेढ़ी – मेढी़ संकरी पगडंडियों के रास्ते, उस स्वच्छ निर्मल बहते पानी के वास्ते।
वे फलों से लदे पेड़ वे सीढ़ीनुमा हरे – भरे खेत, उस शीतल स्वच्छ वायु के वास्ते।
आ खोल दें घर पर लगे उस पुराने ताले को, याद कर बचपन के उन हसीन पलों को।
कहीं खत्म ना हो जाए वो, उस अनमोल विरासत के वास्ते।
आअब लौट चलें अपने उस घर की पुरानी यादों के वास्ते।
आअब लौट चलें अपने जीवन के वास्ते।

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