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कलियुग के काले किस्से !

Posted On: 14 Apr, 2018 Common Man Issues में

aaina.सच्चाई छिप नहीं सकती ![लेख /कहानी -कविता/हासपरिहास

brajmohan

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अभी जम्मू के कठुआ और उत्तरप्रदेश के उन्नाव की दिल दहलाने ,अंतर्मन को झकझोर देने वाली दुर्दांत घटनाओं के जख्म ताजा हैं,इन जख्मों से रिसती हुई मवाद सरीखी सूचनाओं से पता चल रहा है कि 21वीं सदी ने पलटी मारी है और देश की सभ्यता-संस्कृति को एकाएक आदिम युग के जंगल में धकेल दिया है।जहां मंदिर में महंत- नेतालोग और पुलिस पूरे अनुष्ठान-विधि-विधान से 8 साल की अबोध बालिका से बारी-बारी से रेप करते हैं और पहले गला दबाकर,फिर पत्थर से सिर कुचल कर मार देते हैं।
कुछ न कुछ इसी तरह का कुकृत्य उन्नाव में होता है,पीड़िता दर-दर न्याय के लिये यहां-वहां भटकती रहती है,लेकिन दबंग आरोपी जनप्रतिनिधि को बचाने के लिये पूरा प्रशासन एड़ीचोटी का जोर लगा देता है।शोषण दमन का दुश्चक्र यहीं खत्म नहीं होता बल्कि रेप पीड़िता के पिता को इंसाफ मांगने और प्रतिरोध करने के अपराध में झूठे मुकदमे में जेल में ठूंस दिया जाता है,जहां कथित तौर पर दबंगों की मार खाते-खाते उसकी मौत हो जाती है ।
वो तो पीड़िता का सौभाग्य कहिये कि मीडिया में मची चीख-पुकार, विरोधियों और भारी जनदबाव के चलते आरोपियों पर कानूनी और न्यायिक कार्यवाही होती दिख रही है।यहाँ तक कि प्रधानमंत्री तक ने इन घटनाक्रम को बेहद शर्मनाक,झकझोरने वाला बताकर कठोर कार्रवाई का भरोसा दिया  है ।
लेकिन ये दुर्दांत क्रूरतम अपराधी हमारे इसी समाज से आते हैं तो समाज और राजनेता जितनी जल्दी इस फैलती विकृत  मानसिकता का संग्यान लेंगे उतना ही देश का भला है,क्योंकि इन घटनाओं  में मंदिर के पुजारी -नेता और पुलिस सब शामिल पाये गये  हैं,जब इन पापियों ने पूजा-अर्चना करने के स्थान तक अपवित्र कर दिये है,फिर नागरिक अपने दुखदर्द दूर करने के लिये किन देवी-देवता के मंदिर में जायें ,क्योंकि  शासन व्यवस्था से तो कबका मोहभंग हो ही चुका है।
वो बेचारे तो अपनी बनाई भगवान देवी देवताओं की मूर्तियों मंदिरों में ही विश्वास करते आये हैं ,यही उन्हे सिखाया  गया है। वे बेचारे नहीं जानते भगवान  तो अपनी बनाई मूर्तियों में ही बसते हैं।
इन घटनाओं से सबक लेना चाहिए कि सब साधु-संत पापी नहीं होते ,लेकिन इनमें भी कुछ पापी हैं ।सभी नेता पापी नहीं होते लेकिन इनमे कौन पापी नहीं है,कैसे पता चलेगा ?  इसी तरह सब पुलिस  वाले पापी नहीं हैं,लेकिन कौन कब पापी सिद्ध  हो जायेगा पता नहीं ।
इन और हर रोज देश में घट रही ऐसी घटनाओ ने सभ्य समाज के माथे पर जो कलंक लगाया है ,उसके लिए देश के धर्मसमाज-,न्याय -कानून और राजनीति व्यवस्था को निश्चित ही प्रायश्चित करना चाहिए । कैसे ? इस पर तत्काल  विचार किया जाना  चाहिए  ।

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