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व्यर्थ चिंता न करो नीरव !

Posted On: 22 Feb, 2018 Others में

aaina.सच्चाई छिप नहीं सकती ![लेख /कहानी -कविता/हासपरिहास

brajmohan

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आदरणीय प्यारे नीरव मोदी जी ,

श्री चरणों में नमन !
यहाँ सब कुशल है .आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है आप भी स्वस्थ एवं सानंद होंगे .आपका पत्र मिल गया है ,अपने कर्मचारियों को
भेजा मेल भी पहुंच गया है ,देख लिया है .कुछ अच्छा नहीं लगा,आप तो नाराज हो गए.व्यर्थ चिंता न करो तुम जैसे महानुभाव तो देश की आत्मा हो और आत्मा को न शस्त्र काट सकते हैं,न आग जला सकती है। तुम जैसे 7-8 लाख करोड एनपीए वाले भाईलोग के आसरे तो देश की अर्थव्यवस्था सांस ले रही है।तुम पर कार्रवाई कौन करेगा?यदि तुम जैसे लोग के विरूद्ध कार्यवाही हुई तो अर्थव्यवस्था धड़ाम हो जायेगी।आ जाओ, फिर तुम्हारे सरनेम का तो वैसे ही डंका बज रहा है देश- विदेश में।लौट आओ,लौट आओ डियर !

  1. तुम तो गधे के सिर से सींग की तरह गायब हो गये नीरव । ऐसे भी कोई नाराज होके जाता है क्या ? यहाँ गूगल कर करके परेशान हैं ,यहाँ तक कि सेटेलाइट से भी नज़र नहीं आ रहे हो . तुम कहां छुपे हो छलिया ,चितचोर ? यहां तुम्हारे चचा ताऊ नानी नाना और चाहने वालियां सब परेशान हैं ।तुम्हारे ब्रांड एम्बेसडरों का रो रोकर बुरा हाल है,सारे बैंक के ऊपर नीचे के  लोगों का धंधा बंद है ,यहां तक कि एलओयू साइन करने वाले, सिफ़ारिश करने वाले तुम्हें याद कर रहे हैं।हीरे-जवाहरात के बिना उनकी बहन बेटियों और बीबियों के गले सूने-सूने हैं ।सच तुम्हें कोई कुछ नहीं कहेगा,तुम जैसे न जाने कितने 2 जी वाले खुल्ले घूम रहे हैं,तुम्हारा कोई क्या उखाड़ लेगा।तुम्हैं तो पता ही है एक डेढ़ लाख करोड के कर्जवाले भाई लोग तक देश में मजे कर रहे है तो तुम क्या चीज हो ।
  2. देखो कुछ राज्यों के चुनाव सिर पर हैं,चंदे की रसीदें छप गई हैं,नीचे ऊपर से जो भी बने मदद करो !तुम हमारी करो हम तुम्हारा ध्यान रखेंगे। अरे भाई सभी सत्ताधीन पार्टियां यही करती हैं ,यहाँ कोई हरिश्चंद्र नहीं है .वो ज़माने चले गए जब खलील खान फाख्ता उड़ाया करते थे क्या, नहीं समझे छोड़ो यार क्या करोगे समझ के . माना कि अभी पार्टी के पास 800 करोड फंड है,लेकिन जानते ही हो चुनाव में कितना खर्च होता है ,मीडिया वालों को भी सैट करना होता है। मतदाता को मोबाईल लैपटॉप वगैरह -वगैरह देने होते हैं और रैलियों में भीड़ की भी जरुरत होती हैं।अब तो दिहाड़ी भी बढ गई है ,ससुरे मुंह फाड़ने लगे हैं । बड़ी देर भई नंदलाला तेरी राह तके बृजबाला। आ जा रे नीरव ! लौट आ प्यारे !


शुभेच्छु

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