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किम के बाद कोरियाई प्रायद्वीप

Posted On: 23 Dec, 2011 Others में

जागरण मेहमान कोनाविभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों व विद्वानों के विचारों को उद्घाटित करता ब्लॉग

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उत्तर कोरिया के लोकप्रिय नेता किम जोंग इल की मौत के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। इल के रहते अशांत कोरियाई प्रायद्वीप धीरे-धीरे शांति की राह पर था, लेकिन अब दुनिया की चिंता यह है कि क्या इल का उत्तराधिकारी उनके शांति के नक्शेकदम पर चलेगा? हालांकि अभी यह तय नहीं हो पाया है कि उत्तराधिकारी कौन होगा, पर अनौपचारिक रूप से उनके युवा पुत्र किम जोंग उन को उत्तराधिकारी माना जा रहा है। भविष्य में जो भी हो, लेकिन मौजूदा हालात उत्तर कोरियाई लोगों के लिए बेहद दुखद और दक्षिण कोरियाई लोगों के लिए सुखद है। किम की मौत भारतीय कुटनीतिक नजरिए से भी ठीक नहीं है, क्योंकि दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के बीच लड़ाई के बावजूद और दक्षिण कोरिया का दोस्त होने के बावजूद भारत उत्तर कोरिया के साथ अपने रिश्ते संतुलिए किए हुए था। किम जोंग इल के युवा बेटे किम जोंग उन को समर्थन देने के लिए देशवासियों से अपील की जा रही है। अब सवाल यह है कि क्या उत्तर कोरिया के घोषित उत्तराधिकारी किम जोंग उन अपना प्रभुत्व पूरे देश पर कायम कर पाएंगे? किम जोंग उन की राजनीतिक क्षमताओं को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि सेना जैसे महत्वपूर्व सत्ता के केंद्र एक सामूहिक नेतृत्व की तरह काम करना चाहेंगे और उत्तर कोरिया की दूसरी पार्टियां अपना प्रभाव बढ़ाने का प्रयास करेंगी। ऐसे में उत्तर कोरिया का बाकी दुनिया के प्रति रवैया कैसा होगा यह तय कर पाना फिलहाल मुश्किल है। चूंकि प्योंगयांग की अंदरूनी राजनीति बेहद गोपनीय रही है इसलिए इसके तह तक पहुंचना आसान नहीं है। ऊपरी तौर पर जो दिख रहा है उसकी समीक्षा के उपरांत स्थितियां अनुकूल नहीं प्रतीत हो रही हैं। पिछले साल दक्षिण कोरियाई पोत का डुबोया जाना और दक्षिण कोरिया पर गोलाबारी को पश्चिमी देशों ने उत्तरी कोरिया के राजनीतिक उथल-पुथल और राजनीतिक बदलाव की भूमिका के तौर पर देखा था।


कोरियाई प्रायद्वीप में होने वाली किसी भी हलचल का महत्व, न केवल दोनों कोरियाई देशों के लिए, बल्कि अमेरिका से रिश्तों के लिए भी महत्वपूर्ण है। ऐसा इसलिए, क्योंकि अब भी दक्षिण कोरिया में अमेरिका के करीब 30 हजार ैसैनिक मौजूद हैं। वह समय अब खत्म हो गया जिसमें उत्तर कोरिया ने अमेरिका से अपने संबंध सुधारने के प्रयास शुरू किए थे और परमाणु कार्यक्रम के भविष्य को लेकर बातचीत शुरू की थी। चीन भी एक अहम मुद्दा है। चीन अब भी उत्तर कोरिया का सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी है और पिछले एक साल में संबंध प्रगाढ़ हुए हैं। हो सकता है कि उत्तर कोरिया की अंदरूनी राजनीति को प्रभावित करने में चीन ज्यादा सफल न हो, लेकिन उसकी आर्थिक सहायता उत्तर कोरिया के लिए अहम है जो अक्सर सूखे की चपेट में होता है। जहां तक वहां प्रभाव का सवाल है तो अमेरिका इसके लिए चीन की ओर ही देखेगा ताकि उत्तर कोरिया कोई खतरनाक सैन्य कदम न उठा सके। इल की मौत पर चीन और रूस ने अत्यंत दुख व्यक्त किया है तो अमेरिका दक्षिण कोरिया प्रकरण को सावधानी से देख रहा है। जानकारों की मानें तो सभी पश्चिमी देश किम जोंग इल की मौत को अपने लिए अच्छा मान रहे हैं और ब्रिटेन ने इस कोरियाई नेता की मौत को सकारात्मक शुरुआत का अवसर बताया है। उसने उत्तर कोरिया के नए नेता को यह समझने का अनुरोध किया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ जुड़ना उनके देश के लिए अच्छा होगा। इल के बारे में कहा जाता है कि वह दुनिया के अकेले वंशानुगत साम्यवादी शासक थे जिनकी मानवाधिकारों के उल्लंघन और परमाणु हथियार कार्यक्रम के अलावा लंबी दूरी की मिसाइलों के परीक्षण से क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालने के लिए आलोचना होती थी।


