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आइंस्टीन का मस्तिष्क

Posted On: 26 Nov, 2012 Others में

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अल्बर्ट आइंस्टीन को जीनियस माना जाता है। लेकिन उन्होंने इतनी कुशाग्रता कैसे हासिल की? अनेक रिसर्चर यह मानते हैं कि एक असाधारण मस्तिष्क ही सापेक्षता के सिद्धांत और आधुनिक भौतिकी की बुनियाद रखने वाली दूसरी बातों की कल्पना कर सकता है। आइंस्टीन के मस्तिष्क के हाल ही में खोजे गए 14 नए चित्रों के अध्ययन का निष्कर्ष है कि उनका मस्तिष्क कई तरह से असामान्य था। लेकिन रिसर्चर अभी यह नहीं जान पाए हैं कि मस्तिष्क की घुमावदार तहों, कुंडली जैसी संरचनाओं और असामान्य उभारों का आइंस्टीन की अद्भुत प्रतिभा से क्या संबंध है। आइंस्टीन के मस्तिष्क की कहानी 1955 में पिं्रसटन में उनके निधन से आरंभ हुई थी। एक डॉक्टर थॉमस हार्वे ने वैज्ञानिक अध्ययन के लिए उनके मस्तिष्क को संरक्षित करने की अनुमति मांगी। आइंस्टीन के पुत्र हैंस अल्बर्ट ने सहज ही इसकी अनुमति प्रदान कर दी। हार्वे ने सबसे पहले मस्तिष्क के फोटोग्राफ लिए। इसके पश्चात उन्होंने इसे 240 खंडों में विभाजित कर दिया। इन मस्तिष्क-खंडों को गोंद जैसे किसी रासायनिक पदार्थ में संरक्षित किया गया। हार्वे ने इन खंडों को माइक्रोस्कोप-अध्ययन के लिए 2000 पतले खंडों में बांट दिया। बाद में उन्होंने दुनिया के करीब 18 रिसर्चरों को आइंस्टीन के मस्तिष्क की माइक्रोस्कोपिक स्लाइडें और फोटो वितरित कर दिए। हार्वे द्वारा अपने पास रखी गई कुछ स्लाइडों को छोड़ कर कोई यह नहीं जानता कि मस्तिष्क के नमूने कहां है। संभवत: ये नष्ट या गुम हो चुके हैंै।


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पिछले दशकों के दौरान इन नमूनों के अध्ययन के आधार पर छह रिसर्च पेपर प्रकशित हुए। इनमें से कुछ अध्ययनों में आइंस्टीन के मस्तिष्क में कुछ अनोखी बात नजर नहीं आई। लेकिन 2009 में प्रकाशित फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी के एक एंथ्रोपोलोजिस्ट डीन फाक के रिसर्च पेपर सहित दो अध्ययनों में दावा किया गया कि भौतिकी के कठिन सवालों को सुलझाने में आइंस्टीन की अद्भुत क्षमता का संबंध उनके मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में असामान्य पैटर्न से है। लेकिन फाक का अध्ययन हार्वे द्वारा उपलब्ध किए गए चंद फोटोग्राफ पर आधारित था। 2007 में हार्वे का निधन हो गया। 2010 में हार्वे के उत्तराधिकारी आइंस्टीन से संबंधित सारी रिसर्च सामग्री अमेरिकी सेना के सिल्वर स्पि्रंग स्थित नेशनल म्यूजियम ऑफ हेल्थ एंड मेडिसिन को सौंपने के लिए राजी हो गए।


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अब फाक ने हार्वे के संकलन से मिले संपूर्ण मस्तिष्क के 14 चित्रों का विश्लेषण किया है, जिसकी रिपोर्ट ब्रेन पत्रिका में प्रकाशित हुई है। इससे पहले हार्वे का संकलन कभी सार्वजनिक नहीं किया गया था। फाक और उनके सहयोगियों ने आइंस्टीन के मस्तिष्क की तुलना 85 अन्य व्यक्तियों के मस्तिष्कों से करने के बाद पाया कि महान भौतिकशास्त्री के कानों के बीच कुछ खास बात है। आइंस्टीन के मस्तिष्क का वजन 1230 ग्राम था। आकार में औसत होने के बावजूद उसके अनेक हिस्सों में घुमावदार संरचनाएं और तहें मौजूद हैं, जो दूसरे व्यक्तियों में मुश्किल से दिखाई देती हैं। मसलन उनका प्रिफ्रंटल कोर्टेक्स काफी फैला हुआ है। दिमाग के इस हिस्से का संबंध प्लानिंग, चुनौतियों के सम्मुख धीरज और एकाग्रचित कार्य से होता है। फाक का कहना है कि मस्तिष्क के प्रत्येक हिस्से में कुछ ऐसी जगहें हैं, जो उभार और तहों की दृष्टि से बेहद जटिल हैं। उनका ख्याल है कि आइंस्टीन ने भौतिकी की अपनी अमूर्त अवधारणाओं के लिए अपने फ्रंटल कार्टेक्स का असाधारण ढंग से उपयोग किया था। बोस्टन स्थित हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के न्यूरोसाइंटिस्ट अल्बर्ट गेलाबर्डा का कहना कि फाक का अध्ययन इस माने में महत्वपूर्ण है कि इसने पहली बार आइंस्टीन के मस्तिष्क की संपूर्ण एनाटोमी का सविस्तार विवरण पेश किया है। इसने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके जवाब हमें अभी तक नहीं मालूम हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आइंस्टीन का दिमाग शुरू से ही असाधारण था या भौतिकी के गहन अध्ययन से उनके दिमाग के कुछ हिस्से ज्यादा फैल गए।


लेखक मुकुल व्यास स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं


Tag: अल्बर्ट आइंस्टीन, जीनियस,

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