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"बिजली भाग गई" ?

Posted On: 19 Jun, 2012 Others में

कलम...{ "हम विलुप्त हो चुकी "आदमी" नाम की प्रजातियाँ हैं" / "हम कहाँ मुर्दा हुए हमें पता नहीं".....!!! }

महाभूत

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घुप्प इकदम घुप्प अँधेरा पसरा हुआ था, मेरे शेखचिल्ली दिमाग लगा बन्दर गुलाटियां मारने !ख्यालों के पुष्पक विमान पर बैठा में फ्रिसेवा का आनंद उठा ले रहा था !  इसी बहाने मै लगे हाथ सारे सुख भोग लेना चाहता था की तभी जाने क्या हुआ ! शायद विमान में तकनीकी ख़राब हुई और मै धडाम से आ गिरा ,वापिस अपनी नाकाम बेकार हकीकत की जमीन पर !

तभी कान में प्रतिवेशिओं की सुगबुगाहट सी सुनाई दी ,खिड़की से बाहर झांका तो यकीन मानिये इस महंगाई में मेरी धोती का रुमाल हो गया ,बदन के निकम्मे रोंगटे इकदम सेवा- सिग्नल को  चाक-चौकस हो गए ,

मेरे घर की देहरी के ठीक सामने गली के बीचो-बीच बिजली के खम्बे पर लगे सारे ज्योतिर्मय कुमार ,शालीन से दिखने वाले ‘ट्यूब’ ,विलायती फ्लोरोसेंट लैंप, कुछ बिजली के लटटू ,आवारा ‘बल्ब’ , हाथो में देशी ठर्रे का पव्वा लिए, आलती-पालती लगा महफ़िल सजाये बैठे थे !

मेरी तो सिट्टी पिट्टी गुम हो गई ,काटो तो पानी नहीं ,सोचा भाई कंही अँधेरे में मुझे कोई भूतिया असर तो नहीं हो गया,लग गई अपनी वाट ! ,पर जब बजरंगबली जी की टूटी-फूटी कंठस्थ कवितापाठ किया ,और उससे भी कुछ परिवर्तन नहीं हुआ  तो विश्वाश हुआ की भाई ! जो देख रहे हो ,वो सत्य  है !

श्रीमान शर्मीले जीरो वाट का लटटू : मुझे तो पहले ही शक  था बिजली के  चाल-चलन पर,कहती फिरती थी की ,मै तुम्हे जान से ज्यादा चाहती हूँ ,बाकी सब तो मेरे दोस्त है !  भाग गई सा@ बिजली !

ये सुन आवारा ‘बल्ब’ : ( जो खुद बिजली का पुराना आशिक था ) पर तुने भी तो यार हद कर दी ,किस बेगेरत बेहया “बिजली”  से दिल लगाया , जो सारा-सारा दिन भटकती फिरती रहती थी ! लो  अब भाग गई न कुलटा बिजली !

श्रीमान शर्मीले जीरो वाट के लटटू : खिन्नाते हुए ,” भाई जब दिल आया गधी पे, तो  परी क्या चीज है !

यह सुनकर ज्योतिर्मय कुमार ट्यूब : ओये बकवास ना कर , वो मुझसे मिलने आया करती थी ! थक गई थी वो तेरी  दो टके की बक-बक सुनकर !

वैसे भी वो तेरे साथ लिव-इन-रिलेशनशिप में थी ,कोई सात जन्म तक के फेरे नहीं लिए थे !

इससे पहले की दोनों के बीच हाथापाई की नौबत आती सामने से ” देवदास से दिखते  टेलीविजनों ” का पूरा दल विरह गीत गाते हुए आ रहा था ,गीत के बोल थे ,”इन्तहां हो गई इन्तजार की ,आई ना कुछ खबर मेरे यार की” !

ये सुन बेघर ट्यूब बोला,” भाई लोगो, किसके इन्तजार में ये दर्द भरा गीत गा रहे हो ! ये सुन सारे दूरदर्शन इक स्वर में बोले ,”मित्रवर  रूप की रानी हुस्न की मल्लिका” और तुम्हारी भाभी बिजली के इन्तजार में  !

ये सुन जैसे सारे ट्यूबों और बल्बों में वज्रपात हुआ, दो चार तो वँही लुढ़क लिए, और कुछ का तो वँही फ्यूज उड़ गया !

पियक्कड़ फ्लोरोसेंट लैंप बोला ( जो विलायत से पढ़ के आया था ) : अबे ओ दो टके के बल्ब , “क्यूँ इतना रोना लगा रखा है ,जा अंग्रेजी हाफ ले के आ ,इससे तो अपना गला भी गिला नहीं हुआ ,गम क्या ख़ाक गीला होगा” !

इससे पहले की बल्ब निकलता, बिजली के नए “फैन उर्फ़ पंखे ” हाथ में अंग्रेजी की बड़ी सी बोतल लिए किसी जोगी सन्यासी की तरह धुनी रमाते आ रहे थे ,”ये दुनिया ये महफ़िल मेरे काम की नहीं” !

