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वीजीएम सिक्योरिटी एप्प बनाने वाले मृत्युंजय सिंह की कहानी

Posted On: 12 Apr, 2018 Others में

The Top 10 Hacker, Dainik Jagran ReportSuccess Story ! Hacking Story ! Mrityunjay Singh

Dainik Jagran

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मैं एक मध्यम-वर्गीय परिवार से belong करता हूँ। मेरे पिता Former थे। और मैं उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के एक छोटे से गांव में पढ़ता था। बचपन में मेरा Interest Computer, internet और veterinary science में था। लेकिन मेरे पास कंप्‍यूटर नहीं था। मेरे दोस्‍तों के पास कंप्‍यूटर था और जब मैं उन्‍हें कंप्‍यूटर के बारे में बातें करते सुनता तो मैं कंप्‍यूटर पाने का उत्‍सुक हो जाता।

 

 

 

बचपन की मुश्किलें
उस वक्त हमारे घरवाले computer afford नहीं कर सकते थे। इसलिए मैंने अपने घर के नजदीक ही एक Internet Cafe ढूंढा। तब मुझे हर महीने सिर्फ 15 रूपए बतौर pocket money मिलते थे। इतने पैसों में रोज internet नहीं surf किया जा सकता था। लेकिन, मैंने इस दुकान के बारे में एक चीज notice की थी। ये हर रोज दोपहर में 1 बजे से 4 बजे तक बंद रहती थी। मैंने दुकानदार को एक offer दिया कि school के बाद 1 बजे से 4 बजे तक मैं आपकी दुकान खोलूंंगा और customers का ध्यान रखूंगा। बदले में आप मुझे free में net surf  करने देंगे। ये मेरी life की पहली business deal थी, और ये काफी सफल साबित हुई।

 

 

 

जब अपना पहला computer खरीदा
जब मैं 9th class में था तभी मैंने computer खरीदने के लिहाज से काफी पैसे जमा कर लिये थे। उस समय मेरा भाई Art की पढ़ाई कर रहा था। पापा ने सोचा उसे कंप्यूटर की ज़रूरत है और उसके लिए कंप्यूटर खरीद दिया। कुछ ही समय में मैंने भी एक कंप्यूटर खरीद लिया। पर मेरे घर पे net-connection नहीं था। Net-cafe में ज्यादा समय देने से मेरी पढाई भी प्रभावित हुई। मैंने 9th के बाद अपनी सारी summer vacation cafe में काम करते हुए बिताई।

 

 

 

UC  और ओपेरा मिनी ब्राउज़र को टक्‍कर 
मृत्युंजय सिंह ने दुनिया का सबसे छोटा ब्राउज़र बनाया जिसका नाम उन्होंने वीजीएम ब्राउज़र ( VGM Lite ) दिया। यह ब्राउज़र मात्र 800 केबी का है। इस ब्राउज़र को खास तौर पे धीमी नेट पे भी चलने के लिए बनाया गया है। इस ब्राउज़र ने UC ब्राउज़र और ओपेरा मिनी जैसी कंपनी को टक्कर देने के लिए बनाया गया है।

 

 

 

20 साल की उम्र में अपनी company 
Class 12th की छुट्टियांं खत्म होने के कुछ दिन बाद ही मैंने अपनी कंपनी Cobra Online Services Pvt. Ltd. की शुरुआत की। मैं कंपनी का नाम Cobra Group And Cobra Group Of Company रखना चाहता था। पर दोनों ही नाम available नहीं थे। इसलिए मैंने  Cobra Online Services Pvt. Ltd नाम रख लिया। पहले साल में Cobra Group Pvt. Ltd का turn-over Rs. 1 lac था। जो दुसरे साल में बढ़कर Rs. 9 Lacs हो गया।

 

 

 

नोट : यह लेखक के निजी विचार हैं, इसके लिए वह स्‍वयं उत्‍तरदायी है। संस्‍थान का कोई लेना-देना नहीं है।

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