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शराबबंदी से किसको फायदा?

Posted On: 10 Aug, 2017 Others में

ब्रज की दुनियाब्रज की दुनिया में आपका स्वागत है. आइये हम सब मिलकर इस दुनिया को और अच्छा बनाने का प्रयास करें.

braj kishore singh

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मित्रों, मैं वर्षों से अपने आलेखों में कहता आ रहा हूँ कि बिहार एक प्रदेश या जमीन का टुकड़ा ही नहीं, बल्कि एक मानसिकता भी है. नहीं तो क्या कारण है कि जो योजनाएं बाकी भारत में अतिसफल रहती हैं, बिहार में अतिविफल हो जाती हैं. भ्रष्टाचार तो जैसे हम बिहारियों के खून में, डीएनए में समाहित है. लहर गिनकर पैसे कमाने वाले तो आपको देश के दूसरे हिस्सों में भी मिल जाएँगे, लेकिन सूखे की स्थिति में भी लहरों का मजा देकर पैसा कमाना सिर्फ हम बिहारियों को आता है.


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मित्रों, शराबबंदी से पहले बिहार की क्या हालत थी? छोटे-छोटे गाँवों के हर गली-मोहल्ले में नीतीश सरकार ने शराब की दुकान खोल दी थी. जिधर नजर जाती थी, उधर युवाओं के कदम लड़खड़ाते हुए नजर आते थे. मानों पूरा बिहार नशे में था और मदहोश कदमों से बर्बादी की ओर बढ़ रहा था.


मित्रों, ऐसे में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गलतियों से सबक लिया और राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी. हमने तब भी कहा था कि बिहार पुलिस भारत ही नहीं दुनिया का सबसे भ्रष्ट संगठन है, ऐसे में इस आन्दोलन का सफल होना नामुमकिन है. सरकार इसे विफल नहीं होने देगी और बिहार पुलिस इसे सफल नहीं होने देगी.


मित्रों, आज शराबबंदी लागू होने के डेढ़ साल बाद क्या स्थिति है? पैसे वाले पियक्कड़ों को तस्करों ने होम डिलीवरी की सुविधा दे दी है. एक फोन पर उनके घर शराब पहुंचा दी जाती है. दाम जरूर दोगुना देना पड़ रहा है. यद्यपि तस्कर भी जब पकड़े जाते हैं, तो उनकी सालभर की कमाई जमानत लेने में ही उड़ जाती है. मगर ये छोटे तस्कर हैं, बड़े तस्कर जो राजनीति में भी दखल रखते हैं, उन पर कोई हाथ नहीं डालता. हमारे वैशाली जिले के ही एक एमएलसी पहले भी शराब माफिया थे और आज भी हैं. रोज ट्रक से माल मंगाते हैं, लेकिन किसी की क्या मजाल कि उन पर हाथ डाल दे.


मित्रों, छोटे पियक्कड़ जो पहले मुंहफोड़वा से दिल लगाए थे, अब ताड़ी से काम चला रहे हैं. ऐसे में ताड़ी बेचनेवालों की पौ-बारह है और उन्होंने ताड़ी के दाम कई गुना बढ़ा दिए हैं. इतना ही नहीं राज्य में गांजा और ड्रग्स की तस्करी में भी भारी इजाफा हुआ है. बिहार में शराबबंदी से सबसे ज्यादा किसी को लाभ हो रहा है, तो वो है यहाँ की पुलिस. माल पकड़ा जाता है एक ट्रक, तो बताया जाता है एक ठेला. बाकी पुलिसवाले खुद ही बेच देते हैं. जब्त दर्ज माल के भी बहुत बड़े हिस्से के साथ ऐसा ही किया जाता है और रिपोर्ट बना दी जाती है कि चूहे शराब पी गए.


मित्रों, ऐसे में बिहार सरकार को विचार करना होगा कि शराबबंदी से किसको क्या मिला? राज्य से खजाने को भारी नुकसान होने के बावजूद मैं मानता हूँ कि सरकार का कदम सही है, लेकिन दुनिया की सबसे भ्रष्ट संस्था बिहार पुलिस पर वो कैसे लगाम लगाएगी, विचार करने की जरुरत है. क्योंकि बिल्ली कभी दूध की रखवाली नहीं कर सकती? बड़े शराब माफियाओं पर भी हाथ डालना इस मुहिम की सफलता के लिए जरूरी हो गया है. साथ ही अगर गांजा और ड्रग्स की आमद को भी रोका नहीं गया, तो बिहार की ‘पूत मांगने गई थी और पति गवां के आई’ वाली स्थिति होने वाली है.

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