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सचिन को नहीं ‘क्रिकेट’ को अंतिम विदाई !

Posted On: 14 Nov, 2013 Sports में

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कुछ महीने पहले क्रिकेट में बढ़ते भ्रष्टाचार के चलते उन प्रशंसकों को काफी मायूसी हुई थी जो इस खेल को धर्म मानकर इसकी भक्ति में लीन थे. उन्हें आघात पहुंचा जब उन्होंने खिलाड़ियों को इस भ्रष्ट दलदल में शामिल होते देखा. लेकिन लगता है कि ये प्रशंसक अपने इसी क्रिकेट रूपी धर्म की ओर दोबारा रुख कर रहे हैं. इसकी एकमात्र वजह है इस धर्म में भगवान की तरह पूजे जाने वाले सचिन तेंदुलकर.


sachin 131989 में अपने कॅरियर की शुरुआत करने वाले लिटिल मास्टर सचिन तेंदुलकर अपना आखिरी टेस्ट मैच मुंबई के वानखेड़े मैदान पर खेल रहे हैं. उनकी याद में पूरा देश सचिनमय हो चुका है. हर किसी को देखो तो क्रिकेट के इस भगवान को याद करके अंतिम बिदाई दे रहा है. जिसको देखो सचिन की एक झलक पाने के लिए बेताब दिख रहा है. ये वो लोग है जो सचिन को पिछले कई सालों से क्रिकेट के समानांतर मानते आए हैं. इनके लिए सचिन के बिना क्रिकेट की कल्पना करना शायद बहुत मुश्किल होगा.


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सचिन के बारे में ऐसा कहा जाता है कि जब भी वह मैदान पर उतरते हैं कुछ न कुछ रिकॉर्ड जरूर बना जाते है. अपने आखिरी मैच में भी उन्होंने कुछ ऐसा ही किया. लेकिन यह रिकॉर्ड उनके उन रिकॉर्डों की तरह नहीं है जो उन्होंने 24 साल की मेहनत के बाद हासिल किया हैं बल्कि ऐसे रिकॉर्ड है जो किसी भी खिलाड़ी के लिए बना पाना असंभव होगा.


जैसे पहली बार ऐसा हुआ जब किसी खिलाड़ी के कहने पर बीसीसीआई ने उसके घरेलू स्टेडियम में मैच कराने का निर्णय लिया हो. सचिन ने अपनी मां के लिए ही बीसीसीआई से 200वां मैच मुंबई में करवानी की अपील की थी. ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी खिलाड़ी का इतने सम्मानपूर्वक विदाई दी गई हो. यह पहली बार है जब विरोधी टीम के कप्तान ने किसी खिलाड़ी शतक लगाने के लिए अपनी इच्छा जाहिर की हो. वेस्टइंडीज टीम के कप्तान डारेन सैमी ने बुधवार को कहा कि विदाई श्रृंखला के मद्देनजर सचिन को जो सम्मान और प्यार मिल रहा है, वह उसके हकदार हैं. सैमी के मुताबिक वह चाहेंगे कि सचिन अंतिम टेस्ट में सैकड़ा जड़ें.


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सचिन को आखिरी बार खेलते देख पूरा माहौल भावनात्मक हो चुका है. इस तरह का माहौल उस समय देखने को मिला जब दो वर्ष पहले सचिन ने इसी वानखेड़े स्टेडियम में अपने युवा साथियों के साथ विश्वकप-2011 खिताब जीता था. वह क्षण टीम के साथ-साथ क्रिकेट प्रेमियों के लिए भी काफी भावनात्मक था. यह पूरा माहौल देखकर ऐसा लग रहा है कि जैसे सचिन की नहीं बल्कि सालों पुरानी क्रिकेट को अंतिम बिदाई दी जा रही है. सचिन की इस तरह की विदाई देखकर लोग उस स्थिति का अंदाजा लगा रहे जब सचिन 24 सालों बाद अपना पैड़ नहीं बांधेगे.


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