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संप्रग सरकार पर आरोपों का सिलसिला

Posted On: 3 Nov, 2012 Others में

जागरण मेहमान कोनाविभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों व विद्वानों के विचारों को उद्घाटित करता ब्लॉग

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संप्रग सरकार के माथे पर भ्रष्टाचार के गंभीर इल्जामात हैं। वह अपनी साख गवाने को तो तैयार है, लेकिन दोषों को मिटाने को नहीं। नतीजा सामने है। हर दिन उसके खिलाफ भ्रष्टाचार के नए मामले सामने आ रहे हैं। सरकार को मुंह छिपाना पड़ रहा है। एक बार फिर सरकार और कांग्रेस आरोपों के घेरे में है। मंत्रिमंडल के फेरबदल में पूर्व पेट्रोलियम मंत्री एस जयपाल रेड्डी के विभाग में बदलाव को लेकर सवाल उठ खड़ा हुआ है। सरकार की नीयत संदेह के घेरे में आ गई है। अरविंद केजरीवाल समेत देश के विपक्षी दलों ने हल्ला बोला है कि मनमोहन सरकार को कॉरपोरेट जगत चला रहा है और उसी के इशारे पर रेड्डी को हटाया गया है। केजरीवाल ने यह भी आरोप लगाया है कि देश में गैस के दाम बढ़ने का मूल कारण रिलायंस की ब्लैकमेलिंग है।


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वह धनार्जन के लिए देश के साथ छल कर रही है। उसके इशारे पर ही मणिशंकर अय्यर को हटाकर मुरली देवड़ा को पेट्रोलियम मंत्री बनाया गया और उन्होंने रिलायंस को एक लाख करोड़ का फायदा पहुंचाया। रिलायंस पर यह भी आरोप है कि वह जानबूझकर 31 में से केवल 13 कुएं से गैस निकाल रही है ताकि देश में गैस की कमी बनी रहे और वह सरकार पर दबाव बनाकर उसकी कीमत बढ़वा सके। कहा तो यह भी जा रहा है कि एस जयपाल रेड्डी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के केजी-डी 6 क्षेत्र की कैग से जांच कराने का आदेश दिया और उसी का उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ा। हालांकि सरकार और रिलायंस दोनों ही इन आरोपों को खारिज कर रहे हैं, लेकिन वे यह बताने को तैयार नहीं हैं कि जब 2001 में रिलायंस ने एनटीपीसी को 2.25 डॉलर प्रति यूनिट के हिसाब से गैस देने का वादा किया था तो बाद में मुकर क्यों गया। रेट में बार-बार बदलाव क्यों किया गया,।


रिलायंस पर यह भी आरोप है कि वह गैस का दाम 14.25 डॉलर प्रति यूनिट करने के लिए सरकार पर दबाव बना रही है। अगर यह सच है तो निश्चित ही गंभीर मामला है और इस सच को देश के सामने आना चाहिए। नीरा राडिया टेप प्रकरण से उजागर हो चुका है कि प्रधानमंत्री के न चाहने के बाद भी ए राजा को मंत्रिमंडल में जगह मिली और वे संचार घोटाला करने में कामयाब हुए। ऐसे में अगर सरकार पर यह आरोप लगता है कि वह कॉरपोरेट लॉबी के प्रभाव और दबाव में है तो अनुचित नहीं कहा जा सकता।


लेखक अभिजीत


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