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एक तानाशाह का हश्र

Posted On: 23 Aug, 2011 Others में

जागरण मेहमान कोनाविभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों व विद्वानों के विचारों को उद्घाटित करता ब्लॉग

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पिछले दिनों सारी दुनिया ने टीवी पर देखा कि मिश्च के पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को एक बड़े पिंजरे में काहिरा लाया गया जहां उन पर और उनके बेटों पर भ्रष्टाचार तथा निर्दोष लोगों की हत्या करवाने का आरोप लगा हुआ है। मिश्च पर 30 वषरें तक राज करने वाले होस्नी मुबारक निरीह आंखों से पिंजरे से अदालत की कार्रवाई को देख रहे थे और अपने को कठोर सजा भुगतने के लिए तैयार कर रहे थे। आज से एक वर्ष पहले किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि होस्नी मुबारक को यह दिन भी देखना पड़ सकता है। अक्टूबर 1981 में मिश्च के तत्कालीन राष्ट्रपति अनवर सादात की हत्या के बाद होस्नी मुबारक राष्ट्रपति बने। इसके बाद 30 वषरें तक उन्होंने निरंकुश तानाशाह की तरह मिश्च पर शासन किया। इसमें कोई संदेह नहीं कि मुबारक ने मिश्च की जनता को आधुनिक तौरतरीकों से अवगत कराया। परंतु उन्होंने और उनके दो बेटों अलाह और गमाल ने जिस तरह दोनों हाथों से मिश्च को लूटा उसे देखकर जनता में जबरदस्त रोष था। मुबारक और उनके दोनों लड़कों ने मिश्च का लूटा हुआ धन विदेशी बैंकों में जमा किया। इस बीच जनवरी, 2011 में ट्यूनीशिया में जनता ने सड़कों पर उतरकर राष्ट्रपति बेन अली को अपदस्थ कर दिया। बेन अली को अपनी जान बचाने के लिए विदेश भागना पड़ा।


ट्यूनीशिया की क्रांति को देखकर मिश्च में भी विद्रोह भड़क उठा। लाखों बेरोजगार युवक मुबारक के खिलाफ उठ खड़े हुए। जगह-जगह प्रदर्शन होने लगे। सबसे अधिक प्रदर्शनकारी काहिरा के तहरीर चौक पर जमा हुए और होस्नी मुबारक के इस्तीफे की मांग करने लगे। 2 फरवरी को तहरीर चौक पर 20 घंटे का प्रदर्शन हुआ, जिसमें होस्नी मुबारक के फौजियों ने निर्दोष प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं। इस घटना में अनेक लोग मारे गए। इसके बाद होस्नी मुबारक का विरोध और बढ़ गया। अमेरिका सहित मिश्च के कुछ शुभचिंतक देशों ने हुस्नी मुबारक से कहा कि उन्हें दीवार पर लिखी इबारत को पढ़ना चाहिए और समय रहते पद त्याग कर देना चाहिए। आखिरकार मुबारक को त्यागपत्र देना ही पड़ा। सेना के प्रमुख अफसरों के हाथों में सत्ता सौंप कर वह मिश्च के शहर शर्म-अल-शेख चले गए जहां उनका निजी राजमहल था। जनता के आक्रोश को देखते हुए हुस्नी मुबारक के खिलाफ नरसंहार का मुकदमा दर्ज किया गया। पिंजरे में बंद करके हुस्नी मुबारक को काहिरा की अदालत में लाया गया। मुबारक निरीह आंखों से सरकारी वकील और जज को निहारते रहे मानो दया की भीख मांग रहे हों।


मुबारक के वकील ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति 83 वर्ष के हैं और दिल की बीमारी से ग्रस्त हैं। अत: उन पर दया कर मुकदमा न चलाया जाए। मिश्च ही नहीं पूरी अरब दुनिया में लोग उत्सुकता से होस्नी मुबारक के मुकदमे को टीवी पर देख रहे हैं। अधिकतर लोगों में रोष है कि 30 वषरें तक मुबारक और उनके परिवार के सदस्यों ने मिश्च को लूटा है, जिस कारण देश की आर्थिक स्थिति जर्जर हो गई है। जनता दाने-दाने को मोहताज हो गई है। महंगाई और बेकारी का तो कहीं अंत ही नहीं है। अत: होस्नी मुबारक और उनके बेटों को इसकी कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। पिछले अनेक वषरें से सऊदी अरब मिश्च का निकटतम मित्र रहा है। सऊदी अरब के शासकों का कहना है कि होस्नी मुबारक और उनके बेटों ने भ्रष्ट तरीके अपनाए इसमें कोई संदेह नहीं। परंतु पूर्व राष्ट्रपति की बीमारी को देखते हुए उन पर दया दिखानी चाहिए। अन्य अरब देशों में भी जगह-जगह होस्नी मुबारक के पक्ष में लोगों ने प्रदर्शन किया है। कुवैत के शासकों का कहना है कि कुवैत कभी भी होस्नी मुबारक के ऋण से उऋण नहीं हो पाएगा। गौरतलब है कि जब इराक ने कुवैत पर चढ़ाई कर उसे हड़प लिया था तब हुस्नी मुबारक कुवैत की रक्षा के लिए आगे आए थे। जल्द ही होस्नी मुबारक और उनके बेटों के भाग्य का फैसला हो जाएगा। मुबारक परिवार के प्रति मिश्च की जनता में इतना अधिक रोष है कि जजों के लिए भी उन पर कोई दया दिखाना आसान नहीं होगा।


लेखक गौरीशंकर राजहंस पूर्व सांसद एवं पूर्व राजदूत हैं


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