ये देख पियक्कड़ फ्लोरोसेंट लैंप की बांछे खिल गयी , झट से बल्ब से दमड़ी  लपक अंटी में दबा लिए और बोला:बुद्धिराज मित्रवर ! हम है ना आपकी सेवा में ,हम है ना आपके , और ये महफ़िल तो पूरी की पूरी आप के काम की हैं ! और आप क्यूँ ऐसी जोगियाना गीत गा रहे हैं ,

इस बात ने जैसे उन फैन उर्फ़ पंखे की दुखती राग पर हाथ रख दिया था ! फैन उर्फ़ पंखे : बस यार अब जीने का दिल ही नहीं करता , हमारी मुहब्बत ,हमारी जिन्दगी “बिजली” हमे छोड़  के भाग गई है, हम सारा दिन उसके चक्कर में फिरते थे ,और वो हमे चक्कर दे भाग गई ,

ये सुन तो जैसे पूरी महफ़िल में और मातम छा गया ,लगे सब एक स्वर मे गा-गा कर  भगवान् का सीना चीरने ,”ओ दुनिया के रखवाले सुन दर्द भरे मेरे नाले ” !

ठीक उसी समय इक गाडी आकर रुकी ! सबको लगा, लो भैया हमारी मुहब्बत ने तो भगवान् को जमीं पर आने को मजबूर कर दिया, पर  उसमे से आलमगीर फ्रिज बाबु उतरे और बोले अभी-अभी मुझे किसी ने खबर दी है की ‘ बिजली ‘ अमीरजादे इनवर्टर के साथ गलबहियां डाले घूम रही है !

ये सुनते ही जैसे प्रतिशोध ,जलन ने सारे ज्योतिर्मय कुमार ,शालीन से दिखने वाले ‘ट्यूब’ ,विलायती फ्लोरोसेंट लैंप, दूरदर्शन ,फैन उर्फ़ पंखे ,बिजली के लटटू ,आवारा ‘बल्ब’को ज़िंदा कर दिया, सब इक साथ गुर्राए,”आज नहीं छोड़ेंगे उस कमीने अमीरजादे इनवर्टर को” ,और चल दिए उसके डेरे की तरफ !

मै भी, कब उनके पीछे हो लिया, पता ही नहीं लगा !

पर जैसे ही वो सब उनके घर के दरवाजे तक पहुचे अन्दर से इक एम्बुलेंस निकली  और सायरन बजाती निकल गई, ये देख कुछ सज्जन  से दिखते बल्ब बोले हंगामा खड़ा करने से पहले पता कर लेते है की आखिर माजरा क्या है !

बल्ब ने दरवाजे पर खड़े दरबान से पूछा ,” भाई साहब क्या हुआ” !

दरबान : वो हमारे सेठ जी ” इनवर्टर ” को दिल का दौरा पड़ा है ,पिछले कुछ दिनों से काफी दुखी और सदमे मे थे , सुनने मै आया था की उनकी इकलौती प्रेमिका “बिजली” भाग गई है, और वो ये सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाए ! ये सुन बल्ब उलटे पाँव हो लिए और आकर सभी पियक्कड़ो को संबोधित करते हुए बोले : ये  बेशर्म, बेवफा, बिजली किसी की सगी नहीं है ,इसने तो अमीरजादे बेचारे इनवर्टर को भी नहीं  छोडा,  भाग गई कलमुंही इसे भी छोड़ कर !

ये सुन सारे ज्योतिर्मय कुमार ,शालीन से दिखने वाले ‘ट्यूब’ ,विलायती फ्लोरोसेंट लैंप, दूरदर्शन ,फैन उर्फ़ पंखे ,बिजली के लटटू ,आवारा ‘बल्ब’ सर पकड़ बैठ गए , तभी फ्रिज को जाने क्या सूझा और बोला चलो थाने चल के बिजली की  गुमशुदगी की रपट लिखवाते है ,और जब हाथ आएगी तो सबक सिखायेंगे उसको !

पर विलायती फ्लोरोसेंट लैंप बीच मे ही टोकते हुआ  बोला : मित्रों पुलिसिया काम तो कछुए होते है , अब जाने कितना वक़्त लगे !इससे अच्छा होगा हम खुद “गुमशुदा बिजली” के नाम से पर्चे छपवाते है ,और इनाम भी रख देते है पुरे 50000 रूपए !और इसके लिए हमे उसके रंग रूप बनावट का विवरण देना होगा , तो कृपा मुझे उसकी बनावट शक्ल-सूरत के बारे मे लिखवा दे !

ये सुन जैसे होड़ लग गई ! कोई बोला रंग उसका गेहुआं था ,कोई बोला नहीं यार सांवल थी ,कोई बोला एकदम दूध थी ,और इक शोर गूंजने लगा !

मै खड़ा सोचने लगा भाई ऐसे मौके बार बार नहीं आते , काम से छुट्टी ले निकल पड़ो बिजली की तलाश मे, किस्मत बार बार दस्तक नहीं देती , और 50000 रूपए कोई छोटी रकम नहीं होती !

तो सभी अग्रजो ,मित्रों ,भाई बहनों ,बंधुओं , दुश्मनों (यदि कोई है तो ), जागरण टीम , संपादको , यदि  बिजली का पता, पता हो तो कृपा शीघ्र मुझे सूचित करे ,आपका 50000 रूपए मे से 50  % कमीशन पक्का !

” ढूँढीये ! क्यूंकि बिजली भाग गई ” ?

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