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"हिंदुत्व":एक सम्प्रदायिक उत्प्रेरक या सर्वहिताय राजधर्म ?

Posted On: 24 Jun, 2012 Others में

कलम...{ "हम विलुप्त हो चुकी "आदमी" नाम की प्रजातियाँ हैं" / "हम कहाँ मुर्दा हुए हमें पता नहीं".....!!! }

महाभूत

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LET US UNITसर्वप्रथम यंहा यह जानना अत्यंत  आवश्यक हो जाता है की आखिर हिंदुत्व क्या है ! इसका मुलभुत सैद्धांतिक  आधार क्या है और भारतीय समाज के लिए इसके मायने क्या हैं !  इसकी आवश्यकता क्या हमारे राष्ट्र और समाज के उन्नत अध्यात्मिक, सांस्कृतिक, और सर्वधर्म एकीकरण के लिए अपेक्षित है !

“हिन्दुत्व” शब्द मूलतः  फ़ारसी शब्द “हिन्दू” और संस्कृत प्रत्यय -त्व से बना है । कुछ प्रकांड हिन्दू विद्वानों और कट्टर हिंदूवादी संगठनों का मानना है की  हिन्दुत्व हिन्दू धर्म के अनुयायियों  के द्वारा विशेषतः हिन्दुओं के उत्थान के लिए इक सुसंगठित प्रयास है ! जंहा पर राष्ट्रिय विचारधारा हिंदुत्व को ही परिभाषित करती हो ! इस कट्टर संकीर्ण मानसिकता ने हिंदुत्व को तोड़मरोड़ दिया और इक विस्फोटक खतरनाक हिन्दुवाद को जन्म दिया !
इन कट्टर बुद्धिजीविओं ने हिंदुत्व और हिन्दुवाद को समरूप बना दिया ! हालाँकि हिंदुत्व और हिन्दुवाद दो अलग-अलग विषय-वस्तु हैं !

हिंदुत्व किसी भी धर्म ,वर्ण ,वर्ग ,सम्प्रदाय ,आश्था को भारतीय राष्ट्र के लिए अभिशाप नहीं मानता,  उसका मूल उद्देश्य भारतीय संस्कृति और उसकी अमूल्य धरोहरों को सरंक्षित करना है , इक मजबूत कौमी एकता और राष्ट्रवाद जागरण का नवनिर्माण करना है ,भारत की प्राकृतिक संपदा,गाय माँ ,गंगा और आध्यात्म के चंहुमुखी दिग-दिगंतो,स्तंभों  को विस्थापित होने से बचाना है ,

आज भारतीय समाज में बहुत सी हिंदूवादी संस्थाएं हिंदुत्व के अर्थ का दुरूपयोग कर अपनी कुसंगत विषाक्त जड़े भारतीय समाज में जमाने की चेष्टा में प्रयासरत है , राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ, बजरंग दल,सनातन संस्था , कुछ ऐसे संगठन है ,जो समय समय पर अपनी हिंदूवादी सोच के लिए हिंदुत्व के लिए इक शर्मनाक उदाहरण के रूप में चिन्हित हुए है ! आज फिर से हिंदुत्व इनके मानवी असंवेदना और हिंसक राष्ट्रविरोधी कुकृत्यों से आज भारतीय राजनीति में हाशिय पर रखा है ,

समय-समय पर कुछ गिने चुने कट्टरपंथियों ने मजहबी शागुफे छेड देश की एकता और अखंडता पर कठोर, क्रूर, कुठारघात किये है ! अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद ध्वस्तीकरण ,गुजरात में गोधरा काण्ड ,मालेगांव ब्लास्ट , मडगांव ब्लास्ट, हमारे हिंदुत्व के कपाल पर कभी ना मिटने वाली कालिख और शर्मनाक राष्ट्रिय दुर्घटना है ! जरासोचीय क्या कभी कोई धर्म,कोई धर्मवाद क्या उपदेश देता है की अपनी संप्रभुता और अपनी संस्कृति के बचाव के लिए उसके अनुयायी मासूम ,निर्दोष लोगो की न्रशंश: ह्त्या का स्वांग रचे ,क्या इन शर्मनाक बगुलाप्रयासों के काटे, आघात किये समाज के लहू से रक्त रंजित राज्यभिषेक प्रतिफूलित होगा !

क्या धर्म कहता है की आप पिशाचर हो किसी को धर्म के नामपर ज़िंदा जला दे ?  किसी भी अबला नारी के साथ धर्म के नाम पर किय अपने घिनोनेपन को छुपाये !  इन्ही चंद कट्टरपंथियों ने मुस्लिम धर्म में भी जेहाद की परिभाषा बदल दी है, और लगे है बरगलाने में अल्लाह और राम के मानने वालो को ! कोई भी धरम किसी एक वर्ण, वर्ग, जाति, सम्प्रदाय , के हित की बात नहीं कहता, वह तो सर्वजन सर्वधर्म हिताय की जरुरत को चिन्हित करता है !

आज भारतीय राजनीति में हिंदुत्व के नाम पर चक्रवात आया हुआ है , आप सोचीय क्यूँ जरुरत पड़ी की एक हिन्दू राजनेतिक नेता एक दुसरे हिन्दू राजनेतिक नेता का इतना कडा विरोध कर रहा है , इनके मतान्तरों से यह अभिप्रयाय निकलता है की कंही ना कंही तथाकथित राजनेतिक पार्टी या उसके हिंदुत्ववादी सोच में खोट है और सायद वह हिंदूवादी सोच की दकियानूसी मानसिकता में उलझा हुआ है ,जिसका मुलभुत  उद्देश्य इक वर्ग ,वर्ण की बात कर इक राष्ट्रिय साम्प्रदायिकता को जन्म देना है !

गुजरात का गोधरा काण्ड वंहा के नेताओं के दायित्विक आत्महत्या का इक विकृत घिनोना रूप है , जिसे उनके हिंदूवादी मलहम  ने सदभावना की उपेक्षा, इक वीभत्स दरार के रूप में और तोड़ने का प्रयास किया है ! तो क्या हम ऐसे निजाम शासक से सर्वहिताय राजधर्म की उपेक्षा कर सकते हैं जिसे किसी अन्य वर्ण-वर्ग-धर्म का सम्मान अछूत की तरह लगता है ,क्या ऐसी हिंदूवादी  सोच से आप इत्तेफाक रखते हैं  ?

जंहा तक मै समझता हूँ “हिंदुत्व” शब्द हिन्दुस्तान के एकजुट राष्ट्रनिर्माण और उसकी अखंडता और एकता ,संस्कृति के अथाह संकल्प को परिलक्षित करता है !

पर मै अपने आलेख से कोई भी निर्णायक फैसला नहीं करना चाहता ! मै चाहता हूँ भारतवासी होने के नाते हर धर्म- वर्ग- वर्ण- समुदाय-समाज का व्यक्ति ये तय करे की आखिर हिंदुत्व क्या है ?  “एक सम्प्रदायिक उत्प्रेरक या सर्वहिताय राजधर्म”  ?

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