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काले धन पर मोदी सरकार का करारा प्रहार

Posted On: 12 Nov, 2016 Others में

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braj kishore singh

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मित्रों, यह बात किसी से छिपी नहीं है कि हम भारतीय स्वाभाव से ही चोर होते हैं। मेरा तात्पर्य टैक्स चोरी से है। सरकारी नौकरों के लिए तो सही टैक्स देना मजबूरी है लेकिन बांकि लोगों में शायद ही कोई ऐसा होगा जो सही-सही टैक्स भरता होगा। अगर आम जनता ईमानदारी से टैक्स भरने लगे तो काले धन की समस्या उत्पन्न ही नहीं हो।
मित्रों, मोदी सरकार के गठन के बाद जब विदेश से काला धन वापस लाने की बात होने लगी तब भी मेरे जैसे कई बेकार लोगों ने कहा था कि सरकार पहले घरेलू काला धन पर तो कार्रवाई करे विदेश से काला धन लाना तो बाद की बात है। कहना न होगा कि लगभग सारे अर्थशास्त्री इस बात से सहमत हैं कि विदेश गए काले धन से कई गुना ज्यादा काला धन तो अपने देश में ही मौजूद है।
मित्रों, जाहिर है इस सच्चाई से केंद्र सरकार भी नावाकिफ नहीं थी और सरकार के भीतर भी इस समस्या के समाधान को लेकर मंथन चल रहा था। मोदी सरकार ने पहले तो काला धन घोषित करने की योजना बनाई। साथ ही चेतावनी भी दी कि आनेवाला समय उनके लिए काफी कठिन साबित होनेवाला है। जाहिर है कि हमारे देश के ज्यादातर कालाधन धारकों ने सरकार की चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया। कई बड़े नेता तो लगातार पीएम मोदी से अपने हिस्से का १५ लाख रुपया मांगते रहे और आज लोग अपना-अपना माथा पीटते दिख रहे हैं।
मित्रों, कतिपय नेताओं सहित सारे श्यामा लक्ष्मी धारकों के लिए ५०० और १००० रुपये को परिचालन से बाहर करना वज्रपात सिद्ध हुआ है। कहीं पुल के नीचे से रुपयों से भरे बोरे बरामद हो रहे हैं तो कहीं गंगा जी में पानी के बदले रुपया बह रहा है। हाजीपुर के कई धन्ना सेठों ने अपने कर्मियों के बीच बैंकों में जमा करने के लिए कई-कई लाख रुपए बाँट दिए हैं तो कई ने कर्मियों को एडवांस में लाखों रुपए दे दिए हैं। लेकिन कई लोग ऐसे भी हैं जिनके लिए पुराने नोटों को परिचालन से बाहर करना बहुत बड़ी विपत्ति बनकर आई है। आज ही मैंने हाजीपुर,एसबीआई में एक ऐसे व्यक्ति को मैनेजर के आगे हाथ जोड़कर गिडगिडाते हुए देखा जिसकी बेटी की शादी में अब मात्र दो दिन शेष बचे हुए हैं। उस बेचारे के समक्ष तो जीवन और मृत्यु का प्रश्न खड़ा हो गया है। इस तरह की खबरें कई स्थानों से आई हैं कि फलाने ने इसलिए जीवनांत कर लिया क्योंकि वो अपनी पुत्री के विवाह की व्यवस्था के लिए परिचालन योग्य पैसों का प्रबंध पर्याप्त मात्रा में नहीं कर पाया। इतना ही नहीं इस समय पूरा भारत एकबारगी लाईन में खड़ा हो गया है। पास में पैसा है फिर भी लोग परेशान हैं। जिस तरह से बैंकों और डाकघरों में पैसे बदलने के लिए लोगों की लम्बी कतारें लग रही हैं,लोग कुत्ते की तरह अपने ही पैसों को बदलने के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं, खेती-किसानी के मौसम में किसान बेहाल है उससे तो यही लग रहा है कि सरकार ने यह कदम आधी-अधूरी तैयारी के साथ उठाया है। साथ ही हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि सारे आर्थिक कारोबारों के ठप्प हो जाने से देश की अर्थव्यवस्था को अरबों का घाटा हुआ है।
मित्रों, यद्यपि इस समय जौ के साथ घुन यानि बेईमानों के साथ ईमानदार भी पिस रहे हैं फिर भी ऐसा कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि सरकार ने काले धन की समानान्तर अर्थव्यवस्था पर करारा प्रहार किया है जो तमाम आलोचनाओं के बावजूद अत्यावश्यक था। तथापि बेहतर होता अगर सरकार यह कदम पूरी तैयारी के बाद उठाती। आगे भी जब तक मोदी सरकार सत्ता में रहेगी उम्मीद की जानी चाहिए कि लोग करवंचना करने से बचेंगे क्योंकि उनके मन में हमेशा इस बात का डर रहेगा कि कहीं सरकार फिर से बड़े नोटों के परिचालन को बंद न कर दे। हालाँकि विचारणीय प्रश्न यह भी है कि कोई अरब-खरबपति अपनी अघोषित आय का कितना बड़ा हिस्सा घर में रखता होगा,शायद काफी छोटा।

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