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जहर का कहर

Posted On: 1 Aug, 2012 Others में

मुझे याद आते हैJust another weblog

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देश में बिहार,केरल महाराष्ट्र .मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश ,राजस्थान ,झारखण्ड ,हरियाणा और छत्तीसगढ़ में तंबाकूयुक्त गुटखा एवं पान मसाला पर प्रतिबंध लगा दिया गया है इसके साथ ही जिला और पुलिस प्रशासन को गुटखा बेचने वालों पर सख्ती करने का कानूनी अधिकार मिल गया है!! शेष राज्यों में भी बहुत जल्दी ये पाबन्दी लागू हो जाएगी ! प्रतिबन्ध लगाने के साथ साथ राज्य सरकारों ने कोर्ट में कैविएट भी दायर की है जिसके तहत गुटखा लाबी की किसी भी याचिका को सुनने और फैसला देने से पहले राज्य सरकारों का पक्ष भी सुना जाये ! इससे एक तरफ़ा फैसले और स्टे की आशंका समाप्त हो गई है अब एक नज़र इन आंकड़ो पर भी डालिए-

१)50 हजार करोड़ का कारोबार पूरे देश में

2)12हजार करोड़ की राजस्व प्राप्ति सरकारों को
3)40 हजार करोड़ का खर्च तंबाकू और गुटखा खाने से होने वाली बीमारियों के बचाव पर
4)27 करोड़ से अधिक लोग तंबाकू और गुटखे का सेवन करते है
5) बाजार में 500से भी अधिक तरह की तंबाकू और गुटखे की ब्रांड बिकती है

इस पाबन्दी के तहत गुटखे का वितरण और भंडारण करने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी।गुटखे पर प्रतिबंध के फैसले को भी व्यापारियों ने अपने लाभ के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। एक तरफ प्रतिबंध को हटाने की मांग की जा रही है,  गुटखे पर प्रतिबंध लगने के बाद व्यापारी राज्य सरकार पर समय देने के लिए लगातार दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं। !दूसरी तरफ व्यापारी इसी गुटखे को दो से तीन गुना ज्यादा कीमत पर बेचकर मुनाफा काटने में जुटे हैं। कई व्यापारियों ने आने वाले दिनों में ब्लैक मार्केटिंग करने के लिए इसका अवैध रूप से स्टाक करना शुरू कर दिया है। गुटखे की कालाबाजारी में मोटे फायदे को देखते हुए दूसरे धंधों के कारोबारियों ने भी इसमें मोटी रकम निवेश कर दी है। बाजार से नामी कंपनियों के गुटखे गायब हो रहे हैं और छुपकर निर्धारित कीमत से कई गुना ज्यादा कीमत में बिक रहे है ! प्रतिबंध लगाने के बाद दुकानदारों ने तंबाकू पाउच की लंबी माला को सामने से हटा कर उसके स्थान पर रसभरी सुपारी की माला लटका दी है।

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मगर गुटखा के शौकीनों का कहना है कि इसी की आड़ में उन्हें मंहगे दाम देने के बाद पाउच का पैकेट मिल जाता है। प्रतिबंध के बाद भी स्कूल के आस पास के पान ठेले और अन्य दुकानों में गुटखा सहजता के साथ उपलब्ध है। इन दुकानों में स्कूली बच्चे भी इसकी खरीदी करते हुए देखे जा सकते हैं। आजकल ऑफिस बसों और ट्रेनों सब जगह लोग मुह में तम्बाकू पर गुटखा खाते हुए बड़े से बच्चे तक ,महिलाए तक दिख जाएँगी यह जानते हुए कि तम्बाकू चबाने से मुह,गला ,अमाशय ,फेफड़े का कैंसर हो सकता है ,लोग इसके आदी है !भारतीय चिकित्सा अनुसन्धान कि रिपोर्ट पुरुषो में 50 प्रतिशत 25 प्रतिशत स्त्रियों में केंसर का कारण तम्बाकू है .इसका सेवन करने वालो में 90 प्रतिशत को मुह का केंसर है ! धुएं रहित तम्बाकू में 3000 से अधिक रासायनिक यौगिक है ! इनमे से २० यौगिक केंसर का कारण है !

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यह पाबंदी पूरे देश में लगे तभी इस पर प्रतिबंध कारगर साबित होगा। वरना आसानी से दूसरी जगह और राज्यों से छिपाकर इसे प्राप्त किया जा सकेगा !आदेशो के तहत जर्दा युक्त गुटखा ही प्रतिबंधित है। बिना जर्दे वाले पान मसाले पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। !जबकि पान मसाले में मौजूद निकोटीन कैंसर का कारक है ! गुटखे का ज्यादातर व्यापार ब्लैक में चल रहा है। ग्रे मार्केट में ही गुटखे की खरीदी-बिक्री हो रही है। प्रतिबंध लगने के बाद व्यापारी करोडो का स्टाक जाम होने की बात कह रहे हैं। स्टॉक के खुलासे के बाद अब टैक्स एजेंसियां कर चोरी के एंगल से भी जांच कर रही हैं। सरकारी एजेंसियों को भी शक है कि बिना बिल के माल को प्रतिबंध के बाद खातों में दिखाया जा रहा है। कारोबारी सूत्रों की माने तो इस धंधे में 40 फीसदी से ज्यादा का माल बिना बिल का होता है। आज व्यापारी खुद बोल रहे हैं कि उनके पास करोडो का माल जाम है। अब ये सोचने की बात है कि जो माल व्यापारियों के पास जाम है उसका क्या होगा ? वो चोरी छिपे जनता के हाथो में नहीं पहुंचेगा ? देखा जाये तो गुटखे पर सरकारी प्रतिबंध का कोई असर नजर नहीं आ रहा है।

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शहर के गली-मोहल्लों, कॉलोनी के ज्यादातर जनरल स्टोर्स और ठेलों में चोरी-छिपे गुटखे बिक रहे हैं। बैन के चलते लोग इन कंपनियों के गुटखों को ज्यादा खरीदकर स्टॉक कर रहे हैं। लेकिन अब भी एक सवाल बाक़ी है: सवाल है कि सरकार किस हद तक इस प्रतिबंध को लागू करवा पाएगी.पान मसाला और गुटखा के कारण सरकार काफ़ी राजस्व कमाती है. आशंकाएँ बरक़रार हैं क्योंकि दिल्ली सरकार ने भी कुछ साल पहले सार्वजनिक जगहों पर सिगरेट पीने वालों पर जुर्माना लगाने का फ़ैसला किया था लेकिन लोग अब भी बसों में और दूसरी सार्वजनिक जगहों पर सिगरेट पीते है !कई राज्यों में शराब पर भी प्रतिबन्ध है मगर आसानी से प्राप्त की जा सकती है ! जगह जगह राज्यों में जो तम्बाकू के उत्पाद हो रहे है उनका क्या होगा ,उनकी मौजूदगी में क्या ये प्रतिबन्ध प्रभावी होगा ?गुटखा फ़ैक्ट्रियों में काम करने वाले लोगों पर भी असर पड़ेगा.उनका रोजगार छिनने पर सरकारे क्या रुख अपनाएगी क्या प्रतिबन्ध लगाने से पहले उनके लिए भी कोई व्यवस्था का विचार किया है ?

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तंबाकूयुक्त गुटखे पर प्रतिबंध को अच्छा प्रयास है पर प्रतिबन्ध के साथ साथ जन साधारण में इससे होने वाले  नुकसान  से भी जागरूक करना जरुरी है  तभी ये प्रतिबन्ध कारगर होगा !!किन्तु सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि इस पाबन्दी के  तहत न तो तम्बाकू पर पाबन्दी लगाई गई है न गुटखे पर ,यह पाबन्दी तंबाकूयुक्त गुटखे पर  लगाई गई है !क्या  ये प्रतिबन्ध केवल सरकार और गुटखे के बड़े खिलाडियों की छोटे विक्रेताओ को मार्केट से गायब करने की मिली भगत है ?

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