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बस यूँ ही (कविता)

Posted On: 4 Jul, 2019 Others में

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bhumika01

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कभी कभी मन करता है
खूब हसूँ बस यूँ ही,
खमोसियों को छोड कर
शोर करूँ बस यूँ ही ।

घर से निकलूं बेवजह
घूमूँ फिरूँ बस यूँ ही,
बंधन सारे तोड कर
बनूँ आवारा बस यूँ ही।

 

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