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जीवन की सत्यता

Posted On: 1 Jul, 2020 Spiritual में

chittra0512

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जितने कष्ट कंटको में जिसका जीवन सुमन खिला गौरव गंध उन्हे उतना ही अत्र, तत्र,सर्वत्र मिला ‘।

कवि की कविता की यह पंक्ति वास्तविक जीवन के सत्यता को दर्शाती है। इतिहास साक्षी है कि ज्यादा तर महापुरूषों का जीवन बहुत ही संघर्ष मय रहा है। यह नितांत सत्य भी है –‘ तूफानो से उलझना ही जीवन का दूसरा नाम है, जीवन की राह इतनी समतल नही जितना इंसान समझता है’। वर्तमान समय अर्थ युग में परिवर्तित हो गया है ।जीवन का अर्थ ही समय है, समय को काल भी कहा जाता है । समय के देवता —महाकाल है ।

 

 

इंसान को अपने आत्मविश्वास को महाकाल के चरण मे समर्पित कर निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए । परंतु आजकल नवयुवक एक दिन में ही लखपति बन जाना चाहते है ।इस लक्ष्य के निर्धारण के बाद जब उन्हे सफलता नही मिलती है तो उनमे निराश एवं कुंठा के भाव पनपने लगते है जो कि स्वभाविक है ।मनोवैज्ञानिक सत्य है कि इस तरह के व्यक्ति गहरे अवसाद ( depression ) में चले जाते है ।उनका व्यक्तित्व पूरी तरह नकारात्मक सोच से प्रभावित हो जाता है । उनमे तरह-तरह की बीमारियाँ एकान्त रहने की आदत,छोटी छोटी बातों में क्रोधित होना,आत्म विश्वास का निरंतर कम होना आदि मानसिक तनाव ( ग्रंथि ) उत्पन्न हो जाती है।

 

 

ऐसे व्यक्ति आत्महत्या तक कर लेते है । ऐसे में हमें थोड़ा गहराई में उतर कर ऐसे लोगो का आत्मनिरीक्षण करने की आवश्यकता कि वह व्यक्ति सफलता के लिए आवश्यक ऐसे किन कारकों को नजरअंदाज कर रहा है जिनके अभाव में वह सफलता के समीप होते हुए भी सफलता से वंचित रह जा रहा है ।ऐसे कुछ महत्वपूर्ण कारक जिन्हे मनोचिकित्सक भी मानते है —स्वयं की क्षमता पर विश्वास होना,एकाग्रता की शक्ति, दूरदर्शिता भरी सोच का होना, धैर्य का होना, अच्छी कल्पना शक्ति आदि ।

 

 

 

सारांश यह है कि आजकल के नवयुवक जीवन जीने का मतलब ही नही जानते तो जीवन के विकास के तौर तरीके कैसे पहचानेंगे।मानव जीवन को विकास की अंतिम सीढ़ी तक पहुचाने के लिए जिस संबल की आवश्यकता होती है वह –दृढ़ इच्छाशक्ति और श्रध्दा है, जो कि आजकल के नवयुवको में होना अति आवश्यक है ।जीवन मे अच्छी -बुरी परिस्थितियाँ सदैव निर्मित होती रहती है ।इनसे पार निकलते समय यदि साथ में प्रबल आत्म विश्वास और श्रध्दा का सहारा हो तो सभी कठिनाइयाँ देखते देखते पार हो जाती है वही व्यक्ति समाज में सफल इंसान कहलाने का हकदार होता है।

 

 

 

डिस्कलेमर : उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी है। जागरण जंक्शन किसी भी दावे या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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