अपने पिता किम सुंग इल की 1994 में मौत के बाद जब किम जोंग इल ने सत्ता संभाली, उस समय उनके बारे में बहुत कम जानकारी थी। वह सार्वजनिक तौर पर कभी-कभार ही देखे गए। कहा जाता है कि 1987 में एक दक्षिण कोरियाई विमान को मार गिराने के लिए उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर निर्देश दिए और दक्षिण कोरियाई लोगों की नजर में किम जोंग इल की छवि एक घमंडी आदमी और हेयरस्टाइल वाले प्लेबॉय के रूप में थी जो लंबा दिखने के लिए प्लेटफॉर्म जूते पहनता था। हालांकि किम जोंग इल के बारे में मौजूद किस्सों से लगता है कि वह उतने बेवकूफ नहीं थे। किम जोंग इल के साथ ट्रेन से सफर करने वाले रूसी दूत की मानें तो पता चलेगा कि किम रोज विमान से जिंदा केकड़े मंगवाते थे, जिन्हें वे चांदी की चॉपस्टिक से खाते थे। वह ख़ूबसूरत और अक्लमंद महिला साथियों के साथ शैंपेन पीते थे। वर्ष 2000 में किम जोंग को तत्कालीन दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति किम डाए जुंग के साथ एक शिखर वार्ता के दौरान शराब के 10 ग्लास पीते देखा गया था। जो लोग किम जोंग इल से मिले थे, वे बताते हैं कि किम अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर नजर रखते थे। अपने देश में किम जोंग इल एक हीरो थे। कहा जा रहा है कि किम जोंग इल रूस के करीबी सहयोगियों में थे। वह चार महीने पहले रूसी राष्ट्रपति मेदवेदेव से मिलने भी गए थे।


रूस की सरकार इस क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण आर्थिक समझौतों को अंजाम देने के लिए दबाव बनाती रही है। इनमें से एक है रूसी गैस को उत्तर कोरिया के रास्ते दक्षिण कोरिया भेजने के लिए पाइपलाइन। इसके अलावा रूस का कई बिजली और रेल परियोजनाओं को बनाने का भी प्रस्ताव था। रूस पूरे घटनाक्रम को बहुत ध्यान से देख रहा है, क्योंकि वह उत्तर कोरिया का पड़ोसी है और क्षेत्र की राजनीतिक स्थिरता के बारे में चिंतित भी है। जापान ने अपने अधिकारियों से कहा है कि वे सतर्क रहें और किम जोंग इल की मृत्यु के बाद किसी भी आपात स्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहें। जापान के प्रधानमंत्री योशिहिको नोडा ने किम की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया। वहीं दूसरी ओर अमेरिका में राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका किम जोंग इल की मृत्यु के बारे में आ रही खबरों पर नजर रख रहा है। बराक ओबामा ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति और करीबी मित्र ली म्युंग बाक के साथ फोन पर बात की और कोरिया की सुरक्षा को लेकर अमेरिकी प्रतिबद्धता को दोहराया। अमेरिकी सीनेटर जॉन मैक्केन उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग इल की मृत्यु से बहुत खुश हैं। उन्होंने कहा है कि किम जोंग के बिना अब यह दुनिया बेहतर होगी, क्योंकि वह अपनी जनता के साथ बेहद क्रूर थे। इल 1994 से देश का नेतृत्व कर रहे थे। उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए ने लोगों से अपील की है कि वे युवा किम के लिए एकजुट हो जाएं। केसीएनए ने कहा कि सभी पार्टी सदस्य, सैनिक व आम जनता को कॉमरेड किम जोंग उन का समर्थन करना चाहिए। इससे पहले उत्तर कोरिया के सरकारी टेलीविजन किम जोंग इल की मौत की जानकारी दी गई। बताया गया कि जरूरत से ज्यादा शारीरिक व मानसिक कार्यो के कारण उनकी मौत हुई। हालांकि बाद में बताया गया कि किम जोंग की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई।


इस आलेख के लेखक राजीव रंजन तिवारी हैं


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