blogid : 1755 postid : 1320046

हैदराबाद केस के तीन पहलू

Posted On: 6 Dec, 2019 Common Man Issues में

चातकआओ खोजें हिंदुस्तान

chaatak

125 Posts

3892 Comments

हैदराबाद महिला चिकित्सक रेप केस में चारों अपराधियों का पुलिस एनकाउंटर में मार दिये जाने से एक बहुत बड़े ज़ख्म पर थोड़ा सा मरहम जरूर लगा है और इससे भारत के आधे-अधूरे लोकतंत्र में हर रोज रेप और हत्या के संत्रास को झेलती आधी-आबादी के चेहरे पर भय और चिंता की जगह आधे-पल के लिए संतोष का भाव भी जरूर आया है; परन्तु चर्चा और चिंतन के दौर चलते रहेंगे बुद्धिजीवी, समाजसेवी और राजनेता कुछ आधे-अधूरे, कुछ एकपक्षीय, कुछ पंगु न्यायव्यवस्था, तो कुछ अनर्गल मानवाधिकार के तर्क-कुतर्क भी करते रहेंगे‍‌ फिर भी दिशा के साथ हुए अन्याय पर मिले आधे-न्याय पर वाद-विवाद के तीन पहलू ये इशारा कर रहे हैं कि इस प्रकार की कुछ और त्वरित नजीरें हालात बदलने की कूबत रखती हैं|

 

 

 

बात को अधिक न बढ़ाते हुए हम चार दरिंदों के दोज़ख भेजे जाने से उत्पन्न कुछ शंकाओं और तथ्यों का एक विहंगम अवलोकन कर लें और सुनिश्चित हो सकें कि इससे हमारे देश की सामाजिक व्यवस्था को कितनी राहत मिलेगी और कितनी क्षति होगी|

 

 

 

इस एनकाउंटर का पहला भावात्मक पहलू है कि रिमांड पर लिए गए सभी अपराधियों के खुलासे इतने अमानवीय थे जिन्हें सुनने और समझने की ताब पुलिस के कानों में नहीं हो सकती और फिर पूरी साज़िश के साथ एक महिला, उसके परिवार व सभ्य समाज की आत्मा को चीर देने वाले वे चार दरिंदे जिस दंड के पात्र थे उसी हश्र के शिकार हुए!

 

 

 

इस प्रकार देखा जाए तो पुलिस ने वास्तव में दर्द और असुरक्षा में जी रही आधी आबादी के लिए राहत देने वाला एक साहसिक कदम उठाया है| इस बात में कोई संदेह नहीं है कि तेलंगाना पुलिस ने ऐसा करके अदालतों और राजनीति के समक्ष एक बड़ी लकीर खींच दी है तो साथ ही साथ देश की हर गली में छिपे बैठे दरिंदों के मन में अल्पकालिक ही सही भय भी उत्पन्न कर दिया है, इसलिए इस मुठभेड़ को एकमत से सराहा जाना चाहिए।

 

 

 

दूसरा ज्ञानात्मक पहलू वह हो सकता है जिसके लिए भारतीय पुलिस बदनाम है, अर्थात बन्दर को शेर बनाने की कला| केवल छः दिनों के अंतराल में पुलिस ने न सिर्फ केस को सुलझा लिया बल्कि अपराधियों, को उनके हश्र तक भी पहुंचा दिया ! प्रश्न तो खड़े होंगे ही कि आखिर किस दबाव में एनकाउंटर करना पड़ा? कहीं किसी रसूख वाले सफेदपोश को बचाने की खातिर इस्तेमाल किये गए चारों सहायकों को निपटाने के लिए तो नहीं?

 

 

 

नोट : ये लेखक के निजी विचार हैं, इससे संस्‍थान का कोई लेना-देना नहीं है।

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग