blogid : 7831 postid : 48

मैं कितनी अकेली

Posted On: 28 Jan, 2012 Others में

मुझे याद आते हैJust another weblog

D33P

48 Posts

1061 Comments

मैं कितनी अकेली
सोचती हु आज मैं कितनी अकेली
हथेली की तरह फैली चौड़ी सड़क पर
समुन्द्र की तरह फैली महानगर की भीड़ है चारों तरफ
फिर भी
सोचती हूँ हाय आज मैं कितनी अकेली
कहकहे गूंजते है हर उलझन से मुक्त
गूंजती है बच्चो की किलकारियां
उन्मुक्त हंसी में भविष्य की धूप
देखकर उनको सोचती हु हाय
आज मै कितनी अकेली
क्यूँ हूँ जिन्दगी से हताश और निराश
गगन को देखती हूँ नज़र उठाकर
मेरी तरह वो भी है कितना अकेला
न सूरज उसका ना चाँद तारे उसके
तन्हा हूँ मैं आंसू की एक बूँद की तरह
साथी कोई मीत नहीं ,सुन्दर सपनो का गीत नहीं
चाहती हु हंस पडूँ मगर हंस नहीं पाती हूँ
और सोचती हु ……
हाय आज मैं कितनी अकेली

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग